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Indira Ekadashi 2023: 10 अक्तूबर को इंदिरा एकादशी, जानिए महत्व, पूजाविधि और कथा

Sun, 08 Oct 2023 11:37 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 08 Oct 2023 11:37 AM IST
सार

हिंदू पंचांग के मुताबिक, इंदिरा एकादशी की शुरुआत 9 अक्तूबर, सोमवार को दोपहर 12.36 मिनट से होगी और इस तिथि का समापन 10 अक्तूबर, मंगलवार को दोपहर 3.08 बजे होगा। लेकिन उदया तिथि के कारण इंदिरा एकादशी का व्रत 10 अक्तूबर को ही रखा जाएगा।

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Indira Ekadashi 2023 Date Pujan Vidhi Shubh Muhurat Mantra and Importance
Indira Ekadashi 2023: इस एकादशी के व्रत से मनुष्य को यमलोक की यातना का सामना नहीं करना पड़ता एवं इस एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के सात पीढ़ियों तक के पितृ तर जाते हैं एवं व्रत करने वाला भी स्वयं स्वर्ग में स्थान पाता है। - फोटो : iStock

विस्तार

Indira Ekadashi 2023: हर वर्ष आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष 10 अक्तूबर को इंदिरा एकादशी है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है।

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इंदिरा एकादशी की कथा का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने से जन्म जन्मांतर में किए गए पाप कट जाते हैं। साथ ही पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि यदि कोई पूर्वज जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों के कारण दंड भोग रहा होता है तो इस दिन विधि-विधान से व्रत कर उनके नाम से दान-दक्षिणा देने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। पद्म पुराण में तो यह भी कहा गया है कि श्राद्ध पक्ष में आने वाली इस एकादशी का पुण्य अगर पितृगणों को दिया जाए तो नरक में गए पितृगण भी नरक से मुक्त होकर स्वर्ग चले जाते है। इस व्रत को करने से सभी जीवत्माओं को उनके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।इस एकादशी के व्रत से मनुष्य को यमलोक की यातना का सामना नहीं करना पड़ता एवं इस एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के सात पीढ़ियों तक के पितृ तर जाते हैं एवं व्रत करने वाला भी स्वयं मोक्ष प्राप्त करता है।
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पूजाविधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर  गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। अब पीले रंग का वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को सर्वप्रथम जल का अर्घ्य दें। इसके पश्चात षोडशोपचार विधि से   भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है। अतः उन्हें पूजा में पीले रंग का फल और फूल अवश्य अर्पित करें। पूजा के समय विष्णु चालीसा का पाठ और मंत्र जाप करें। अंत में आरती कर सुख, समृद्धि और धन वृद्धि की कामना करें। दिनभर उपवास रखें। संध्याकाल में आरती-अर्चना कर फलाहार करें। अगले दिन पूजा पाठ के पश्चात व्रत खोलें।  उपनिषदों में भी कहा गया है कि भगवान विष्णु की पूजा से पितृ संतुष्ट होते हैं। इस एकादशी के व्रत और पूजा की विधि अन्य एकादशियों की तरह ही है, लेकिन सिर्फ अंतर ये है कि इस एकादशी पर शालिग्राम की पूजा की जाती है।
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पौराणिक कथा
पदमपुराण के अनुसार कथा है कि सतयुग में महिष्मती नगर में इंद्रसेन नाम के राजा थे। एक बार उन्हें सपना आया कि उनके माता-पिता मृत्यु के बाद कष्ट भोग रहे हैं। राजा की जब नींद खुली तो पितरों की दुर्दशा को लेकर वे काफी चिंतित हुए। इस बात लेकर उन्होंने विद्वानों, ब्राह्मणों और मंत्रियों को बुलाकर विचार किया। तब विद्वानों ने सलाह दी कि आपको सपत्नीक इंदिरा एकादशी का व्रत करना चाहिए, जिसके पुण्य से पितरों की मुक्ति हो सकती है। तब राजा ने भगवान शालिग्राम की पूजा कर पितरों की आराधना की और गरीबों और जरूरतमंदों को दान दिया। इसके बाद भगवान ने उन्हें दर्शन देकर कहा- "राजन तुम्हारे व्रत के प्रभाव से तुम्हारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई है।


कब है इंदिरा एकादशी
हिंदू पंचांग के मुताबिक, इंदिरा एकादशी की शुरुआत 9 अक्तूबर, सोमवार को दोपहर 12.36 मिनट से होगी और इस तिथि का समापन 10 अक्तूबर, मंगलवार को दोपहर 3.08 बजे होगा। लेकिन उदया तिथि के कारण इंदिरा एकादशी का व्रत 10 अक्तूबर को ही रखा जाएगा।

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