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Janmashtami 2020: कैसे और किसने किया कृष्ण और बलराम का नामकरण

Sun, 09 Aug 2020 07:15 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sun, 09 Aug 2020 07:15 AM IST
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krishna Janmashtami 2020 in hindi Gargacharya kept the names of Krishna and Balarama
कृष्ण जन्माष्टमी 2020
भगवान श्री कृष्ण का जन्म भादो मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ये तो सभी को पता है कि कृष्ण जी ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया जिसके बाद उनके पिता वासुदेव उन्हें नंदबाबा के यहां छोड़ गए थे। जिसके बाद उनका लालन-पालन यशोदा मां ने किया लेकिन क्या आपको पता है कि कृष्ण जी का नामकरण कैसे और किसने किया था। जानते हैं..

 
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कृष्ण जन्माष्टमी 2020

ऋषि गर्ग यदुवंश के कुलगुरु थे, एक दिन वे गोकुल में पधारे। नंदबाबा और यशोदा जी ने पूरे भाव से उनका आदर सत्कार किया और वासुदेव देवकी का हाल चाल पूछा। उसके बाद जब उन्होंने गर्गाचार्य से गोकुल में पधारने का कारण पूछा तब उन्होंने बताया कि वे पास ही के गांव में एक बालक का नामकरण करने आएं हैं। रास्ते में तुम्हारा घर पड़ा तो विचार किया कि तुमसे भी मिलता चलूं। जब नंदबाबा और यशोदा जी ने सुना तो उन्होंने गर्ग ऋषि से कहा कि बाबा हमारे यहां भी दो बालकों ने जन्म लिया है, कृपा करके उनका भी नामकरण कर दीजिए।


लेकिन गर्गाचार्य ने मना कर दिया उन्होंने कहा कि अगर इस बात का पता कंस को चल गया तो वह मुझे जीवित नहीं रहने देगा। इसपर नंदबाबा ने कहा कि आप चुपचाप गौशाला में नामकरण कर दीजिए हम इस बात का जिक्र किसी से नहीं करेंगे
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krishna janmashtami 2020 - फोटो : PTI

जब माताओं मे ली ऋषिगर्ग की परीक्षा
 
जब रोहिणी जी को अवगत हुआ कि यदुवंश के कुल पुरोहित आए हैं, तो वे भावविभोर होकर उनके गुणों का बखान करने लगी। तभी यशोदा ने कहा कि अगर गर्गाचार्य इतने बड़े पुरोहित हैं तो हम अपने पुत्रों को बदल लेते हैं, तुम मेरे लल्ला को लेकर जाओ और मैं तुम्हारे पुत्र को लेकर आती हूं। देखते हैं कि कुलपुरोहित यह जान पाते हैं या नहीं.. इस तरह माताएं गर्ग ऋषि की परीक्षा लेने लगीं।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2020 - फोटो : Social media

जब गर्गाचार्य ने दोनों बालको को पहचान कर किया उनका नामकरण

दोनों माताएं बालकों को लेकर गर्गाचार्य के समक्ष गई। लेकिन गर्गचार्य ने जैसे ही यशोदा के हाथ में बालक को देखा तो वे पहचान गए और कहने लगे कि यह रोहिणी पुत्र है। इस कारण बालक का नाम रौहणेय होगा, यह बालक अपने गुणों से सबको आनंदित करेगा तो एक नाम राम होगा और यह बहुत बलशाली होगा इसके बल समान कोई दूसरा न होगा, जिसके कारण इसका एक नाम बल भी होगा, इस तरह से इसका सबसे ज्यादा लिया जाने वाला नाम बलराम रहेगा। किसी में कोई भेद न करने के कारण यह सभी को अपनी ओर आकर्षित करेगा इसलिए इसका एक नाम संकर्षण होगा।
 

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जब कृष्ण जी को देखकर ऋषिगर्ग ने खो दी अपनी सुध
 
जब ऋषि गर्ग मे रोहिणी की गोद के बालक को देखा तो वे बालक कि मनमोहक छवि को देखकर उसमें ही खो गए और अपमी सुध-वुध भूलगए। गर्ग ऋषि जैसे मानो एक जगह जड़ हो गए वे न कुछ कहते ने उनके शरीर में कोई हलचल होती वे तो बस एकटक लगाएं बालक को निहारने लगे। तब घबराकर यशोदा और नंदबाबा ने पूछा कि कि आचार्य क्या हुआ। तब कही जाकर गर्गाचार्य को अपनी सुधी हुई।
 

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