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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Indira Ekadashi 2024 puja vihdi and Shraddh Puja niyam

Indira Ekadashi 2024: श्राद्ध पक्ष की इंदिरा एकादशी पर इस विधि से करें पूजा, मिलेगा पूर्वजों का आशीर्वाद

Tue, 24 Sep 2024 06:38 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 24 Sep 2024 06:38 PM IST
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Indira Ekadashi 2024 puja vihdi and Shraddh Puja niyam
Indira Ekadashi 2024 puja vihdi - फोटो : अमर उजाला

Indira Ekadashi 2024: 18 सितंबर 2024 से अश्विन माह की शुरुआत हो चुकी है, जो 17 अक्टूबर 2024 को समाप्त होगा। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष के 16 दिन पूर्वजों के मान-सम्मान को समर्पित है। इस दौरान पितरों की आत्म शांति के लिए पिंड़दान, तर्पण व श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इससे पूर्वजों का आशीर्वाद वंशों पर बना रहता है। इस अवधि में एकादशी व्रत भी रखा जाता है, जो पितृ की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

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पंचांग के अनुसार अश्विन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल 28 सितंबर को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस दिन सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है, जो रात 11 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दिन उपवास रखने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। साथ ही समस्त समस्याओं का निवारण होता है। ये एकादशी पितृपक्ष के बीच में पड़ती है, इसलिए इस दिन श्राद्ध के नियमों का पालन भी किया जाएगा। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं। 

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इंदिरा एकादशी पूजा विधि 
  • इंदिरा एकादशी पर सुबह ही स्नान कर लें, और साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • फिर मन में व्रत का संकल्प लें और अपने पितरों को भी याद करें।
  • इस दौरान पूजा करने के लिए सबसे पहले एक चौकी लगाएं। 
  • चौकी पर विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें, और घी का दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है, इसलिए उन्हें इस रंग के फूल और मिठाई अर्पित करें। 
  • इसके बाद सभी अर्पित करने वाली साम्रगियों को भी चढ़ा दें।
  • फिर इंदिरा एकादशी व्रत की कथा सुनें और विष्णु जी की आरती करें।
  • इसके बाद एक दीपक अपने पितरों के समक्ष भी जलाएं और अपनी गलतियों की क्षमा मांगे। 
  • अब आप जरूरतमंदों को दान करें। मान्यता है कि दान से पूर्वजों की आत्मा को शांति और व्रत का संपूर्ण फल मिलता है। 


इंदिरा एकादशी मंत्र जाप
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे॥
ॐ श्री विष्णवे नमः। क्षमा याचनाम् समर्पयामि॥

भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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