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Kalashtami 2021: कालाष्टमी पर ऐसे करें भगवान काल भैरव की पूजा और पढ़ें काल भैरव चालीसा का पाठ

Thu, 01 Jul 2021 07:07 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 01 Jul 2021 07:07 AM IST
सार

  • वाद विवाद, कोर्ट कचहरी के मामलों से छुटकारा पाने में भी भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है। इनकी पूजा-अर्चना करने से राहु केतु के बुरे दोष से भी मुक्ति मिलती है। नंदीश्वर भी कहते हैं कि जो शिव भक्त शंकर के भैरव रूप की आराधना नित्य प्रति करता है उसके लाखों जन्मों में किए हुए पाप नष्ट हो जाते हैं।

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Kalashtami 2021 Shri Kaal Bhairav Chalisa And Kalashtami Vrat Puja Importance
कालाष्टमी भैरव चालीसा : मान्यता है कि कालाष्टमी तिथि पर जो भी काल भैरव की पूजा करते समय श्री भैरव चालीसा का पाठ करता है उसकी सभी तरह की समस्याओं का अंत हो जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Kalashtami 2021: कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा आराधना की जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस बार आषाढ़ महीने की कृष्ण पक्ष की कालाष्टमी 01 जुलाई, गुरुवार के दिन मनाई जा रही है। हिंदू देवताओं में भैरव का बहुत ही महत्व है। भैरव का अर्थ होता है भय को हर के जगत की रक्षा करने वाला। ऐसा भी मान्यता  है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित है। इन्हें काशी के कोतवाल भी कहा जाता है। इनकी शक्ति का नाम है 'भैरवी गिरिजा ',जो अपने उपासकों की अभीष्ट दायिनी हैं। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है। मान्यता है कि कालाष्टमी तिथि पर जो भी काल भैरव की पूजा करते समय श्री भैरव चालीसा का पाठ करता है उसकी सभी तरह की समस्याओं का अंत हो जाता है।

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Kalashtami 2021 Shri Kaal Bhairav Chalisa And Kalashtami Vrat Puja Importance
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श्री भैरव चालीसा

दोहा
श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ।
चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ॥

श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल।
श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल॥

जय जय श्री काली के लाला। जयति जयति काशी- कुतवाला॥जयति बटुक- भैरव भय हारी। जयति काल- भैरव बलकारी॥
जयति नाथ- भैरव विख्याता। जयति सर्व- भैरव सुखदाता॥
भैरव रूप कियो शिव धारण। भव के भार उतारण कारण॥
भैरव रव सुनि हवै भय दूरी। सब विधि होय कामना पूरी॥
शेष महेश आदि गुण गायो। काशी- कोतवाल कहलायो॥
जटा जूट शिर चंद्र विराजत। बाला मुकुट बिजायठ साजत॥कटि करधनी घुंघरू बाजत। दर्शन करत सकल भय भाजत॥
जीवन दान दास को दीन्ह्यो। कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो॥
वसि रसना बनि सारद- काली। दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली॥
धन्य धन्य भैरव भय भंजन। जय मनरंजन खल दल भंजन॥
कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा। कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा॥
जो भैरव निर्भय गुण गावत। अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत॥रूप विशाल कठिन दुख मोचन। क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन॥
अगणित भूत प्रेत संग डोलत। बम बम बम शिव बम बम बोलत॥
रुद्रकाय काली के लाला। महा कालहू के हो काला॥
बटुक नाथ हो काल गंभीरा। श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा॥
करत नीनहूं रूप प्रकाशा। भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा॥
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन। व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन॥तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं। विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं॥
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय। जय उन्नत हर उमा नन्द जय॥
भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय। वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥
महा भीम भीषण शरीर जय। रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय॥
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय। स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय॥
निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय। गहत अनाथन नाथ हाथ जय॥त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय। क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय॥
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय। कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय॥
रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर। चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर॥
करि मद पान शम्भु गुणगावत। चौंसठ योगिन संग नचावत॥
करत कृपा जन पर बहु ढंगा। काशी कोतवाल अड़बंगा॥
देयं काल भैरव जब सोटा। नसै पाप मोटा से मोटा॥जनकर निर्मल होय शरीरा। मिटै सकल संकट भव पीरा॥
श्री भैरव भूतों के राजा। बाधा हरत करत शुभ काजा॥
ऐलादी के दुख निवारयो। सदा कृपाकरि काज सम्हारयो॥
सुन्दर दास सहित अनुरागा। श्री दुर्वासा निकट प्रयागा॥
श्री भैरव जी की जय लेख्यो। सकल कामना पूरण देख्यो॥

दोहा
जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार।
कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार॥
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Kalashtami 2021 Shri Kaal Bhairav Chalisa And Kalashtami Vrat Puja Importance
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कालाष्टमी का महत्व
पुराणों के अनुसार भगवान काल भैरव सभी प्रकार के कष्टों को दूर करते हैं। कालाष्टमी के दिन व्रत रखने और काल भैरव की पूजा करने से भक्तों को किसी भी तरह के भय,रोग, शत्रु और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही किसी भी तरह का वाद विवाद, कोर्ट कचहरी के मामलों से छुटकारा पाने में भी भगवान काल भैरव आपकी मदद करते हैं। इनकी पूजा-अर्चना करने से राहु केतु के बुरे दोष से भी मुक्ति मिलती है। नंदीश्वर भी कहते हैं कि जो शिव भक्त शंकर के भैरव रूप की आराधना नित्य प्रति करता है उसके लाखों जन्मों में किए हुए पाप नष्ट हो जाते हैं। इनके स्मरण और दर्शन मात्र से ही प्राणी के सब दुःख दूर होकर वह निर्मल हो जाता है। मान्यता है कि इनके भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता। काल भी इनसे भयभीत रहता है इसलिए इन्हें काल भैरव एवं हाथ में त्रिशूल,तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है। इनकी पूजा-आराधना से घर में नकारात्मक शक्तियां,जादू-टोने तथा भूत-प्रेत आदि से किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता बल्कि इनकी उपासना से मनुष्य का आत्मविश्वास बढ़ता है।

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कालाष्टमी पर कैसे करें भगवान काल भैरव की पूजा

  • इस दिन भगवान शिव के अंश काल भैरव की पूजा करना विशेष फलदाई है। कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो गंगा जल नहाने के जल में डालें।
  • भैरव को प्रसन्न करने के लिए उड़द की दाल या इससे निर्मित मिष्ठान जैसे इमरती,मीठे पुए या दूध-मेवा का भोग लगाया जाता है, चमेली का पुष्प इनको अतिप्रिय है ।
  • कालिका पुराण के अनुसार भैरव जी का वाहन श्वान है इसलिए विशेष रूप से इस दिन काले कुत्ते को मीठी चीजें खिलाने से भैरव की कृपा मिलती है।ऐसा करने से आपके आस-पास मौजूद नकारात्मक शक्तियों के साथ आर्थिक तंगी की समस्या से भी राहत मिलती है।   
  • कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा के साथ भगवान शिव, माता पार्वती और शिव परिवार की पूजा भी करनी चाहिए।
  • भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन कालभैवाष्टक का पाठ करना चाहिए,ऐसा करने से आदि-व्याधि दूर होती है।
  • कालभैरव के समक्ष चौमुखी दीपक जलाएं और धूप-दीप से आरती करें।
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