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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Mahashivratri 2025 Shiv Rudrashtakam Stotram Lyrics and Benefits

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर जरूर करें 'श्री शिव रुद्राष्टकम' स्तुति का पाठ, कष्ट हरेंगे महादेव

Tue, 25 Feb 2025 07:02 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 25 Feb 2025 07:02 AM IST
सार

Shri Rudrashtakam Lyrics: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे हर साल फाल्गुन मास में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ और देवी पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था

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Mahashivratri 2025 Shiv Rudrashtakam Stotram Lyrics and Benefits
Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Shri Rudrashtakam Lyrics: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे हर साल फाल्गुन मास में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ और देवी पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन शिव जी को प्रसन्न करने और उनकी भक्ति में लीन होने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। कहते हैं कि यदि महाशिवरात्रि पर सच्चे भाव महाकाल को केवल एक लोटा जल चढ़ाया जाए, तो वह साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस दौरान 'श्री शिव रूद्राष्टकम' का पाठ करना और भी कल्याणकारी होता है, इसके प्रभाव से व्यक्ति को शत्रु पर विजय प्राप्त होती है। बता दें 'शिव रुद्राष्टकम' अपने-आप में अद्भुत स्तुति है, इसका महाशिवरात्रि पर पाठ करने पर साधक के धन-धान्य में वृद्धि अकाल मृत्यु से बचाव व पुत्र प्राप्ति के योग का निर्माण होता है।

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पंचांग के अनुसार इस साल चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। वहीं, इस दिन महाकुंभ मेले के समापन के साथ-साथ यहां अंतिम स्नान भी किया जाएगा। ऐसे में इस स्तुति का पाठ करना और भी लाभकारी है। आइए इसके बारे में जानते हैं। 

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शिव रुद्राष्टकम पाठ
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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