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Kalashtami 2018: 29 नवंबर को मनाई जाएगी काल भैरव अष्टमी, जानिए इसका महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 26 Nov 2018 11:19 AM IST
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कालभैरव अष्टमी 2018
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कालभैरव अष्टमी 29 नवंबर 2018 को मनाई जाएगी। शिव पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष जिसे अगहन का महीना भी कहते हैं कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की जयंती मनाई जाती है। कालभैरव भगवान शिव के दूसरे रूप हैं। अहगन माह की कृष्णाष्टमी को दोपहर के समय भगवान शंकर के अंश काल भैरव का जन्म हुआ था। काल भैरव अष्टमी तंत्र साधना के लिए अति उत्तम मानी जाती है। इस पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।
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भैरव साधना का महत्व
- शिव पुराण में कहा है कि काल भैरव शंकर के ही रूप हैं और कालाष्टमी के दिन पूजा से घर में नकारत्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता।
- कालभैरव भगवान शिव के अंश होने के कारण भैरव अष्टमी पर बाबा भैरव की पूजा करने से सारे कष्ट मिट जाते है और जाने -अनजाने में हुए सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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- ऐसी मान्यता है काल भैरव की पूजा करने और व्रत रखने से सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है साथ ही भूत पिशाच का कभी डर नहीं रहता है। इस दिन काल भैरव को खुश करने के लिए काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलानी चाहिए।
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- यदि आप बाबा काल भैरव की कृपा चाहते है तो अष्टमी के दिन बाबा कालभैरव के मंदिर में जाकर उनकी प्रतिमा पर सिंदूर और तेल चढ़ाए और मूर्ति के सामने बैठकर काल भैरव मंत्र का जाप करें।
- बाबा कालभैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के अंश के रूप में हुई थी इसलिए इस दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। ऐसा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
- भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है। व्यक्ति में साहस का संचार होता है. इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है, रविवार और मंगलवार के दिन इनकी पूजा बहुत फलदायी है
- भैरव जी का बहुत महत्व है यह दिशाओं के रक्षक और काशी के संरक्षक कहे जाते हैं। काल भैरव की शरण में जाने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
- ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति काशी में मृत्यु को प्राप्त करता है उसके पापो का भोग कालभैरव सोटे से पीटकर पूरा करते हैं। इस क्रिया को भैरव यातना कहा जाता है।