Karwa Chauth 2024: कब है करवा चौथ? जानें शुभ मूहुर्त, और व्रत का नियम
करवा चौथ भारतीय उपमहाद्वीप में विशेषकर हिंदू महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इस साल करवा चौथ कब है, और करवा चौथ व्रत रखने का क्या नियम है?
विस्तार
Karwa Chauth 2024 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। यह त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। दरअसल, इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खाती हैं और इसके बाद पूरे दिन निर्जला उपवास का संकल्प लेती हैं। इस दिन शाम के समय महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं, और चांद दिखने के बाद अपने जीवनसाथी को छलनी की मदद से चांद के साथ देखती हैं। चंद्रमा निकलने के बाद दर्शन करके अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद करवा चौथ के व्रत का पारण किया जाता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इस साल करवा चौथ कब है, और करवा चौथ व्रत रखने का क्या नियम है?
करवा चौथ का महत्व-
करवा चौथ भारतीय उपमहाद्वीप में विशेषकर हिंदू महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं निराहार रहकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत पारण करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता ये भी हैं कि इस व्रत के जैसा सौभाग्यदायक अन्य कोई व्रत नहीं है।
करवा चौथ 2024 तिथि
उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को रखा जाएगा।
चतुर्थी तिथि आरंभ- 20 अक्टूबर 2024 रविवार को सुबह 06 बजकर 46 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त- 21 अक्टूबर 2024 सोमवार को सुबह 04 बजकर 16 मिनट पर
करवा चौथ 2024 पूजा मुहूर्त और उपवास का समय
पूजा का मुहूर्त 20 अक्टूबर शाम 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होगा और शाम 7 बजकर 02 मिनट पर समाप्त होगा। यानी कुल 1 घंटे 16 मिनट का मुहूर्त होगा। द्रिक पंचांग के मुताबिक, उपवास का समय सुबह 06 बजकर 25 मिनट से शुरू होगा और शाम 07 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा।
करवा चौथ व्रत की विधि या पूजा विधि
इस दिन प्रातः उठकर अपने घर की परंपरा के अनुसार सरगी आदि ग्रहण करें। स्नान करने के पश्चात व्रत का संकल्प करें। शाम के समय तुलसी के पास बैठकर दीपक प्रज्वलित करके करवाचौथ की कथा पढ़े। ध्यान रखें यह व्रत पूरे दिन निर्जला यानी बिना जल के किया जाता है। चंद्रमा निकलने से पहले ही एक थाली में धूप-दीप, रोली, पुष्प, फल, मिष्ठान आदि रख लें। मिट्टी के बने करवा में चावल या फिर चिउड़ा आदि भरकर उसमें दक्षिणा के रूप में कुछ धन रख दें, साथ ही एक थाली में शृंगार का सामान भी रख लें। चंद्रमा निकलने के बाद चंद्र दर्शन और पूजन आरंभ करें। सभी देवी-देवताओं का तिलक करके फल-फूल मिष्ठान आदि अर्पित करें। शृंगार के सभी सामान को भी पूजा में रखें और टीका करें। अब चंद्रमा को अर्घ्य दें और छलनी में दीप जलाकर चंद्र दर्शन करें, अब छलनी में अपने पति का मुख देखें। इसके बाद पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करें। अपने घर के सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। पूजन की प्रयोग की गई शृंगार की सामग्री और करवा को अपनी सास या फिर किसी सुहागिन स्त्री को दे दें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।