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Krishna Janmashtami 2024: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री कृष्ण जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि

Mon, 26 Aug 2024 10:59 AM IST
श्वेता सिंह गुंजन वार्ष्णेय,ज्योतिषाचार्य
गुंजन वार्ष्णेय,ज्योतिषाचार्य Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 26 Aug 2024 10:59 AM IST
सार

श्रीकृष्ण पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीकृष्ण की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 26 अगस्त को है।

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Krishna Janmashtami 2024 Date Time Shubh Sanyog Puja vidhi Mahatv
janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीकृष्ण पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीकृष्ण की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 26 अगस्त को है।
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जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो भक्ति और अध्यात्म की शक्ति से पूरा न हो सके। बस, इस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता होती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान, नियम-संयम द्वारा भक्त, भगवान की ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों के अंश अपनी भक्ति-शक्ति एवं क्षमता के अनुपात में जागृत करते हैं। श्रीकृष्ण का जीवन और उनकी लीलाएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से न केवल भगवान को पाया जा सकता है, बल्कि जीवन की अधूरी अभिलाषाओं को भी पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे वो संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो या धन, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति अथवा दुख निवृत्ति। आज के समय में भी देश-विदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर असंख्य भक्तों के मन का उत्साह द्वापर युग की याद दिलाता है।

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Krishna Janmashtami 2024 Date Time Shubh Sanyog Puja vidhi Mahatv
Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

योगमाया है लीला का विस्तार
जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव तो है ही, साथ में श्रीकृष्ण की माया को विस्तार देने वाली योगमाया का भी प्रादुर्भाव दिवस है, जिनका जन्म बालकृष्ण को कंस के हाथों से बचाने के लिए हुआ था। भगवती योगमाया ने कन्या के रूप में उस युग में जन्म लेकर मानव जाति को यह दिव्य संदेश दिया कि कन्या का जन्म बलिदान के लिए नहीं होता। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर योगमाया को उसके पैरों से पकड़कर जमीन पर जोर से पटककर मारना चाहा तो योगमाया ने अट्टहास कर कंस से कहा, “मैं चाहूं तो तुम्हें इसी समय मार सकती हूं, किंतु तुमने मेरे पैर पकड़े हैं और तुम्हारा काल कोई दूसरा है, इस वजह से मैं तुम्हारी जान नहीं ले सकती।” योगमाया कंस के चंगुल से छूटकर अंतर्ध्यान होकर स्वर्ग को जाने से पहले कंस को चेतावनी दे गई थीं कि तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।

 

Krishna Janmashtami 2024 Date Time Shubh Sanyog Puja vidhi Mahatv
Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

दुर्लभ संयोग
इस बार 26 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 26 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 26 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।

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Janmashtami 2024 - फोटो : Instagram

महापुण्यप्रदायक जन्मोत्सव

श्रीकृष्ण के जन्म के समय के छह तत्वों का समावेश इस बार जन्माष्टमी पर्व को अतिविशेष बनाएगा। ये तत्व हैं भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष, अर्द्धरात्रि काल, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि का चंद्रमा और चंद्र प्रधान सोमवार का दिन। ये सभी मुहूर्त की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं। इन सभी छह तत्वों का समावेश बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। गौतमी तंत्र ग्रंथ के संदर्भ अनुसार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र और सोमवार से संयुक्त हो जाए तो वह जयंती नाम से विख्यात होती है। जन्म-जन्मांतरों के पुण्य संचय से कृष्ण पूजन का ऐसा दुर्लभ योग मिलता है। जिस मनुष्य को जयंती योग में उपवास का सौभाग्य मिल जाता है, उसके कोटि जन्मकृत पाप नष्ट हो जाते हैं आैर वह जन्म बंधन से मुक्त होकर परम दिव्य बैकुंठ भगवत धाम में निवास करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस योग में जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्त के पितृ अगर प्रेत योनि में हैं तो व्रत-पूजन के प्रभाव से वे भी प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीकृष्ण का पूजार्चन करने से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दुर्लभ योग की विशेष महिमा बताई गई है।

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Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

पूजन विधि-विधान

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रती को भगवान के आगे संकल्प लेना चाहिए कि व्रतकर्ता श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्ति के लिए, समस्त रोग-शोक निवारण के लिए, संतान आदि कोई भी कामना, जो शेष हो, उसकी पूर्ति के लिए विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर मनोकामना पूर्ति एवं स्वास्थ्य सुख के लिए संकल्प लेकर व्रत धारण करना लाभदायक माना गया है। संध्या के समय अपनी-अपनी परंपरा अनुसार भगवान के लिए झूला बनाकर बालकृष्ण को उसमें झुलाया जाता है। आरती के बाद दही, माखन, पंजीरी और उसमें मिले सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाकर उनका प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान एवं पंचामृत का पान करने से प्रमुख पांच ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर द्वारा निर्मित पंचामृत पूजन के पश्चात अमृततुल्य हो जाता है, जिसके सेवन से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक विषाणुओं का नाश होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। अष्टमी की अर्द्धरात्रि में पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान, लौकिक एवं पारलौकिक प्रभावों में वृद्धि करता है। रात्रि 12 बजे, खीरे में भगवान का जन्म कराकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए। जहां तक संभव हो, संयम और नियमपूर्वक ही व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को व्रत धारण कर गोदान करने से करोड़ों एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

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Janmashtami 2024 - फोटो : instagram

मुरली की माया

योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण को मुरलीवाला कहा जाता है। वास्तव में मुरली यानी बांसुरी पूर्वकाल में ब्रह्मा जी की मानस पुत्री सरस्वती जी थीं। एक श्राप के कारण सरस्वती जी को बांस के रूप में जन्म मिला, लेकिन बांस बनने से पूर्व मां सरस्वती ने प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया, जिसके फलस्वरूप कृष्ण अवतार में बांसुरी भगवान कृष्ण की सहचरी बनीं। भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी सभी जड़ और चेतन का मन मोह लेती है। मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी को श्रीकृष्ण मंदिर में जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बांसुरी अवश्य चढ़ाएं। अगर ग्रह दशा से पीड़ित हों तो एक बांसुरी में चीनी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। इससे शीघ्र ही मनोकामना पूरी होगी।

टूटती है विकारों की जंजीर

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत, उपवास, पूजन, भक्ति द्वारा ईश्वरीय चेतना हमारे अंदर विकसित होती है। मन से नकारात्मकता का अंधेरा दूर होने लगता है। जिस प्रकार श्रीकृष्ण जन्म के समय उनके माता-पिता की जंजीरे अपने आप टूट गईं और कारावास के सारे द्वार खुल गए, उसी प्रकार कृष्ण के सच्चे भक्त के भीतर अहम और विकारों की जंजीरें टूटने लगती हैं और मोक्ष अथवा आध्यात्मिक प्रगति के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं।

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Krishna Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार

पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीकृष्ण के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।

मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीकृष्ण को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।

सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।

कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीकृष्ण को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीकृष्ण को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।

मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीकृष्ण को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें।
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