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Lohri 2024: जानें क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व और इससे जुड़ी मान्यता

Sun, 14 Jan 2024 09:36 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sun, 14 Jan 2024 09:36 AM IST
सार

Lohri 2024 Puja Vidhi: इस साल 14 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है।

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Lohri 2024 date Know About Religious and Social Importance of Lohri in Hindi
क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व - फोटो : iStock

विस्तार

Lohri 2024 Puja Vidhi: इस साल 14 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस पर्व पर शाम के समय लोग तैयार होकर एक जगह इकट्ठा होते हैं। फिर आग जलाई जाती है और उसके इर्द-गिर्द डांस किया जाता है। साथ ही आग के आस-पास घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी भी सुनी जाती है। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन आग के चारों ओर नाच गाना करते हैं। इस दौरान 'सुंदर मुंदलिए' करके एक गाना भी गाया जाता है। साथ ही लोहड़ी के दिन घर की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना भी की जाती है। ऐसे में चलिए जानते हैं लोहड़ी पर्व से जुड़ी मान्यता के बारे में... 

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कहां से आया लोहड़ी शब्द?
लोहड़ी शब्द को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि लोहड़ी शब्द लोई से उत्पन्न हुआ था, जोकि संत कबीर की पत्नी हैं। कई लोग का मानना है कि यह तिलोड़ी से उत्पन्न हुआ है, जो बाद में लोहड़ी हो गया। वहीं कुछ लोग यह मानते हैं कि लोहड़ी शब्द लोह से उत्पन्न हुआ था, जो चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है। 
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लोहड़ी पर जरूर सुनी जाती है दुल्ला भट्टी की कहानी
लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। दरअसल मुगल काल में अकबर के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में ही रहता है। कहते हैं कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की उस वक्त रक्षा की थी जब संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था। वहीं एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं अमीर सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई थी। तभी से दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर ये कहानी सुनाई जाने लगी।

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लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?

  • लोहड़ी के लिए कई दिनों पहले से ही लकड़ियां इकट्ठा की जाती हैं। 
  • इन लकड़ियों को किसी खुले और बड़े स्थान पर रखा जाता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इकट्ठा होकर एक साथ त्योहार मना सकें।  
  • लोहड़ी की रात सभी लोग लकड़ियों के चारों ओर इकट्ठा होते हैं फिर पारंपरिक तौर से आग लगाई जाती है।  
  • इस अग्नि के चारों ओर लोग नाचते-गाते हुए उसमें मूंगफली, गजक, पॉपकॉर्न, मक्का और रेवड़ी की आहुति देते हैं।  
  • इस दौरान पारंपरिक लोक गीतों को गाया जाता है। 

 

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