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Mahavir Jayanti 2021: महावीर जयंती आज, ऐसे हुई थी वर्धमान को कैवल्य की प्राप्ति
Sun, 25 Apr 2021 08:31 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Sun, 25 Apr 2021 08:31 AM IST
सार
30 वर्ष की आयु में अपने राजसी जीवन को त्यागकर वे सत्य की खोज में निकल पड़े और एक महात्मा बनकर दुनिया को अहिंसा परमो धर्म: का पाठ पढ़ाया। जैन पवित्र पुस्तकों के अनुसार, वैशाख के दसवें दिन वे पटना के निकट पावा नामक नगर में पहुंचे थे, जहां उन्हें 'कैवल्य' की प्राप्ति हुई और उनका नाम महावीर पड़ा।
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हैप्पी महावीर जयंती 2021
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Mahavir Jayanti 2021 Date: महावीर जयंती 25 अप्रैल, रविवार को मनाई जा रही है। यह जैन समुदाय का बड़ा पर्व है। जैन समुदाय के लोग महावीर जयंती 24वें तीर्थंकर महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। महावीर जयंती को जैन समुदाय के लोगों द्वारा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में लोग पूजा करते हैं और शोभा यात्रा निकालते हैं।
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वर्धमान से महावीर बनने की यात्रा
महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। उनका जन्म वैशाली के कुंडलग्राम में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहां हुआ था। उनके बचपन का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की आयु में अपने राजसी जीवन को त्यागकर वे सत्य की खोज में निकल पड़े और एक महात्मा बनकर दुनिया को अहिंसा परमो धर्म: का पाठ पढ़ाया। जैन पवित्र पुस्तकों के अनुसार, वैशाख के दसवें दिन वे पटना के निकट पावा नामक नगर में पहुंचे थे, जहां उन्हें 'कैवल्य' की प्राप्ति हुई और उनका नाम महावीर पड़ा।
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जैन दर्शन
महावीर ने जैनियों को अपने अंदर त्याग, कठोर तपस्या और नैतिकता विकसित करने करने की सीख दी। जैन नैतिक रूप से अपने धर्म से बाध्य हैं ताकि वे ऐसा जीवन व्यतीत करें जो अन्य किसी प्राणी को हानि न पहुंचाए। महावीर का विश्वास था कि सही विश्वास (सम्यक दर्शन), सही ज्ञान (सम्यक ज्ञान) और सही आचरण (सम्यक चरित) से कोई भी व्यक्ति स्वयं को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है। जैनियों को जीवन में पांच निग्रहों का पालन करने की आवश्यकता है -
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- अहिंसा (हिंसा का त्याग)
- सत्य (सच्चाई)
- अस्तेय (चोरी न करना)
- अपरिग्रह (उपार्जन न करना)
- ब्रह्मचर्य (जीवन में समय)