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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Mauni Amavasya: मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु के इन मंत्रों का करें जाप, सभी कष्टों का होगा निवारण

Mauni Amavasya: मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु के इन मंत्रों का करें जाप, सभी कष्टों का होगा निवारण

Wed, 29 Jan 2025 06:44 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 29 Jan 2025 06:44 PM IST
सार

Mauni Amavasya Shubh Muhurat Rituals and Wishes in Hindi: मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है। कुंडली में शामिल अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है। इस बार माघी अमावस्या पर कई शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। आइए जानें इस दिन स्नान, दान और तप का महत्व।

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Mauni Amavasya: मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु के इन मंत्रों का करें जाप, सभी कष्टों का होगा निवारण
मौनी अमावस्या 2025 स्नान मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mauni Amavasya 2025: धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से माघ अमावस्या का विशेष महत्व है। इस वर्ष माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 29 जनवरी 2025 यानी आज है। प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन से इस साल मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहते हुए गंगा, यमुना समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ फलदायी होता है। इस दिन कई सारे धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं, जिन्हें बेहद कल्याणकारी माना गया है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर से जुड़ी सभी अहम जानकारी...
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Mauni Amavasya 2025 Date: कब है मौनी अमावस्या?
मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी। यह तिथि 28 जनवरी शाम 07:35 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी कि 29 जनवरी को शाम 06 बजकर 05 मिनट पर खत्म होगी। हिंदू धर्म की उदयातिथि को मान्यता प्रदान करते हुए यह असल में 29 जनवरी को ही मनाई जाएगी।
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Mahakumbh Second Amrit Snan: महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान
महाकुंभ का पहला अमृत स्नान 14 जनवरी को था, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया और अपार आस्था के साथ संगम में डुबकी लगाई। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान है, इसलिए इस दिन को अत्यधिक पुण्यदायी माना जा रहा है। इस दिन चंद्रमा और सूर्य मकर राशि में होंगे, जबकि गुरु वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन संगम में स्नान के साथ पितरों का तर्पण और दान की परंपरा भी है, जिससे व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है।  
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Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या तिथि कब से कब तक

कल मौनी अमावस्या का पर्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की अमावस्या तिथि 28 जनवरी को शाम 07 बजकर 32 मिनट से शुरू हो जाएगी और 29 जनवरी को शाम 06 बजकर 05 मिनट पर खत्म होगी। 

मौनी अमावस्या शुभ योग 

इस वर्ष मौनी अमावस्या पर बहुत ही शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस बार मकर राशि में एक साथ सूर्य, बुध और चंद्रमा की युति होगी जिससे त्रिवेणी योग का निर्माण होगा। इस योग में गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। 

मौनी अमावस्या पर मौन रखने का महत्व

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन मौन रखते हुए गंगा स्नान करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में मौन रखने का विशेष महत्व होता है। वेदों और उपनिषदों में मौन को ब्रह्मचर्य, सत्य और संयम के साथ जोड़कर देखा गया है। वैदिक काल में ऋषि-मुनि मौन को तपस्या का एक अनिवार्य अंग मानते थे। उनका विश्वास था कि मौन रहने से मन स्थिर होता है और विचारों की उथल-पुथल शांत हो जाती है। मौन के माध्यम से आत्मा और ब्रह्मांड के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है। इसके अलावा, मौन वाणी से होने वाले पापों, झूठ, और विवादों से बचने का मार्ग भी है। 

अमृत स्नान का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ के अमृत स्नान के समय जो भी श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए महाकुंभ में अमृत स्नान का विशेष महत्व है।

मौनी अमावस्या पर दुर्लभ संयोग

मौनी अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास का संयोग मौनी अमावस्या यानी 29 जनवरी को सायं 06: 05 मिनट तक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव कैलाश पर मां गौरी के साथ विराजमान रहेंगे।

सिद्धि योग

माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या पर सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। सिद्धि योग का संयोग रात 09 बजकर 22 मिनट तक है। ज्योतिष शास्त्र में सिद्धि योग को शुभ मानते हैं। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। इसके अलावा मौनी अमावस्या पर श्रवण एवं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।  

इन मंत्रों का करें जाप

इन विशेफ मंत्रों का जाप कर के आप अपने पितरों को खुश कर सकते हैं और इसे अधिक फलदायक भी बना सकते हैं।
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम।।
ॐ पितृ देवतायै नम:
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।।
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ।।

मौनी अमावस्या पर न करें ये काम

माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन वो काम नहीं करना चाहिए, जिससे आपके पितरों को कष्ट पहुंचे। ऐसे में आपकी सारी मेहनत और तपस्या पूरी तरह से व्यर्थ हो जाती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। यही नहीं, इस दिन आपको नाखून, बाल, मुंडन नहीं करवाना चाहिए। इसके साथ ही मदिरा और मांस का सेवन नहीं करना चाहिए। सात्विक भोजन कर ईश्वर में ध्यान लगाना चाहिए। झूठ बोलने और किसी से झगड़ा करने से भी परहेज करना चाहिए।

मौनी अमावस्या पर स्नान और दान के शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से शुरू होकर 6:19 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। अगर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान या दान संभव न हो, तो सूर्योदय से सूर्यास्त तक भी यह किया जा सकता है।

वैदिक काल में मौन का महत्व

वैदिक काल में ऋषि-मुनि मौन को तपस्या का एक अनिवार्य अंग मानते थे। उनका विश्वास था कि मौन रहने से मन स्थिर होता है और विचारों की उथल-पुथल शांत हो जाती है। मौन के माध्यम से आत्मा और ब्रह्मांड के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है। इसके अलावा मौन वाणी से होने वाले पापों, झूठ और विवादों से बचने का मार्ग भी है। वेदों और उपनिषदों में मौन को ब्रह्मचर्य, सत्य और संयम के साथ जोड़कर देखा गया है।

मौनी अमावस्या पर करें तिल का दान

मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें और इसके बाद श्रद्धापूर्वक काले तिल का दान करें। माना जाता है कि तिल का दान करने से मृत्यु के बाद बैकुंठ में स्थान मिलता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

मौनी अमावस्या पर पितरों के लिए दीपक जलाने का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं। इस दिन वे अपने वंशजों से तर्पण और दान की अपेक्षा करते हैं, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है। शाम को जब पितर अपने लोक लौटते हैं, तो उनके मार्ग को रोशन करने के लिए दीपक जलाया जाता है। ऐसा करने से पितर संतुष्ट होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

मौनी अमावस्या पर दीपक जलाने की विधि

मौनी अमावस्या की शाम मिट्टी का दीपक लें और उसे पानी से धोकर सूखा लें। दीपक में सरसों या तिल का तेल डालें और उसमें बाती लगाकर जलाएं। दीपक को घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखें, क्योंकि इसे पितरों की दिशा माना जाता है। दीपक को पूरी रात जलने दें। यदि घर में पितरों की तस्वीर है, तो उसके पास भी दीपक जलाया जा सकता है।

मौनी अमावस्या के दिन क्या करें ?

  • मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान जरूर करें। 
  • मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी और मां गंगा की पूजा करें। 
  • मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत या उपवास जरूर रखें 
  • मौनी अमावस्या के दिन शाम में तुलसी के पास घी का दीया जलाएं। 
  • मौनी अमावस्या के दिन अन्न, धन, वस्त्र आदि का दान जरूर करें। 
  • मौनी अमावस्या के दिन सूर्य देव को जल अर्घ्य जरूर दें। 
  • मौनी अमावस्या पर ‘ॐ पितृ देवतायै नम:’ मंत्र का 11 बार जाप करें। 

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय

पितृ दोष को समाप्त करने के लिए माघ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करें। इसके साथ ही विशेष चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन देवी-देवता और पितृ गंगा में स्नान करते आते हैं। ऐसे में आप मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करें। ऐसा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और पूर्वज प्रसन्न होते हैं। 
 

 

मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त 

29 जनवरी को मौनी अमावस्या का पर्व है और इस दिन प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में स्नान का विशेष महत्व होता है। इस समय लोग प्रयागराज के संगम तट पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए लगातार यात्रा कर रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार 29 जनवरी 2025 को अमृत स्नान के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 6 बजकर 18 मिनट तक है। इस शुभ मुहूर्त में लोग गंगा में स्नान करके पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।  

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मौनी अमावस्या पर जरूर लगाएं 5 डुबकी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान और उसके बाद दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। आज महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान भी है, जो आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। महाकुंभ में स्नान के दौरान पांच डुबकी लगाने का विशेष महत्व बताया गया है। इसमें प्रत्येक डुबकी का अपना अलग महत्व और विधि है।

मौनी अमावस्या पर 5 डुबकी लगाने की विधि

पहली डुबकी: पहली डुबकी लगाने के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्नान करें। इससे पहले गंगा, यमुना, सरस्वती और जल देवता को प्रणाम करना चाहिए। यह डुबकी आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

दूसरी डुबकी: दूसरी डुबकी भी पूर्व दिशा की ओर मुख करके लगानी चाहिए। इसे लगाने से कुल देवता और इष्ट देवता की कृपा प्राप्त होती है।

तीसरी डुबकी: तीसरी डुबकी उत्तर दिशा की ओर मुख करके लगानी चाहिए। इससे भगवान शिव, माता पार्वती, सप्त ऋषियों और गुरुओं का आशीर्वाद मिलता है।

चौथी डुबकी: चौथी डुबकी पश्चिम दिशा की ओर मुख करके लगानी चाहिए। यह किन्नर, यक्ष, गरुड़ और 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्रदान करती है।

पांचवीं डुबकी: अंतिम डुबकी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके लगानी चाहिए। यह डुबकी पूर्वजों की आत्मा की शांति और कल्याण के लिए होती है। इन पांच डुबकियों के माध्यम से श्रद्धालु सभी देवी-देवताओं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह स्नान जीवन में उन्नति और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
 

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Mauni Amavasya Triveni Yog: शनि की राशि में बन रहा है त्रिवेणी योग

इस बार मौनी अमावस्या पर बेहद शुभ योग बनने जा रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के आधार पर मौनी अमावस्या के दिन यानी आज शनि देव की राशि मकर में त्रिवेणी योग बन रहा है। माघी अमावस्या के दिन मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा और बुध ग्रह का योग होगा जिससे त्रिग्रह या त्रिवेणी योग का निर्माण होगा। इस दौरान देव गुरु बृहस्पति अपनी नवम दृष्टि से तीनों ग्रहों को देखेंगे जो नवपंचम योग का निर्माण करेगा। मौनी अमावस्या पर बनने वाले त्रिवेणी योग कई राशियों के लिए लाभकारी साबित होने वाला है। 

वृषभ राशि
मौनी अमावस्या के दिन वृषभ राशि के जातकों के भाग्य स्थान यानी नवम भाव में त्रिवेणी या त्रिग्रह योग का निर्माण होगा। इसके प्रभाव से वृषभ राशि के जातकों का आध्यात्म की ओर रुझान बढ़ेगा। इस दौरान आप धार्मिक यात्रा भी कर सकते हैं। त्रिवेणी योग के प्रभाव से आपके सुख साधनों में भी वृद्धि होने की संभावना है। पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने की संभावना है। जो जातक नौकरीपेशा हैं उनके लिए भी यह समय बहुत ही उत्तम रहेगा। कार्यक्षेत्र की बात करें तो वहां किसी प्रोजेक्ट में आपको बड़ी सफलता मिलने की संभावना है। वैवाहिक जीवन की बात करें तो संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। इसके साथ ही संतान पक्ष से आपको कोई खुशखबरी मिलने की संभावना है। 

कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के विवाह स्थान यानी सप्तम भाव में त्रिवेणी योग बनने जा रहा है। इस योग के शुभ प्रभाव से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहेगा। कर्क राशि के जातकों का रुझान धार्मिक कार्यों के प्रति भी रहेगा। आपके घर-परिवार में मांगलिक कार्य का भी संयोग बनने की संभावना है। त्रिवेणी योग के अनुसार आप जो भी यात्रा करेंगे उनसे आपको लाभ मिलने की संभावना है। 

कन्या राशि
त्रिवेणी योग का निर्माण कन्या राशि के जातकों के पंचम भाव में होने वाला है। पंचम भाव संतान सुख का माना जाता है। ऐसे में इस राशि के जो लोग संतान के इच्छुक हैं उन्हें संतान सुख भी मिल सकता है। माता पिता को बच्चों की तरफ से खुशी मिलने की संभावना है।इस दौरान  अविवाहितों के विवाह के योग भी बनने की संभावना है। आपको भाग्य का पूरा साथ मिलने से कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलने की संभावना है। 

मकर राशि 
मकर राशि के जातकों की बात करें तो त्रिवेणी योग मकर राशि में ही बनने जा रहा है। ऐसे में यह योग मकर राशि के जातकों के लिए सरवूतं लाभ लेकर आएगा। इस दौरान मकर राशि वालों को वो सब मिलेगा जो आप काफी लंबे समय से चाह रहे थे। इस दौरान मकर राशि के जातकों के जीवन में भौतिक सुख-साधनों की वृद्धि होगी वहीं समाज में आपकी प्रतिष्ठा बनेगी। जीवन में आपको एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। व्यापारियों को भी इस अवधि में बड़ा लाभ मिल सकता है। 
 

Maun Vrat On Mauni Amavasya: मौनी अमावस्या पर मौन का महत्व

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन का पालन करने से आत्मा शांत होती है। धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक परंपराओं में मौन को आत्मिक शांति और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। वैदिक काल में ऋषि-मुनि अपने तप और साधना में मौन का पालन करते थे। मौन केवल वाणी का त्याग नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की गहराई तक शुद्धता प्राप्त करने का माध्यम है। आज भी मौन साधना को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है।

वैदिक काल में मौन का महत्व

वैदिक काल में ऋषि-मुनि मौन को तपस्या का एक अनिवार्य अंग मानते थे। उनका मानना था कि मौन रहने से मन स्थिर होता है और विचारों की उथल-पुथल शांत हो जाती है। मौन के माध्यम से आत्मा और ब्रह्मांड के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है। इसके अलावा मौन वाणी से होने वाले पापों, झूठ और विवादों से बचने का मार्ग भी है। वेदों और उपनिषदों में मौन को ब्रह्मचर्य, सत्य और संयम के साथ जोड़कर देखा गया है।

Mauni Amavasya Snan Muhurat: स्नान का शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या पर स्नान का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5:25 से 6:18 तक रहा। ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाने से अमृत स्नान का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दौरान स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि आज राहुकाल को छोड़कर सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में कभी भी स्नान किया जा सकता है।

मौनी अमावस्या 2025: स्नान और दान का महत्व

मौनी अमावस्या के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यकारी माना जाता है, जिससे सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। धार्मिक ग्रंथों में दान को सबसे श्रेष्ठ कार्य बताया गया है। यदि कोई व्यक्ति पितृ दोष से प्रभावित है, तो उसे तिल, तेल और वस्त्रों का दान अवश्य करना चाहिए, जिससे शुभ प्रभाव प्राप्त हो सकते हैं।

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Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या पर स्नान की विधि

जो लोग मौनी अमावस्या के दिन कुंभ में स्नान करने नहीं जा सके, वे घर पर ही स्नान पात्र में गंगाजल मिलाकर उसमें अन्य जल डालें। इसके बाद मां गंगा, यमुना और सरस्वती का स्मरण करें और मन ही मन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते हुए स्नान करें। ऐसा करने से उन्हें कुंभ स्नान के समान ही आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।





Ganga Snan Mantra Lyrics: गंगा स्नान मंत्र

मंत्र- गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

 

मंत्र जाप के लाभ

हिंदू धर्म में प्रत्येक कार्य को मंत्रों से जोड़ने का उद्देश्य उसकी शुद्धता और पवित्रता बनाए रखना है। शास्त्रों के अनुसार, स्नान करते समय मंत्रों का उच्चारण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जिससे शरीर और आत्मा शुद्ध बनी रहती है। इसके अतिरिक्त नियमित मंत्र जाप से आरोग्य जीवन प्राप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। मान्यताओं के अनुसार, स्नान के दौरान विशेष मंत्रों के जाप से राहु के दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।

ब्रह्म मुहूर्त में नहीं कर पाए स्नान तो इस समय करें

मौनी अमावस्या पर स्नान का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5:25 से 6:18 तक रहा। ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाने से अमृत स्नान का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दौरान स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि आज राहुकाल को छोड़कर सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में कभी भी स्नान किया जा सकता है।
 

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मौनी अमावस्या 2025: पूजा-व्रत विधि

  • मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी, विशेष रूप से गंगा स्नान करने का महत्व बताया गया है। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा-अर्चना के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करें और तुलसी माता की 108 बार परिक्रमा करें।
  • पूजा के बाद अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, धन और वस्त्र दान करें। इस दिन मौन व्रत का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही अपने पूर्वजों का स्मरण अवश्य करें, जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

मौनी अमावस्या पर घर बैठे इस तरह करें स्नान

आज मौनी अमावस्या के अवसर पर महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान है। प्रयागराज में आयोजित अद्वितीय महाकुंभ मेले में करोड़ों लोग स्नान के लिए पहुंच रहे हैं. लेकिन जो लोग जाने में असमर्थ हैं वह अमृत स्नान का फल घर पर भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए घर पर ही अपने स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के दौरान गंगा मैया का ध्यान करें और "हर हर गंगे" मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से भी कुंभ स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।

डुबकी लगाने का नियम

कुंभ स्नान में नदी में पांच बार डुबकी लगाने की परंपरा है। यदि आप घर पर स्नान कर रहे हैं, तो मन ही मन गंगा स्नान का स्मरण करते हुए स्नान करें। स्नान के दौरान साबुन या अन्य रसायनों का प्रयोग करने से बचें, ताकि स्नान की पवित्रता बनी रहे।

घर पर स्नान का लाभ पाने के लिए उपाय

सूर्य और तुलसी को जल अर्पित करें- स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य की ओर अर्पित करें। इसके पश्चात अपने घर के आंगन या छत पर तुलसी मैया को जल चढ़ाएं।
दान का विशेष महत्व- महाकुंभ में दान को अत्यंत शुभ माना गया है। स्नान के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या धन का दान करें। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सात्विक जीवन शैली अपनाएं- इस दिन व्रत रखें और सात्विक भोजन करें। प्याज, लहसुन और तामसिक खाद्य पदार्थों से परहेज करें। इससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है।
श्रद्धा और पवित्रता बनाए रखें- महाकुंभ और शाही स्नान का असली महत्व शरीर की शुद्धता के साथ-साथ आत्मा की पवित्रता में भी है। इन नियमों का पालन करते समय मन में सच्ची श्रद्धा और पवित्रता का भाव रखें।

 

Mauni Amavasya Snan Muhurat: स्नान का शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या पर स्नान का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5:25 से 6:18 तक रहा। ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाने से अमृत स्नान का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दौरान स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि आज राहुकाल को छोड़कर सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में कभी भी स्नान किया जा सकता है।

Mauni Amavasya Snan Mantra: स्नान के दौरान मंत्र जाप का महत्व

स्नान के समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। महाकुंभ के दौरान गंगा माता की स्तुति करना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति को अनेक सकारात्मक फल मिलते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव के कुछ विशेष मंत्रों का जाप भी महत्वपूर्ण माना गया है। इन मंत्रों का जाप करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।

Mahakumbh 2025: महाकुंभ स्नान के दौरान करें इन मंत्रों का जाप, मिलेगी समस्त पापों से मुक्ति

 

गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं 
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

भगवान शिव के मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
 

  • नमामिशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं।।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
  • ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

संगम के जल का घर पर इस तरह करें प्रयोग

महाकुंभ स्नान का मुख्य महत्व संगम (गंगा, यमुना, सरस्वती) जल में डुबकी लगाना है। यदि आप कुंभ स्नान करने नहीं जा सकते, तो जो व्यक्ति कुंभ स्नान करने गया हो उससे संगम का जल मंगवा लें और स्नान करते समय अपनी बाल्टी के पानी में कुछ बूंदें इस पवित्र जल की मिला लें या इस जल से शरीर पर छींटे लगा लें। इसे गंगा स्नान के समान ही फलदायी माना जाता है। स्नान के बाद भगवान का ध्यान करें और प्रार्थना करें कि आपको कुंभ स्नान का पुण्य प्राप्त हो।

भगवान का ध्यान और पाठ करें

महाकुंभ के दौरान स्नान का आध्यात्मिक लाभ तभी पूर्ण होता है जब व्यक्ति भगवान का ध्यान करता है। इसलिए घर पर रहकर भगवदगीता, रामायण या गंगा स्तोत्र का पाठ करें। इसके अलावा, "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ गंगे च यमुने चैव" जैसे मंत्रों का जाप करें। ये मंत्र आपके मन को शुद्ध करेंगे और कुम्भ स्नान के समान पुण्य प्रदान करेंगे।

दान-पुण्य करें

कुंभ में स्नान के बाद दान-पुण्य का महत्व बताया गया है। यदि आप घर पर हैं, तो गरीबों को भोजन, वस्त्र, और आवश्यकता की चीजें दान करें। खासकर अन्न, तिल, गुड़, और गाय को चारा खिलाने से महाकुंभ स्नान के समान फल मिलता है।

व्रत और उपवास रखें

महाकुंभ में उपवास और तप का भी विशेष महत्व है। घर पर रहकर एक दिन का उपवास रखें और केवल फलाहार ग्रहण करें। उपवास के साथ ईश्वर का ध्यान करें और प्रार्थना करें कि आपको कुंभ स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त हो।

दीप जलाकर गंगा मैया की आरती करें

घर पर गंगा मैया की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप जलाएं और उनकी आरती करें। आरती के साथ "गंगा च यमुने चैव" का पाठ करें। इससे घर का वातावरण शुद्ध होगा और आपको कुंभ स्नान का पुण्य मिलेगा।

सूर्य अर्घ्य दें

महाकुंभ के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। घर पर सुबह स्नान करने के बाद जल में गंगाजल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें।

मन के विकारों को दूर करें  

महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य आत्मा की शुद्धि है एवं मन के विकारों को दूर करना है।इस पवित्र स्नान का उद्देश्य तन को धोना ही नहीं है अपितु मन को पावन करना है। इसलिए जीवन में कोई भी गलत कार्य नहीं करने का संकल्प लें। तामसिक भोजन, बुरी आदतें, और नकारात्मकता से हमेशा दूर रहें।

Mahakumbh 2025 Amrit Snan Dates: महाकुंभ 2025 अमृत स्नान की तिथियां 

13 जनवरी (सोमवार)- स्नान, पौष पूर्णिमा
14 जनवरी (मंगलवार)- अमृत स्नान, मकर सक्रांति
29 जनवरी (बुधवार)- अमृत स्नान मौनी अमावस्या
3 फरवरी (सोमवार)- अमृत स्नान, बसंत पंचमी
12 फरवरी (बुधवार)- स्नान, माघी पूर्णिमा
26 फरवरी (बुधवार)-  स्नान, महाशिवरात्रि

मौनी अमावास्य 2025 अमृत स्नान विशेष मुहूर्त
आस्था के महापर्व महाकुंभ में आज यानी मौनी अमावास्य पर दूसरा अमृत स्नान किया जा रहा है, यहां देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने के लिए आ रहे हैं। इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो महाकुंभ में स्नान के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में आप शाम के समय इन मुहूर्त में घर पर ही स्नान कर सकते हैं, जिससे अमृत स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है।

शाम का स्नान-दान शुभ मुहूर्त

  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 55 मिनट से 06:22 मिनट तक
  • अमृत काल- रात 09:19 मिनट से 10:51 मिनट तक 

घर पर इस विधि से करें अमृत स्नान

  • घर पर अमृत स्नान करने के लिए आप सबसे पहले जल में थोड़ी गौ रज यानी की गाय के गोबर की राख मिला लें। 
  • उसमें कुछ बूंद गंगाजल की भी डाल लें।
  • अब स्नान करें, इस दौरान साबुन का उपयोग न करें। 
  • स्नान के बाद आप साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • अब अपने दाहिने हाथ में दूब घास की 16 गांठें लेकर देवी-देवताओं का ध्यान करें।

स्नान के समय इन मंत्रों का करें जाप
“त्रिवेणी माधवं सोमं भरद्वाजं च वासुकिम्। वन्दे अक्षय वटं शेषं प्रयागं तीर्थनायकम।।” 
“गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन सन्निधिं कुरू।” 

इन मंत्रों से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद
मौनी अमावास्य के दिन पूजा के समय आप इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं, इससे वंशों पर पितरों की कृपा बनी रहती हैं।

  • ॐ पितृ देवतायै नमः
  • ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्
  • ॐ श्री पितराय नमः
  • ॐ श्री पितृदेवाय नमः
  • ॐ श्री पितृभ्य: नमः
  • ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात
  • ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये तीन उपाय

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं, इससे पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती हैं।
  • मौनी अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा शांति के लिए पिंडदान करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त होती हैं।
  • मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से घर-परिवार की सारी परेशानी समाप्त होती है।

मौनी अमावस्या पर दान का महत्व
इस वर्ष मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ होने के कारण इस तिथि को बेहद कल्याणकारी माना जा रहा है, इतना ही नहीं इस दिन महाकुंभ में दूसरा अमृत स्नान भी किया जा रहा है, ऐसे में आप इस तिथि पर जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और खान-पान से जुड़ी चीजों का दान करें। इस दौरान तिल, गुड़ और गाय को चारा खिलाना बेहद लाभकारी हो सकता है, मान्यता है कि ऐसा करने पर महाकुंभ स्नान के समान फल मिलता है।

मौनी अमावस्या पर मौन का महत्व 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या आंतरिक आवाज को सुनने और मन को शांत रखने का अवसर है, इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती हैं। कहा जाता है कि इस दिन मौन रहने से वाणी का नियंत्रण और ऊर्जा का संरक्षण होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मौन ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है और इससे व्यक्ति की एकाग्र क्षमता भी बढ़ती हैं।

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने के लाभ
  • आत्मिक शांति और ध्यान में वृद्धि
  • वाणी का नियंत्रण और ऊर्जा का संरक्षण
  • संयम और आत्म-अवलोकन
  • संबंधों में सुधार
  • आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर से संपर्क

मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी योग
मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में दूसरा अमृत स्नान किया जा रहा है, वहीं इस दिन शनि देव की राशि मकर में त्रिवेणी योग बन रहा है। माघी अमावस्या के दिन मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा और बुध ग्रह का योग बन रहा है, जिससे त्रिग्रह या त्रिवेणी योग का निर्माण होगा। इस दौरान देव गुरु बृहस्पति अपनी नवम दृष्टि से तीनों ग्रहों को देखेंगे जो नवपंचम योग का निर्माण करेगा। 

त्रिवेणी योग से इन तीन राशियों को मिल सकता है लाभ

वृषभ राशि
ज्योतिष गणना के अनुसार त्रिवेणी योग के प्रभाव से इस राशि के लोगों के सुख साधनों में वृद्धि होने की संभावना है। कार्यक्षेत्र के किसी प्रोजेक्ट में आपको बड़ी सफलता मिल सकती है। वैवाहिक जीवन की बात करें तो संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। संतान पक्ष से आपको कोई खुशखबरी मिलने की संभावना है। 

कर्क राशि 
कर्क राशि के जातकों का रुझान धार्मिक कार्यों के प्रति रहेगा। आपके घर-परिवार में मांगलिक कार्य का भी संयोग बनने की संभावना है। त्रिवेणी योग के अनुसार आप जो भी यात्रा करेंगे उनसे आपको लाभ मिलने की संभावना है। 

मकर राशि
आपके सुख-साधनों में वृद्धि होगी। समाज में भी आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी। जीवन में आपको एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। व्यापारियों को भी इस अवधि में बड़ा लाभ मिल सकता है। 

मौनी अमावस्या पर करें तिल के उपाय 

  • मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में काले तिल का उपयोग अवश्य करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • इस दिन एक लोटे में जल लेकर उसमें काले तिल डालकर भगवान शिव का अभिषेक करें। ऐसा करने से शिव जी की कृपा प्राप्त होती है।
  • मौनी अमावस्या पर काले तिल का दान करने से कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं।

शनि देव के इन मंत्रों का करें जाप
मौनी अमावस्या पर शाम के समय शनि देव की पूजा करें। आप पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करें।

शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।

शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।

शाम को जरूर जलाएं दीपक
इस साल महाकुंभ की अवधि में मौनी अमावस्या पड़ने पर यह तिथि बेहद शुभ मानी जा रही है। इस दिन शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जरूर जलाना चाहिए, इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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