फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Maghi Purnima 2025 shubh yog and muhurat know pitru suktam path in hindi

Magh Purnima 2025: पितरों को प्रसन्न करने के लिए माघ पूर्णिमा पर करें ये काम

Wed, 12 Feb 2025 06:33 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Wed, 12 Feb 2025 06:33 AM IST
सार

माघ पूर्णिमा की शुभ तिथि पर सृष्टि से संचालक भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना करने से साधक के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। 

विज्ञापन
Maghi Purnima 2025 shubh yog and muhurat know pitru suktam path in hindi
Magh Purnima 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Magh Purnima 2025: हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन स्नान-दान व पूजा-पाठ करने से साधक के दुखों का अंत होता है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा की शुभ तिथि पर सृष्टि से संचालक भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना करने से साधक के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दौरान भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और भी कल्याणकारी होता है। कहते हैं कि यदि माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान और भगवान शिव की पूजा की जाए, तो परिवर से सभी ग्रह दोष समाप्त होते हैं।

विज्ञापन

वहीं इस बार 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा मनाई जा रही है। परंतु इस बार महाकुंभ होने के कारण माघी पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ गया है। बता दें, माघ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर महाकुंभ में पवित्र स्नान का आयोजन किया गया है। ज्योतिषियों की मानें तो माघ पूर्णिमा की तिथि पर आश्लेषा नक्षत्र भी बन रहा है, जो शाम 7 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सौभाग्य योग का भी संयोग है, जो रात 8:06 मिनट तक रहेगा। इस योग में 'पितृ सूक्तम्' का पाठ करने से पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त हो सकती है। ऐसे में आइए इस पाठ के बारे में जानते हैं

विज्ञापन

पितृ सूक्तम् का पाठ
उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।
तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥

ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।
तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥

त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।
तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥

त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।
वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥

त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।
तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।
तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥

आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।
बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।
तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।
अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः।
अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।
तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥

अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।
ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।
मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥

आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।
पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed