फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Jivitputrika Vrat Katha 2020 in Hindi: Jivitputrika Vrat 2020 Date Importance Puja Vidhi Timing And Vrat Story

Jivitputrika Vrat 2020: जानिए जितिया व्रत का महत्व, कैसे और क्यों रखते हैं यह व्रत

Thu, 10 Sep 2020 03:54 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 10 Sep 2020 03:54 PM IST
विज्ञापन
Jivitputrika Vrat Katha 2020 in Hindi: Jivitputrika Vrat 2020 Date Importance Puja Vidhi Timing And Vrat Story
जितिया व्रत 2020 - फोटो : social media

Jivitputrika Vrat 2020: 10 सितंबर को सुहागिन महिलाएं हर साल की तरह इस बार भी जितिया व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। जिउतिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जिउतिया व्रत मुख्यरूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। जिउतिया व्रत को मुख्य रूप से संतान की सुख और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। 

विज्ञापन


जितिया व्रत तीन दिनों तक चलता है। व्रत के पहले दिन नहाए खाए, दूसरे दिन पर निर्जला व्रत रखा जाता है और तीसरे दिन पारण किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर नवमी तिथि तक रखा जाता है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 09 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से होगा। यह तिथि 10 सितंबर, गुरुवार को दोपहर तीन बजकर 4 मिनट पर रहेगी।
विज्ञापन


जितिया व्रत के एक दिन पहले महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा करती है फिर इसके बाद भोजन करती हैं। इसके बाद जितिया व्रत के पारण करने के बाद ही अन्न को ग्रहण करेंगी। जितिया व्रत में व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। पारण वाले दिन पर सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही कुछ खाती हैं। जितिया व्रत वाले दिन पर झोर भात, भरुवा की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भूलकर भी न करें दिशाओं की अनदेखी, घर में खुशहाली लाएंगी वास्तु की यह बातें


व्रत-कथा 
इस व्रत की कथा महाभारत काल से संबंधित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार महाभारत के युद्ध में अपने पिता की मौत का बदला लेने की भावना से अश्वत्थामा पांडवों के शिविर में घुस गया। शिविर के अंदर पांच लोग सो रहे थे। अश्वत्थामा ने उन्हें पांडव समझकर मार दिया, परंतु वे द्रोपदी की पांच संतानें थीं। फिर अुर्जन ने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उसकी दिव्य मणि ले ली।

अश्वत्थामा ने फिर से बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चें को मारने का प्रयास किया और उसने ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ को नष्ट कर दिया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा की अजन्मी संतान को फिर से जीवित कर दिया। गर्भ में मरने के बाद जीवित होने के कारण उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। तब उस समय से ही संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया का व्रत रखा जाने लगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed