{"_id":"5d9458878ebc3e016025fed0","slug":"durga-puja-2019-navratri-shashti-tithi-kalparambha-date","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्गा पूजा 2019 : षष्ठी तिथि से आरंभ होगी दुर्गा पूजा, जानें परंपरा","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
दुर्गा पूजा 2019 : षष्ठी तिथि से आरंभ होगी दुर्गा पूजा, जानें परंपरा
Thu, 03 Oct 2019 10:41 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 03 Oct 2019 10:41 PM IST
विज्ञापन
दुर्गा
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवरात्रि में देवी दुर्गा की नौ दिनों तक आराधना होती है। नवरात्रि में ही दुर्गा पूजा होती है। दुर्गा पूजा की विधि-विधान से पूजा-आराधना षष्ठी तिथि से प्रारंभ हो जाती है। मान्यता है कि इस दिन यानी षष्ठी तिथि पर ही देवी दुर्गा धरती पर आती हैं। षष्ठी तिथि को कल्पारंभ, बिल्व निमंत्रण पूजन और अधिवास परंपरा निभाई जाती है।
विज्ञापन
काल प्रारंभ
काल प्रारंभ षष्ठी की तिथि पर सुबह की जाती है। पांडलों में घट स्थापना कर मां दुर्गा की स्थापना की जाती है। घट स्थापना के बाद अगले तीन दिन महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी के दिन मां की पूजा आराधना की जाती है।
विज्ञापन
बोधन परंपरा
बोधन परंपरा जिसका अर्थ होता है कि मां दुर्गा को नींद से जागना। हिंदू मान्यता के अनुसार सभी देवी-देवता दक्षिणायान काल में निंद्रा की अवस्था में होते हैं। ऐसे में देवी दुर्गा को दक्षिणायान काल में बोधन के माध्यम से नींद से उन्हें जगाया जाता है। चूंकि देवी दुर्गा को असमय नींद से जगाया जाता है इसलिए इस क्रिया को अकाल बोधन भी कहते हैं। बोधन के बाद आमंत्रण की परंपरा निभाई जाती है। देवी दुर्गा की वंदना की जाती है।
विज्ञापन
कल्परम्भ मुहूर्त
अक्टूबर 3, 2019 को 10:13:45 से षष्ठी आरम्भ
अक्टूबर 4, 2019 को 09:37:26 पर षष्ठी समाप्त