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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Ganga Saptami 2026 Date Mythological Significance and Puja Vidhi In Hindi

Ganga Saptami 2026: वैशाख शुक्ल सप्तमी आज, जानें गंगा पूजन का महत्व, स्नान, मंत्र और दान के लाभ

Thu, 23 Apr 2026 01:42 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Thu, 23 Apr 2026 01:42 AM IST
सार

Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन गंगा पूजन और स्नान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों का नाश होता है।

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Ganga Saptami 2026 Date Mythological Significance and Puja Vidhi In Hindi
गंगा सप्तमी का महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ganga Saptami 2026: आज यानी 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पर्व है।  हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पावन पर्व मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी या गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगा और समापन 23 अप्रैल को रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 23 अप्रैल को ही गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान, पूजन और दान करने से व्यक्ति को रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान और पापों से मुक्ति प्राप्त होती है।

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1.गंगा सप्तमी का दिन माँ गंगा के पुनः प्रकट होने का प्रतीक माना जाता है। इसे गंगा जयंती भी कहा जाता है। इस दिन गंगा पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों का नाश होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य कई जन्मों तक फल देते हैं।
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2.  धार्मिक मान्यता के अनुसार, गंगा में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी समान पुण्य मिलता है। गंगा जल के स्पर्श मात्र से मन और शरीर शुद्ध हो जाते हैं।
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3. शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा में स्नान, नर्मदा के दर्शन और शिप्रा के स्मरण मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ये तीनों नदियाँ जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानी जाती हैं, जो मानव जीवन को पवित्र बनाती हैं।

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4. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माँ गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ है। वामन अवतार के समय ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु के चरण धोए, जिससे निकला जल गंगा के रूप में प्रकट हुआ। बाद में यह जल भगवान शिव की जटाओं में समाहित हो गया और वहीं से पृथ्वी पर प्रवाहित हुआ।

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5. धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि गंगा तीन धाराओं भागीरथी, मंदाकिनी और भोगवती के रूप में तीनों लोकों में प्रवाहित होती हैं। ये धाराएं स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक को जोड़ती हैं, जिससे गंगा को त्रिलोक पावनी कहा जाता है।

6. यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद उत्तर या ईशान कोण में माँ गंगा का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें। गंगा सप्तमी की कथा सुनें या पढ़ें और भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।

7. स्नान के समय “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” मंत्र का जप करें। पूजन के दौरान “ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा” मंत्र का उच्चारण शुभ माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, इसलिए गरीबों की सहायता करें और गौ सेवा अवश्य करें। इससे कई जन्मों के पुण्य की प्राप्ति होती है।

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