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Mohini Ekadashi 2021: कब है मोहिनी एकादशी, जानिए भगवान विष्णु ने क्यों रखा मोहिनी रूप

Sat, 22 May 2021 07:23 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 22 May 2021 07:23 AM IST
सार

23 मई को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

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mohini ekadashi 2021 date katha importance and significance
मोहिनी एकादशी व्रत: इस दिन भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम एवं विष्णुजी के मोहिनी स्वरूप की पूजन-अर्चन किया जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हर वर्ष मोहिनी एकादशी का व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्री नारायण के निमित्त रखा जाता है। इस बार यह व्रत 23 मई को रखा जाएगा। भगवान श्री कृष्ण, युधिष्ठिर को मोहिनी एकादशी का महत्व समझाते हुए कहते हैं कि महाराज ! त्रेता युग में महर्षि वशिष्ठ के कहने से परम प्रतापी श्रीराम ने इस व्रत को किया। यह व्रत सब प्रकार के दुखों का निवारण करने वाला, सब पापों को हरने वाला व्रतों में उत्तम व्रत है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पाकर विष्णुलोक को जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम एवं विष्णुजी के मोहिनी स्वरूप की पूजन-अर्चन किया जाता है।

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श्रीनारायण की करें पूजा
एकादशी सब पापों को हरने वाली उत्तम तिथि है। चराचर प्राणियों सहित समस्त त्रिलोक में इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है। इस दिन समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान श्री नारायण की उपासना करनी चाहिए। रोली, मोली, पीले चन्दन, अक्षत, पीले पुष्प, ऋतुफल, मिष्ठान आदि अर्पित कर धूप-दीप से श्री हरि की आरती उतारकर दीपदान करना चाहिए। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' का जप एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत फलदायी है। इस दिन भक्तों को परनिंदा, छल-कपट,लालच,द्धेष की भावनाओं से दूर  रहकर,श्री नारायण को ध्यान में रखते हुए भक्तिभाव से उनका भजन करना चाहिए ।द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें।

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जब भगवान विष्णु ने रखा मोहिनी रूप
शास्त्रों के अनुसार मोहिनी, भगवान विष्णु का अवतार रूप थी। समुद्र मंथन के समय जब समुद्र से अमृत कलश निकला, तो इस बात को लेकर विवाद हुआ कि राक्षसों और देवताओं के बीच अमृत का कलश कौन लेगा। सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी। अमृत के कलश से राक्षसों का ध्यान भटकाने के लिए मोहिनी नामक एक सुंदर स्त्री के रूप में विष्णु भगवान प्रकट हुए। इस प्रकार, सभी देवताओं ने भगवान विष्णु की सहायता से अमृत का सेवन किया।यह शुभ दिन वैशाख शुक्ल  एकादशी का था, इसीलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह वही व्रत है जिसे राजा युधिष्ठिर और भगवान श्रीराम ने रखा था।

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मोहिनी एकादशी की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,सरस्वती नदी के पास भद्रावती नाम का एक सुन्दर नगर था। राजा धृतिमान जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे, इस स्थान पर शासन करते थे। उनके पाँच पुत्र थे, जिनमें से पाँचवाँ पुत्र जिसका नाम धृष्टबुद्धि था, बहुत बुरे कामों और अनैतिक कार्यों में शामिल होने वाला पापी था।यह सब देखकर, राजा धृष्टिमन ने धृष्टबुद्धि का त्याग कर दिया। जीवित रहने के लिए, वह डकैती के कृत्यों में शामिल हो गया। परिणामस्वरूप, उसे राज्य से बाहर निकाल दिया गया। धृष्टबुद्धी एक जंगल में रहने लगा। एक बार जब वह जंगल में भटक रहा था, तो वह ऋषि कौंडिन्य के आश्रम में पहुंचा। यह वैशाख मास का समय था और ऋषि कौंडिन्य स्नान कर रहे थे। कुछ बूंदें निकल गयीं और धृष्टबुद्धि पर पड़ गयीं। इस वजह से धृष्टबुद्धि ने आत्म-साक्षात्कार और अच्छी भावना को प्राप्त किया और इस तरह उसने अपने सभी अनैतिक कार्यों पर पछतावा किया। उसने ऋषि से अपने पिछले पापों और बुरे कर्मों से मुक्ति के मार्ग की तरफ जाने के लिए मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। इसके लिए, ऋषि ने उसे  मोहिनी एकादशी व्रत का पालन करने के लिए कहा, ताकि उसे पापों से छुटकारा मिल सके। एकादशी के दिन, धृष्टबुद्धि ने पूरी श्रद्धा के साथ एकादशी व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से  उसके सभी पाप धुल गए और वह विष्णु लोक में पहुंच गया।
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