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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Lohri 2021 Date signifaicance and story of the Lohri

Lohri 2021 Date: कब है लोहड़ी, जानें क्यों मनाया जाता है यह पर्व

Wed, 30 Dec 2020 09:26 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 30 Dec 2020 09:26 PM IST
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Lohri 2021 Date signifaicance and story of the Lohri
लोहड़ी 2021 - फोटो : अमर उजाला।

Lohri 2021 Date: लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को मनाया जाएगा। यह उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार है। हालांकि मूल रूप यह पंजाब का सांस्कृति पर्व है। लेकिन इस पर्व की व्यापकता इतनी अधिक है कि यह पूरे उत्तर भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन आग में तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। आग के चारों तरफ चक्कर लगाकर सभी लोग अपने सुखी जीनव की कामना करते हैं। लोहड़ी की खास बात ये भी है कि इस पर्व में संगीत और नृत्य का तड़का इसे और भी खूबसूरत बना देता है।

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Lohri 2021 Date signifaicance and story of the Lohri
उत्साह का पर्व है लोहड़ी - फोटो : अमर उजाला
इसलिए मनायी जाती है लोहड़ी

पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुवाई और कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। इस अवसर पर पंजाब में नई फसल की पूजा करने की परंपरा है। इसके अलावा कई हिस्सों में माना जाता है यह त्योहार पूस की आखिरी रात और माघ की पहली सुबह की कड़क ठंड को कम करने के लिए मनाया जाता है।

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Lohri 2021 Date signifaicance and story of the Lohri
लोहड़ी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
लोहड़ी पर्व जुड़ी परंपराएं

लोहड़ी के इस पावन अवसर के दिन अग्नि जलाने के बाद उसमें तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। वहीं इसके बाद सभी लोग अग्नि के गोल-गोल चक्कर लगाते हुए सुंदरिए-मुंदरिए हो, ओ आ गई लोहड़ी वे, जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते इस पावन पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं।

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Lohri 2021 Date signifaicance and story of the Lohri
लोहड़ी 2021 - फोटो : अमर उजाला
दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी में लोग गीत गाते हुए दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए नाच गाना करते हैं। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। दरअसल, मुगल काल में अकबर के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में ही रहता है। कहते हैं कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की उस वक्त रक्षा की थी जब संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था। वहीं एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं अमीर सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई थी। और तभी से इसी तरह दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर ये कहानी सुनाई जाने लगी।

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