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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Gopashtami 2023 Date Importance Gopashtami Katha And Puja Vidhi Of Gau Mata

Gopashtami 2023: गोपाष्टमी आज, भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए ऐसे करें गायों की पूजा

Mon, 20 Nov 2023 08:33 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Mon, 20 Nov 2023 08:33 AM IST
सार

Gopashtami 2023: इस साल गोपाष्टमी 20 नवंबर को है। मान्यता के अनुसार इस दिन सर्वप्रथम भगवान कृष्ण ने गायों को चराना आरंभ किया था, इसलिए इस दिन गौ माता के साथ बछड़े की भी पूजा की जाती है।

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Gopashtami 2023 Date Importance Gopashtami Katha And Puja Vidhi Of Gau Mata
Gopashtami 2023: गोपाष्टमी - फोटो : iStock

विस्तार

Gopashtami 2023: कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर गौ माता की पूजा और सेवा करने का विधान है। इस साल गोपाष्टमी 20 नवंबर को है। मान्यता के अनुसार इस दिन सर्वप्रथम भगवान कृष्ण ने गायों को चराना आरंभ किया था, इसलिए इस दिन गौ माता के साथ बछड़े की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि यदि गोपाष्टमी के दिन विधि-विधान से गाय का पूजन व सेवा की जाए तो देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गाय की पूजा करने से श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इस दिन गाय की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। तो चलिए जानते हैं गोपाष्टमी की पूजा विधि और महत्व के बारे में...
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गोपाष्टमी पर ऐसे करें गौ माता की पूजा
  • अष्टमी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्वयं स्नानादि करना चाहिए और भगवान कृष्ण के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। 
  • इसके बाद गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार करें और गाय को घुंघरू आदि पहनाएं। 
  • गाय को आभूषण या फूलों की माला पहनाकर श्रंगार करें। गौ माता के सींग रंगकर उनमें चुनरी बांधे। 
  • अब गाय भलिभांति गाय का पूजन करें और भोजन कराएं। इसके बाद गाय की परिक्रमा करें।
  • गोधूलि बेला में पुनः गाय का पूजन करें और उन्हें गुड़, हरा चारा आदि खिलाएं।
  • यदि आपके घर में गाय न हो तो किसी गौशाला में जाकर गाय का पूजन कर सकते हैं।

गोपाष्टमी की कथा
मान्यता के अनुसार कान्हा जिस दिन गौ चराने के लिए पहली बार घर से निकले थे, वह कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी, इसलिए इस तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। गोपाष्टमी की पौराणिक कथा के अनुसार जब श्री कृष्ण छह वर्ष के हुए तो यशोदा जी से कहने लगे, 'मईया अब मैं बड़ा हो गया हूं। यशोदा जी प्रेम पूर्वक बोलीं- अच्छा लल्ला अब तुम बड़े हो गए हो तो बताओ अब क्या करें। इस पर कन्हैया बोले- अब मैं बछड़े चराने नहीं जाउंगा, अब मैं गाय जाउंगा। इसपर यशोदा जी ने कहा- ठीक है बाबा से पूछ लेना। अपनी मईया के इतना कहते ही झट से कृष्ण जी नंद बाबा से पूछने पहुंच गए।
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नंद बाबा ने कहा- लल्ला अभी तुम बहुत छोटे हो अभी तुम बछड़े ही चराओ, लेकिन कन्हैया हठ करने लगे। तब नंद जी ने कहा ठीक है लल्ला तुम पंडित जी को बुला लाओ- वह गौ चारण का मुहूर्त देख कर बता देंगे।बाबा की बात सुनकर कृष्ण जी झट से पंडित जी के पास पहुंच गए और बोले- पंडित जी, आपको बाबा ने बुलाया है, गौ चारण का मुहूर्त देखना है, आप आज ही का मुहूर्त बता देना मैं आपको बहुत सारा माखन दुंगा।
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पंडित जी नंद बाबा के पास पहुंचे और बार-बार पंचांग देख कर गणना करने लगे, तब नंद बाबा ने पूछा, क्या बात है पंडित जी? आप बार-बार क्या गिन रहे हैं? तब पंडित जी ने कहा, क्या बताएं गौ चारण के लिए केवल आज का ही मुहूर्त निकल रहा है, इसके बाद तो एक वर्ष तक कोई मुहूर्त नहीं है। पंडित जी की बात सुनने के बाद नंदबाबा को गौ चारण की स्वीकृति देनी पड़ी। उसी दिन भगवान ने गौ चारण आरंभ किया। यह शुभ तिथि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि थी, भगवान के द्वारा गौ-चारण आरंभ करने के कारण यह तिथि गोपाष्टमी कहलाई।


एक मान्यता ये भी
एक अन्य मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था। आठवें दिन जब इंद्र देव का अहंकार टूटा और वे श्रीकृष्ण के पास क्षमा मांगने आए। तभी से कार्तिक शुक्ल अष्टमी पर गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा है। 
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