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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Kartik Purnima 2020 Date muhurat timing and religious significance

Kartik Purnima 2020 Date: कब है कार्तिक पूर्णिमा, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Tue, 17 Nov 2020 08:23 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 17 Nov 2020 08:23 PM IST
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Kartik Purnima 2020 Date muhurat timing and religious significance
कार्तिक पूर्णिमा 2020: शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्व बताया गया है। - फोटो : अमर उजाला

Kartik Purnima 2020: कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता हैं। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा की तारीख, मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

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Kartik Purnima 2020 Date muhurat timing and religious significance
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
कब है कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima 2020 Date)
कार्तिक पूर्णिमा इस साल 30 नवंबर को है। हालांकि पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर से ही लग जाएगी जो 30 नवंबर को समाप्त होगी।  

कार्तिक पूर्णिमा का मुहूर्त 2020
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 29 नवंबर रात 12 बजकर 47 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 30 नवंबर रात 02 बजकर 59 मिनट तक 
गंगा स्नान - 30 नवंबर 
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Kartik Purnima 2020 Date muhurat timing and religious significance
कार्तिक पूर्णिमा 2020: इसी दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्म सरोवर पुष्कर में अवतरण हुआ था। - फोटो : सोशल मीडिया
ब्रह्मा जी का हुआ था अवतरण

इसी दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्म सरोवर पुष्कर में अवतरण हुआ था। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री ब्रह्मा की नगरी पुष्कर आते हैं, पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान करने के पश्चात ब्रह्मा जी के मंदिर में पूजा-अर्चना कर दीपदान करते हैं और देवों की कृपा पाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है।

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Kartik Purnima 2020 Date muhurat timing and religious significance
कार्तिक पूर्णिमा 2020: त्रिपुरासुर का हुआ था वध - फोटो : अमर उजाला
त्रिपुरासुर का हुआ था वध

इस संदर्भ में एक कथा है कि त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक भयभीत थे। त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया था। त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था। उसके तप से तीनों लोक जलने लगे, तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिए। त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव ,जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं। इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा। सभी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से इस दैत्य के अंत का उपाय पूछा। ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया। देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की। तब महादेव ने त्रिपुरासुर के वध का फैसला किया।

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