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Masik Durga Ashtami January 2022 : पौष माह की दुर्गाष्टमी आज, जानिए महत्व, पूजन सामग्री और पूजा विधि
Mon, 10 Jan 2022 07:42 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 10 Jan 2022 07:42 AM IST
सार
Masik Durga Ashtami January 2022: हिंदू माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में शुक्ल और कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि आती है जिसमें शुक्ल पक्ष की मासिक अष्टमी का विशेष महत्व होता है।
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पौष महीने की दुर्गा अष्टमी का विशेष महत्व होता है।
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विस्तार
Masik Durga Ashtami January 2022 : आज अष्टमी तिथि है और यह तिथि देवी दुर्गा को समर्पित होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर देवी दुर्गा की पूजा-उपासना की जाती है। हिंदू धर्म में मां दुर्गा की उपासना करने का विशेष महत्व होता है। अष्टमी तिथि पर दुर्गा उपासना करने से सेहत अच्छी रहती है। बीमारियां दूर होकर लंबी आयु की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि हर माह की अष्टमी तिथि पर पूजा-अर्चना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करती हैं। आइए जानते हैं मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व तिथि और सामग्री व पूजन विधि के बारे में।
पौष माह की मासिक दु्र्गाष्टमी का महत्व
पौष महीने की दुर्गा अष्टमी का विशेष महत्व होता है। पौष महीने में शीत ऋतु होती है और इस माह में सूर्य की विशेष आराधना की जाती है। शास्त्रों में अष्टमी तिथि पर देवी उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि पौष महीने में शक्ति की आराधना करने से परेशानियां कम हो जाती है। हिंदू माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में शुक्ल और कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि आती है जिसमें शुक्ल पक्ष की मासिक अष्टमी का विशेष महत्व होता है।
मासिक दुर्गा अष्टमी पूजन सामग्री
रोली या कुमकुम, दीपक, रुई (बाती के लिए), घी, लौंग, कपूर,इलायची, सूखी धूप, मौली(कलावा),नारियल, अक्षत, पान, पूजा की सुपारी, फूल,फल, मिष्ठान, लाल चुनरी, श्रृंगार का सामान,आदि।
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मासिक दुर्गाष्टमी पूजन विधि
प्रातः जल्दी उठकर घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई करें और स्वयं भी स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
अब पूजा स्थान पर पूजा करनी हो तो वहां पर गंगाजल का छिड़काव करें, या फिर एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल आसन बिछाकर उसपर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद माता रानी को लाल चुनरी चढ़ाएं और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
अब मां दुर्गा के समक्ष धूप दीप प्रज्वलित करें।
कुमकुम, अक्षत से तिलक करें और मौली, लाल पुष्प लौंग कपूर आदि से विधि पूर्वक पूजन करें।
पान के ऊपर सुपारी और इलायची रखकर चौकी पर मां दुर्गा के समक्ष रखें।
अब मां दुर्गा को फल व मिष्ठान अर्पित करें।
पूजन के दौरान मां दुर्गा का स्मरण करते रहें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
पूजन पूर्ण होने के बाद मां दुर्गा की आरती करें और पूजन में हुई भूल के लिए क्षमा मांगे।
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पौष माह की मासिक दु्र्गाष्टमी का महत्व
पौष महीने की दुर्गा अष्टमी का विशेष महत्व होता है। पौष महीने में शीत ऋतु होती है और इस माह में सूर्य की विशेष आराधना की जाती है। शास्त्रों में अष्टमी तिथि पर देवी उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि पौष महीने में शक्ति की आराधना करने से परेशानियां कम हो जाती है। हिंदू माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में शुक्ल और कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि आती है जिसमें शुक्ल पक्ष की मासिक अष्टमी का विशेष महत्व होता है।
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मासिक दुर्गा अष्टमी पूजन सामग्री
रोली या कुमकुम, दीपक, रुई (बाती के लिए), घी, लौंग, कपूर,इलायची, सूखी धूप, मौली(कलावा),नारियल, अक्षत, पान, पूजा की सुपारी, फूल,फल, मिष्ठान, लाल चुनरी, श्रृंगार का सामान,आदि।
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मासिक दुर्गाष्टमी पूजन विधि
प्रातः जल्दी उठकर घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई करें और स्वयं भी स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
अब पूजा स्थान पर पूजा करनी हो तो वहां पर गंगाजल का छिड़काव करें, या फिर एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल आसन बिछाकर उसपर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद माता रानी को लाल चुनरी चढ़ाएं और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
अब मां दुर्गा के समक्ष धूप दीप प्रज्वलित करें।
कुमकुम, अक्षत से तिलक करें और मौली, लाल पुष्प लौंग कपूर आदि से विधि पूर्वक पूजन करें।
पान के ऊपर सुपारी और इलायची रखकर चौकी पर मां दुर्गा के समक्ष रखें।
अब मां दुर्गा को फल व मिष्ठान अर्पित करें।
पूजन के दौरान मां दुर्गा का स्मरण करते रहें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
पूजन पूर्ण होने के बाद मां दुर्गा की आरती करें और पूजन में हुई भूल के लिए क्षमा मांगे।