{"_id":"659ba87922cdb589a008b865","slug":"lohri-2024-know-who-is-dulla-bhatti-history-and-significance-in-hindi-2024-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lohri Festival 2024: दुल्ला भट्टी के बिना अधूरा है लोहड़ी का त्योहार, जानें इससे जुड़ी कहानी","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Lohri Festival 2024: दुल्ला भट्टी के बिना अधूरा है लोहड़ी का त्योहार, जानें इससे जुड़ी कहानी
Sun, 14 Jan 2024 08:22 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Sun, 14 Jan 2024 08:22 AM IST
सार
हर साल लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी को पड़ता है लेकिन पंचांग के हिसाब से इस बार ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। वैसे तो अन्य त्योहारों की तरह लोहड़ी से जुडी कई लोक कथाएं प्रचलित हैं। इन लोककथाओं का ज़िक्र लोहड़ी के लोकगीतों में किया जाता है। उन्हीं लोकगीतों में एक नाम दुल्ला भट्टी का भी आता है।
विज्ञापन
Lohri 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Lohri Dulla Bhatti Story: देशभर में लोहड़ी का त्योहार बेहद हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से लोहड़ी पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। वैसे तो हर साल लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी को पड़ता है लेकिन पंचांग के हिसाब से इस बार ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। वैसे तो अन्य त्योहारों की तरह लोहड़ी से जुडी कई लोक कथाएं प्रचलित हैं। इन लोककथाओं का ज़िक्र लोहड़ी के लोकगीतों में किया जाता है। उन्हीं लोकगीतों में एक नाम दुल्ला भट्टी का भी आता है। आइए जानते हैं दुल्ला भट्टी के बिना क्यों अधूरा माना जाता है लोहड़ी का पर्व।
विज्ञापन
क्या है दुल्ला भट्टी और लोहड़ी का संबंध
कुछ मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी को होलिका की बहन माना जाता है,जो भक्त प्रह्लाद के साथ आग से बच गई थी,जबकि अन्य मान्यताओं के अनुसार इस त्योहार का नाम लोई के नाम पर रखा गया था, जो संत कबीर की पत्नी का नाम था। इसीलिए लोग हर साल लोहड़ी मनाने के लिए आग जलाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं लोहड़ी का त्यौहार दुल्ला भट्टी के ऐतिहासिक चरित्र से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं विस्तार से।
विज्ञापन
दुल्ला भट्टी एक राजपूत मुस्लिम था, जो कथित तौर पर पंजाब क्षेत्र से आया था। उसने अकबर के शासनकाल के दौरान मुगल शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। किंवदंती के अनुसार, मुगल शासक हुमायूं ने दुल्ला के जन्म से चार महीने पहले उसके पिता फरीद खान और दादा संदल भट्टी की हत्या कर दी थी। विद्रोहियों के दिलों में भय पैदा करने के लिए दोनों की खालों को गेहूं की घास में भरकर भरवा गांव के बाहर लटका दिया गया। उनकी हत्या कर दी गई क्योंकि उन्होंने मुगलों को कर देने का विरोध किया था।
विज्ञापन
अपने परिवार की मौत का बदला लेने के लिए दुल्ला भट्टी उस युग का रॉबिनहुड बन गया। वह अकबर के जमींदारों से माल लूटकर गरीबों और जरूरतमंदों में बांट देता था। अकबर उन्हें डाकू के रूप में देखता था।
इसके अलावा दुल्ला को उन महिलाओं को बचाने के लिए जाना जाता है, जिन्हें जबरन गुलाम बाजारों में बेचने के लिए ले जाया गया था। फिर उसने गांव के लड़कों से उनकी शादी तय की और आर्थिक रूप से मदद की। बचाई गई लड़कियों में सुंदरी और मुंदरी भी शामिल थीं जो अब पंजाब के लोकगीत सुंदर मुंदरिये से जुड़ी हुई हैं। लोककथाओं के अनुसार, दुल्ला भट्टी इतना शक्तिशाली था कि अकबर की 12 हजार की सेना उसे पकड़ नहीं पाई, इसलिए 1599 में लड़ाई के दौरान उसे धोखे से पकड़ लिया गया और फिर उसे फांसी दे दी गई। इसलिए लोहड़ी पर्व के दिन लोग दुल्ला भट्टी और उनके बलिदान को याद करते हैं।