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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Makar Sankranti 2022 to get wealth and prosperity Recite this praise of Mata Lakshmi today

Makar Sankranti 2022: आज करें माता लक्ष्मी की इस स्तुति का पाठ, होगा धन लाभ

Fri, 14 Jan 2022 09:04 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 14 Jan 2022 09:04 AM IST
सार

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति आज शुक्रवार को पड़ रही है और शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी  का माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है। आज के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से आने वाले दिनों में शुभ और लाभ की प्राप्ति होती है। इस साल मकर संक्राति के दिन स्नान-दान के बाद तिल के तेल का दिया जलाकर माता लक्ष्मी की स्तुति करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। 

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Makar Sankranti 2022 to get wealth and prosperity Recite this praise of Mata Lakshmi today
मकर संक्रांति 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति के इस त्योहार का विशेष महत्व है। कई स्थानों पर आज यानि 14 जनवरी को संक्रांति मनाई जा रही है। और कुछ इस पर्व को 15 जनवरी को मनाएंगे। मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य के पूजन का विधान है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और गरीब, जरूरमंद लोगों को दान देन की परंपरा है।मकर संक्रांति के दिन खरमास समाप्ति हो रही है। इस दिन के बाद से सभी मांगलिक और शुभ कार्य प्रारम्भ हो जाएंगे। मकर संक्रांति आज शुक्रवार को पड़ रही है और शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी  का माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है। आज के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से आने वाले दिनों में शुभ और लाभ की प्राप्ति होती है। इस साल मकर संक्राति के दिन स्नान-दान के बाद तिल के तेल का दिया जलाकर माता लक्ष्मी की स्तुति करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। आइए पढ़ते हैं सम्पूर्ण महालक्ष्मी स्तोत्र

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Makar Sankranti 2022 to get wealth and prosperity Recite this praise of Mata Lakshmi today
महालक्ष्मी स्तोत्र   - फोटो : istock

महालक्ष्मी स्तोत्र  

ऊँ नम: कमलवासिन्यैनारायण्यैनमो नम: ।
कृष्णप्रियायैसारायैपद्मायैच नमो नम: ।।1।।
पद्मपत्रेक्षणायैच पद्मास्यायैनमो नम: ।
पद्मासनायैपद्मिन्यैवैष्णव्यैच नमो नम: ।।2।।
सर्वसम्पत्स्वरूपायैसर्वदात्र्यैनमो नम: ।
सुखदायैमोक्षदायैसिद्धिदायैनमो नम: ।।3।।
हरिभक्तिप्रदात्र्यैच हर्षदात्र्यैनमो नम: ।
कृष्णवक्ष:स्थितायैच कृष्णेशायैनमो नम: ।।4।।
कृष्णशोभास्वरूपायैरत्नपद्मेच शोभने।
सम्पत्त्यधिष्ठातृदेव्यैमहादेव्यैनमो नम: ।।5।।
शस्याधिष्ठातृदेव्यैच शस्यायैच नमो नम: ।
नमो बुद्धिस्वरूपायैबुद्धिदायैनमो नम: ।।6।।
वैकुण्ठे या महालक्ष्मीर्लक्ष्मी: क्षीरोदसागरे।
स्वर्गलक्ष्मीरिन्द्रगेहेराजलक्ष्मीर्नृपालये।।7।।
गृहलगृ क्ष्मीश्च गृहिगृ णां गेहेच गृहगृ देवता ।
सुरभी सा गवां माता दक्षिणा यज्ञकामिनी ।।8।।
अदितिर्देवमाता त्वंकमला कमलालये।
स्वाहा त्वंच हविर्दानेकव्यदानेस्वधा स्मृता ।।9।।
त्वं हि विष्णुस्वरूपा च सर्वाधारा वसुन्धरा ।
शुद्धसत्त्वस्वरूपा त्वं नारायणपरायणा ।।10।।
क्रोधहिंसावर्जिता च वरदा च शुभानना ।
परमार्थप्रदा त्वंच हरिदास्यप्रदा परा ।।11।।
यया विना जगत्सर्वंभस्मीभूतमसारकम्।
जीवन्मृतंच विश्वंच शवतुल्यं यया विना ।।12।।
सर्वेषांच परा त्वं हि सर्वबान्धवरूपिणी ।
यया विना न सम्भाष्यो बान्धवैर्बान्धव: सदा ।।13।।
त्वया हीनो बन्धुहीनस्त्वया युक्त: सबान्धव: ।
धर्मार्थकाममोक्षाणांत्वंच कारणरूपिणी ।।14।।
यथा माता स्तनन्धानां शिशूनांशैशवेसदा ।
तथा त्वंसर्वदा माता सर्वेषांसर्वरूपत: ।।15।।
मातृहीन: स्तनत्यक्त: स चेज्जीवति दैवत: ।
त्वया हीनो जन: कोsपि न जीवत्येव निश्चितम्।।16।।
सुप्रसन्नस्वरूपा त्वं मां प्रसन्ना भवाम्बिके ।
वैरिग्रस्तंच विषयं देहि मह्यंसनातनि ।।17।।
वयं यावत्त्वया हीना बन्धुहीनाश्च भिक्षुका: ।
सर्वसम्पद्विहीनाश्च तावदेव हरिप्रिये।।18।।
राज्यं देहि श्रियं देहि बलं देहि सुरेश्वरि ।
कीर्तिं देहि धनं देहि यशो मह्यंच देहि वै।।19।।
कामं देहि मतिं देहि भोगान्देहि हरिप्रिये।
ज्ञानं देहि च धर्मंच सर्वसौभाग्यमीप्सितम्।।20।।
प्रभावंच प्रतापंच सर्वाधिकारमेव च ।
जयं पराक्रमं युद्धे परमैश्वर्यमेव च ।।21।।

फलश्रुति:
इदं स्तोत्रं महापुण्यं त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।
कुबेरतुल्य: स भवेद् राजराजेश्वरो महान्।।
सिद्धस्तोत्रं यदि पठेत्सोपि कल्पतरुर्नर: ।
पंचलक्षजपेनैव स्तोत्रसिद्धिर्भवेन्नृणाम्।।
सिद्धिस्तोत्रं यदि पठेन्मासमेकं च संयत: ।
महासुखी च राजेन्द्रो भविष्यति न संशय: ।।
।।इति श्रीब्रह्मवैवर्तमहापुराणेइन्द्रकृतंलक्ष्मीस्तोत्रंसम्पूर्णम्।।

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