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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Indira Ekadashi on 17th September 2025 Significance Rituals Puja vidhi and Katha in Hindi

Indira Ekadashi 2025: 17 सितंबर को इंदिरा एकादशी, जानिए इसका महत्व, पूजाविधि और कथा

Mon, 15 Sep 2025 06:49 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 15 Sep 2025 06:49 AM IST
सार

Indira Ekadashi 2025: अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पितरों की मुक्ति और उनके उद्धार के लिए विशेष मानी गई है।

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Indira Ekadashi on 17th September 2025 Significance Rituals Puja vidhi and Katha in Hindi
Indira Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Indira Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में हर एकादशी का अपना विशेष महत्व है। इनमें से अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पितरों की मुक्ति और उनके उद्धार के लिए विशेष मानी गई है। पंचांग के अनुसार,इस बार एकादशी तिथि 17 सितंबर को मनाई जाएगी, ऐसे में 17 तारीख को ही एकादशी का व्रत और श्राद्ध किया जाएगा।  शास्त्रों के अनुसार यह व्रत करने से पितृदोष समाप्त होता है, पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और व्रती को भी विष्णुधाम की प्राप्ति होती है।

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इंदिरा एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि यदि कोई पूर्वज पाप कर्मों के कारण नरक में या नीच योनि में पड़ा हो, तो इस व्रत से उसे सद्गति मिलती है। पद्म पुराण के अनुसार, इस एकादशी पर किए गए व्रत और दान का फल पितरों को समर्पित करने से वे मोक्ष प्राप्त कर वैकुण्ठ लोक में चले जाते हैं। इस व्रत का पालन करने वाले के सात पीढ़ियों तक के पितरों को तृप्ति मिलती है।

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व्रत की विधि और नियम
इस दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु के स्वरूप शालग्राम की पूजा करें। उन्हें पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं और चंदन, फूल, तुलसी पत्र, भोग अर्पित करें। दिनभर हरि नाम का जप करें, आलस्य त्यागें और पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध करें। द्वादशी को भगवान पद्मनाभ की पूजा कर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें, तत्पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करें।

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पितरों के उद्धार में विशेष प्रभाव
इंदिरा एकादशी के दिन किया गया व्रत केवल जीवित व्यक्ति को ही लाभ नहीं देता, बल्कि मृत पूर्वजों की आत्मा को भी कष्टों से मुक्त कर उन्हें वैकुण्ठ पहुंचा देता है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से यमलोक की यातनाएं भी नहीं भोगनी पड़तीं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि यह एकादशी श्राद्ध पक्ष की सर्वश्रेष्ठ तिथि मानी गई है।

 

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इंदिरा एकादशी की कथा
सतयुग में महिष्मतीपुरी के राजा इन्द्रसेन धर्मपरायण और भगवान विष्णु के भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद ने उन्हें बताया कि उनके पिता व्रतभंग के कारण यमलोक में पीड़ा भोग रहे हैं। पितृ उद्धार के लिए उन्हें इंदिरा एकादशी का व्रत करने का संदेश मिला। राजा ने विधि-विधान से व्रत कर पितरों को तृप्त किया, जिससे उनके पिता विष्णुधाम को प्राप्त हुए। अंततः राजा इन्द्रसेन भी अपने जीवन के बाद स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। 

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