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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Hartalika Teej 2023 Important Rules To Follow On Teej Vrat Ke Niyam And Vrat Katha in Hindi

Hartalika Teej Rules: हरतालिका तीज आज, जानिए पूजाविधि, कथा और व्रत के नियम

Mon, 18 Sep 2023 06:42 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 18 Sep 2023 06:42 AM IST
सार

हरतालिका दो शब्दों से मिलकर बना है।'हर' का अर्थ है हरण करना और 'तालिका' का अर्थ है सखी। पार्वतीजी की सखी उन्हें पिता के घर से हरण करके जंगल में  ले गई थी।

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Hartalika Teej 2023 Important Rules To Follow On Teej Vrat Ke Niyam And Vrat Katha in Hindi
HartalikaTeej 2023: - फोटो : iStock

विस्तार

Hartalika Teej 2023 Vrat Ke Niyam in Hindi: हरतालिका तीज हर साल भाद्रमास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है और इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं। हरतालिका तीज का आरंभ 17 सितंबर को सुबह 11 बजकर 8  मिनट पर होगा और इसका समापन अगले दिन दोपहर में करीब 12 बजकर 39 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार यह व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा। हरतालिका दो शब्दों से मिलकर बना है।'हर' का अर्थ है हरण करना और 'तालिका' का अर्थ है सखी। पार्वतीजी की सखी उन्हें पिता के घर से हरण करके जंगल में  ले गई थी।

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सुहागिन महिलाएं क्यों रखती हैं हरतालिका तीज व्रत
हरतालिका तीज पर स्त्रियां व्रत रखकर भगवान गणेश एवं शिव-पार्वती का पूजन-अर्चन कर अपने सुखद दाम्पत्य जीवन एवं परिवार की खुशियों के लिए मंगल कामना करती हैं। इस व्रत को निर्जल रहकर किया जाता है और रात में भगवान शिव और माता पार्वती के गीतों पर नृत्य किया जाता है। हरतालिका तीज का उपवास अविवाहित कन्याएं अच्छा जीवनसाथी पाने के लिए और वहीं सुहागिन महिलाऐं अपने पति की दीर्घ आयु के लिए करती हैं। इस अवसर पर महिलाऐं पूरा शृंगार करके सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनकर सब मिलकर लोकगीत गीत जाती हैं,झूला झूलती हैं।रिश्तों के लगाव का यह पारंपरिक पर्व जीवन को नए उमंग-उल्लास और प्रेम के रंग में रंग देता है।
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हरतालिका तीज पूजा विधि
महिलाएं सुबह संकल्प लेकर हरतालिका तीज का व्रत आरंभ करें। इस दिन महिलाओं को स्नान के बाद नए शुभ रंगों के परिधान पहनने चाहिए। उसके बाद महिलाओं को अपने हाथ पर मेंहदी रचानी चाहिए और संपूर्ण श्रृंगार करें। प्रकृति और प्रेम के भाव से जुड़े इस पर्व पर महिलाऐं शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती और श्री गणेश की प्रतीकात्मक प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में रोली, चावल, पुष्प, बेलपत्र, नारियल ,दूर्वा, मिठाई आदि से भगवान् का भक्ति भाव से पूजन किया जाता है, साथ ही कामना करें कि हमारा जीवन भी शिव-गौरी की तरह आपसी प्रेम से सदैव बंधा रहे। माना जाता हैं कि माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा सौभाग्यदायिनी होती है।

हरतालिका तीज कथा
शिवमहापुराण के अनुसार माता पार्वती अपने कई जन्मों से भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर्वत के गंगा तट पर बाल अवस्था में अधोमुखी होकर तपस्या की थी। माता पार्वती ने इस तप में अन्न और जल का भी सेवन नही किया था। वह सिर्फ सूखे पत्ते चबाकर ही तप किया करती थी।माता पार्वती को इस अवस्था में देखकर उनके माता पिता बहुत दुखी रहते थे। एक दिन देवऋषि नारद भगवान विष्णु की तरफ से पार्वती जी के विवाह के लिए प्रस्ताव लेकर उनके पिता के पास गए। जब माता पार्वती को उनके पिता ने उनके विवाह के बारे में बताया तो वह काफी दुखी हो गई। उनके  पिता चाहते की पार्वती का विवाह विष्णु जी से हो जाए। इस पर उनकी उस सहेली ने माता पार्वती को वन में जाने कि सलाह दी।जिसके बाद माता पार्वती ने ऐसा ही किया और वो एक गुफा में जाकर भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गई थी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का बनाया और शिव जी की स्तुति करने लगी। इतनी कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को दर्शन दिए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।

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