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Dhanteras 2024: धनतेरस का पर्व आज, जानें तिथि, पूजा विधि और कथा
Tue, 29 Oct 2024 08:24 AM IST
ज्योति मेहरा
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Tue, 29 Oct 2024 08:24 AM IST
सार
धनतेरस का त्योहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। इसे सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की त्रयोदशी को यह पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष धनतेरस का पर्व 29 अक्तूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।
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Dhanteras 2024: धनतेरस तिथि, पूजा विधि और कथा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Dhanteras 2024: धनतेरस का त्योहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। इसे सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की त्रयोदशी को यह पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष धनतेरस का पर्व 29 अक्तूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इसे 'धन त्रयोदशी' भी कहते हैं।
मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धन्वंतरि को स्वास्थ्य के देवता माना जाता है, और उनकी पूजा से अच्छे स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति मिलती है।
इस वर्ष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 29 अक्तूबर को सुबह 10:31 बजे से शुरू होकर 30 अक्तूबर दोपहर 1:15 बजे तक रहेगी। धनतेरस पूजा का उत्तम समय प्रदोष काल (5:38 से 8:13 बजे) है। खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:09 से दोपहर 1:22 बजे तक है, और दोपहर 2:47 से शाम 7:08 बजे तक भी शुभ समय है।
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धनतेरस पूजा की विधि
धनतेरस की संध्या में यमदेव निमित्त दीपदान किया जाता है। फलस्वरूप उपासक और उसके परिवार को मृत्युदेव यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है। विशेषरूप से यदि गृहलक्ष्मी इस दिन दीपदान करें तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है।
बर्तन खरीदने की परंपरा को पूर्ण अवश्य किया जाना चाहिए। विशेषकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदे क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का अहम धातु है। इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है। व्यापारी इस विशेष दिन में नए बही-खाते खरीदते हैं जिनका पूजन वे दीवाली पर करते हैं।
धनतेरस के दिन चाँदी खरीदने की भी विशेष परंपरा है। चन्द्रमा का प्रतीक चाँदी मनुष्य को जीवन में शीतलता प्रदान करता है। चूंकि चाँदी कुबेर की धातु है, धनतेरस पर चाँदी खरीदने से घर में यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा की वृद्धि होती है।
संध्या में घर के मुख्य द्वार पर और आँगन में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और दीवाली का शुभारंभ होता है।
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मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धन्वंतरि को स्वास्थ्य के देवता माना जाता है, और उनकी पूजा से अच्छे स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति मिलती है।
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इस वर्ष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 29 अक्तूबर को सुबह 10:31 बजे से शुरू होकर 30 अक्तूबर दोपहर 1:15 बजे तक रहेगी। धनतेरस पूजा का उत्तम समय प्रदोष काल (5:38 से 8:13 बजे) है। खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:09 से दोपहर 1:22 बजे तक है, और दोपहर 2:47 से शाम 7:08 बजे तक भी शुभ समय है।
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धनतेरस पूजा की विधि
धनतेरस की संध्या में यमदेव निमित्त दीपदान किया जाता है। फलस्वरूप उपासक और उसके परिवार को मृत्युदेव यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है। विशेषरूप से यदि गृहलक्ष्मी इस दिन दीपदान करें तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है।
बर्तन खरीदने की परंपरा को पूर्ण अवश्य किया जाना चाहिए। विशेषकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदे क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का अहम धातु है। इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है। व्यापारी इस विशेष दिन में नए बही-खाते खरीदते हैं जिनका पूजन वे दीवाली पर करते हैं।
धनतेरस के दिन चाँदी खरीदने की भी विशेष परंपरा है। चन्द्रमा का प्रतीक चाँदी मनुष्य को जीवन में शीतलता प्रदान करता है। चूंकि चाँदी कुबेर की धातु है, धनतेरस पर चाँदी खरीदने से घर में यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा की वृद्धि होती है।
संध्या में घर के मुख्य द्वार पर और आँगन में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और दीवाली का शुभारंभ होता है।