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Lohri 2022 Lokgeet: सुन्दिरिये-मुन्दिरिये जैसे लोहड़ी के लोकगीत के बिना अधूरा रहता है लोहड़ी पर्व

Thu, 13 Jan 2022 07:38 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 13 Jan 2022 07:38 AM IST
सार

Lohri 2022 Lokgeet: लोहड़ी पर सभी लोग नए कपड़े पहनकर लोहड़ी के गीत गाते हुए एक दूसरे को  बधाईयां देते हैं। लोहड़ी के मौके पर आप भी लोहड़ी के लोकगीत गाकर खुशियां मना सकते हैं।

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Happy Lohri 2022: बच्चे के जन्म के बाद और विवाह होने के बाद पहली लोहड़ी विशेष रूप से मनाने की परंपरा होती है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Lohri 2022 Lokgeet: दिल्ली, पंजाब और हरियाणा समेत देश के उत्तरी हिस्सों में लोहड़ी का त्योहार बड़े ही उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी लोहड़ी मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाई जा रही है। लोहड़ी का पर्व किसान फसलों की तैयार होने की खुशी में मनाते हैं। लोहड़ी के दिन सभी लोग फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भगवान और प्रकृति का विशेष रूप से शुक्रिया अदा करते हैं। इस दिन पर लोग सभी लोग एकत्रित होकर गीत गाते हुए नृत्य आदि करते हैं। इसके अलावा लोहड़ी के पर्व मनाने के पीछे दूसरी मान्यताएं भी हैं। ऐसी मान्यता है कि जिन घरों में नया शादीशुदा जोड़ा या फिर किसी बच्चे का जन्म होता है, उस घरों में लोहड़ी का त्योहार बड़े उत्साह और खास तरीके से मनाया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद और विवाह होने के बाद पहली लोहड़ी विशेष रूप से मनाने की परंपरा होती है।

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लोहड़ी गीत 2022( Lohri 2022 Lokgeet)
सभी लोग लोहड़ी की रात बाहर एक जगह पर एकत्रित होकर लोहड़ी जलाते हैं। इस दौरान लोहड़ी की परिक्रमा करते हुए उसमें रेवड़ी, मूंगफली, मक्का और तिल से बनी चीजों को अर्पित करते हैं। इस अवसर पर सभी लोग नए कपड़े पहनकर लोहड़ी के गीत गाते हुए एक दूसरे को लोहड़ी की बधाईयां देते हैं। लोहड़ी के मौके पर आप भी लोकगीत गाकर खुशियां मना सकते हैं। आइए पढ़ते हैं कुछ प्रसिद्ध लोहड़ी के लोकगीत....
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सुन्दिरिये-मुन्दिरिये
सुन्दिरिये-मुन्दिरिये-हो तेरा कौन विचारा-हो
दुल्ला मही वाला-हो दुल्ले ने घी ब्याही-हों
सेर शक्कर पाई-हो कुड़ी दा लाल पटाका-हो
कुड़ी दा सालू फाटा-हो सालू कौन समेटे-हों
चाचा चूरी कुट्टी-हों जमीदारा लूटी-हो
जमींदार सुधाये-हो बड़े भोले आये-हों
इक भोला रह गया-हों सिपाही पकड़ के लै गया-हों
सिपाही ने मारी ईट, भाँवे रो, ते भाँवे पीट
सानू दे दे, लोहड़ी तेरी जीवे, जोड़ी

सालू कौन समेटे हो, चाचे चूरी कुट्टी हो,
जमीदारां लुट्टी हो, जमीदारां सदाए हो,
गिन-गिन पोले लाए हो, इक पोला घट गया,
ज़मींदार वोहटी ले के नस गया, इक पोला होर आया,
ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया,

सिपाही फेर के लै गया, सिपाही नूं मारी इट्ट, भावें रो ते भावें पिट्ट,
साहनूं दे लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी

कंडा कंडा
कंडा कंडा नी लकडियो कंडा सी
इस कंडे दे नाल कलीरा सी
जुग जीवे नी भाबो तेरा वीरा सी,
पा माई पा, काले कुत्ते नू वी पा
कला कुत्ता दवे वदायइयाँ,
तेरियां जीवन मझियाँ गईयाँ,
मझियाँ गईयाँ दित्ता दुध,
तेरे जीवन सके पुत्त,
सक्के पुत्तां दी वदाई

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