फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Dattatreya Jayanti 2020 Date muhurat timing puja vidhi and significance

Dattatreya Jayanti 2020 Date: कब है दत्तात्रेय जयंती, जानें तिथि, मुहूर्त और व्रत विधि

Sat, 26 Dec 2020 12:02 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 26 Dec 2020 12:02 AM IST
विज्ञापन
Dattatreya Jayanti 2020 Date muhurat timing puja vidhi and significance
दत्तात्रेय जयंती 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

दत्तात्रेय जयंती 29 दिसंबर को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल दत्तात्रेय जयंती मार्गशीर्ष की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों का स्वरूप हैं। मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी। इन्हीं के नाम पर दत्त संप्रदाय का उदय हुआ। दक्षिण भारत में इनके अनेक प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। दत्तात्रेय जयंती के दिन उनके भक्त व्रत-पूजा करते हैं। 

विज्ञापन

दत्तात्रेय जयंती 2020 शुभ मुहूर्त 
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - सुबह 07 बजकर 54 मिनट से (29 दिसम्बर 2020) 
पूर्णिमा तिथि समाप्त - सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक (30 दिसम्बर 2020)
विज्ञापन
विज्ञापन

दत्तात्रेय जयंती की पूजा विधि 
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। 
  • पूजा से पहले एक चौकी पर गंगाजल छिड़कर उस पर साफ आसन बिछाएं।
  • भगवान दत्तात्रेय की तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके बाद भगवान दत्तात्रेय को फूल, माला आदि अर्पित करें।
  • अब भगवान की धूप व दीप से विधिवत पूजा करें।
  • अंत में आरती गाएं और फिर प्रसाद वितरण करें। 
विज्ञापन

भगवान दत्तात्रेय की कथा
मान्यता है कि महर्षि अत्रि मुनि की पत्नी अनसूया की महिमा जब तीनों लोक में होने लगी तो माता अनसूया के पतिव्रत धर्म की परीक्षा लेने के लिए माता पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के अनुरोध पर तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु, महेश पृथ्वी लोक पहुंचे। तीनों देव साधु भेष रखकर अत्रिमुनि आश्रम में पहुंचे और माता अनसूया के सम्मुख भोजन की इच्छा प्रकट की। 
तीनों देवताओं ने माता के सामने यह शर्त रखी कि वह उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराए। 

इस पर माता संशय में पड़ गई। उन्होंने ध्यान लगाकर जब अपने पति अत्रिमुनि का स्मरण किया तो सामने खड़े साधुओं के रूप में उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश खड़े दिखाई दिए। माता अनसूया ने अत्रिमुनि के कमंडल से निकाला जल जब तीनों साधुओं पर छिड़का तो वे छह माह के शिशु बन गए। तब माता ने शर्त के मुताबिक उन्हें भोजन कराया। वहीं, पति के वियोग में तीनों देवियां दुखी हो गईं।

तब नारद मुनि ने उन्हें पृथ्वी लोक का वृत्तांत सुनाया। तीनों देवियां पृथ्वी लोक में पहुंचीं और माता अनसूया से क्षमा याचना की। तीनों देवों ने भी अपनी गलती को स्वीकार कर माता की कोख से जन्म लेने का आग्रह किया। इसके बाद तीनों देवों ने दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया। तभी से माता अनसूया को पुत्रदायिनी के रूप में पूजा जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed