Ganesh Visarjan 2022 : क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन? जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सुख,समृद्धि और विघ्नहर्ता भगवान गणेश को भाद्र पद माह की चतुर्थी तिथि पर विधि-विधान के साथ पूजा करते हुए घर पर स्थापित किया जाता है और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है।
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अनन्त चतुर्दशी पूजा मुहूर्त (Anant Chaturdarshi 2022 Shubh Muhurat)
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त : 06:02 मिनट से 18:09 मिनट तक
अवधि :12 घंटे 6 मिनट
गणेश विसर्जन मुहूर्त 2022:( Ganesh Visarjan Muhurat 2022)
सुबह का शुभ मुहूर्त- 06 बजकर 30 मिनट से सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक
दोपहर का शुभ मुहूर्त- 12 बजकर 18 मिनट से दोपहर 1 बजकर 52 मिनट तक
शाम का शुभ मुहूर्त- 05 बजे से शाम 06 बजकर 31 मिनट तक
Ganesh Visarjan 2022 : 09 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी तिथि पर गणेश विसर्जन किया जाएगा। 10 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव पर्व अनंत चतुर्दशी तिथि पर घरों और बड़े-बड़े पांडालों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाएगा। सुख,समृद्धि और विघ्नहर्ता भगवान गणेश को भाद्र पद माह की चतुर्थी तिथि पर विधि-विधान के साथ पूजा करते हुए घर पर स्थापित किया जाता है और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेशजी का जन्म भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि के दिन हुआ था। भगवान गणेश सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं। इसके अलावा सभी तरह के शुभ कार्यों में भगवान गणेश की पूजा व स्मरण जरूर किया जाता है। क्योंकि ऐसी मान्यता है शुभ कार्य को करने से पहले अगर भगवान गणेश की पूजा की जाए तो कार्यों में बाधाएं नहीं आती और कार्य सफल होता है।
गणेश विसर्जन का महत्व
सनातन धर्म में भगवान गणेश को बु्द्धि, वाणी, विवेक और समृद्धि के देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है गणेश पूजा से सभी तरह की परेशानियां खत्म हो जाती है। गणेश पूजा से सभी प्रकार के वास्तु संबंधी दोष फौरन दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन हुआ था इसी कारण से गणेश चतुर्थी पर घर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हुए 10 दिनों तक विधि-विधान से इनकी पूजा आराधना की जाती है। फिर 10वें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी प्रतिमा का विसर्जन करते हुए उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
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क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन
गणेश विसर्जन के पीछे पौराणिक कथा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना के लिए गणेशजी का आह्नान किया था। उनसे महाभारत को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की। गणेश जी ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार तो किया परन्तु उन्होंने एक शर्त रखी 'कि मैं जब लिखना प्रारंभ करूंगा तो कलम को रोकूंगा नहीं,यदि कलम रुक गई तो लिखना बंद कर दूंगा'। तब वेदव्यासजी ने कहा कि भगवन आप देवताओं में अग्रणी हैं,विद्या और बुद्धि के दाता हैं और मैं एक साधारण ऋषि हूं। यदि किसी श्लोक में मुझसे त्रुटि हो जाय तो आप उस श्लोक को ठीक कर उसे लिपिबद्ध करें।
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गणपति जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी,लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपति जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पार्थिव गणेश भी पड़ा।
महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला और अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ। वेदव्यास ने देखा कि गणपति का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है,तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। इसलिए गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को स्थापित किया जाता है और 10 दिन मन,वचन कर्म और भक्ति भाव से उनकी उपासना करके अनंत चतुर्दशी को विसर्जित कर दिया जाता है।
गणेश विसर्जन विधि
- गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना करें।
- गणेश जी पूजा करते समय उन्हें मोदक,दूर्वा और फल जरूर अर्पित करें।
- इसके बाद गणेश आरती करें। आरती करने के बाद गणेश से विदा लेने की प्रार्थना करें।
- फिर इसके बाद जहां पर भगवान गणेश पिछले 10 दिनों से स्थापित हैं वहां से उनकी प्रतिमा को ध्यान और सम्मान से उठा लें।
- फिर प्रतिमा को लकड़े के पटे पर जिसमें लाल या गुलाबी कपड़ा बिछा हो वहां पर रख दें।
- फिर गणेश जी की प्रतिमा के ऊपर गंगाजल का छिडकाव करें।
- इसके बाद गणेशजी की मूर्ति के साथ सभी तरह की सामग्री को एक पोटली में बांध कर प्रतिमा के पास रख दें।
- अब गणेशजी की मूर्ति को बहते हुए जल में विसर्जित कर दें।
- इसके बाद अंत में अगले वर्ष दोबारा से आने की कामना करें।
अनन्त चतुर्दशी पूजा मुहूर्त (Anant Chaturdarshi 2022 Shubh Muhurat)
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त : 06:02 मिनट से 18:09 मिनट तक
अवधि :12 घंटे 6 मिनट
गणेश विसर्जन मुहूर्त 2022:( Ganesh Visarjan Muhurat 2022)
सुबह का शुभ मुहूर्त- 06 बजकर 30 मिनट से सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक
दोपहर का शुभ मुहूर्त- 12 बजकर 18 मिनट से दोपहर 1 बजकर 52 मिनट तक
शाम का शुभ मुहूर्त- 05 बजे से शाम 06 बजकर 31 मिनट तक
Ganesh Visarjan 2022 : 09 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी तिथि पर गणेश विसर्जन किया जाएगा। 10 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव पर्व अनंत चतुर्दशी तिथि पर घरों और बड़े-बड़े पांडालों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाएगा। सुख,समृद्धि और विघ्नहर्ता भगवान गणेश को भाद्र पद माह की चतुर्थी तिथि पर विधि-विधान के साथ पूजा करते हुए घर पर स्थापित किया जाता है और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेशजी का जन्म भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि के दिन हुआ था। भगवान गणेश सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं। इसके अलावा सभी तरह के शुभ कार्यों में भगवान गणेश की पूजा व स्मरण जरूर किया जाता है। क्योंकि ऐसी मान्यता है शुभ कार्य को करने से पहले अगर भगवान गणेश की पूजा की जाए तो कार्यों में बाधाएं नहीं आती और कार्य सफल होता है।
गणेश विसर्जन का महत्व
सनातन धर्म में भगवान गणेश को बु्द्धि, वाणी, विवेक और समृद्धि के देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है गणेश पूजा से सभी तरह की परेशानियां खत्म हो जाती है। गणेश पूजा से सभी प्रकार के वास्तु संबंधी दोष फौरन दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन हुआ था इसी कारण से गणेश चतुर्थी पर घर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हुए 10 दिनों तक विधि-विधान से इनकी पूजा आराधना की जाती है। फिर 10वें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी प्रतिमा का विसर्जन करते हुए उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन
गणेश विसर्जन के पीछे पौराणिक कथा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना के लिए गणेशजी का आह्नान किया था। उनसे महाभारत को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की। गणेश जी ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार तो किया परन्तु उन्होंने एक शर्त रखी 'कि मैं जब लिखना प्रारंभ करूंगा तो कलम को रोकूंगा नहीं,यदि कलम रुक गई तो लिखना बंद कर दूंगा'। तब वेदव्यासजी ने कहा कि भगवन आप देवताओं में अग्रणी हैं,विद्या और बुद्धि के दाता हैं और मैं एक साधारण ऋषि हूं। यदि किसी श्लोक में मुझसे त्रुटि हो जाय तो आप उस श्लोक को ठीक कर उसे लिपिबद्ध करें।
गणपति जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी,लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपति जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पार्थिव गणेश भी पड़ा।
महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला और अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ। वेदव्यास ने देखा कि गणपति का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है,तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। इसलिए गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को स्थापित किया जाता है और 10 दिन मन,वचन कर्म और भक्ति भाव से उनकी उपासना करके अनंत चतुर्दशी को विसर्जित कर दिया जाता है।
गणेश विसर्जन विधि
- गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना करें।
- गणेश जी पूजा करते समय उन्हें मोदक,दूर्वा और फल जरूर अर्पित करें।
- इसके बाद गणेश आरती करें। आरती करने के बाद गणेश से विदा लेने की प्रार्थना करें।
- फिर इसके बाद जहां पर भगवान गणेश पिछले 10 दिनों से स्थापित हैं वहां से उनकी प्रतिमा को ध्यान और सम्मान से उठा लें।
- फिर प्रतिमा को लकड़े के पटे पर जिसमें लाल या गुलाबी कपड़ा बिछा हो वहां पर रख दें।
- फिर गणेश जी की प्रतिमा के ऊपर गंगाजल का छिडकाव करें।
- इसके बाद गणेशजी की मूर्ति के साथ सभी तरह की सामग्री को एक पोटली में बांध कर प्रतिमा के पास रख दें।
- अब गणेशजी की मूर्ति को बहते हुए जल में विसर्जित कर दें।
- इसके बाद अंत में अगले वर्ष दोबारा से आने की कामना करें।