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रूप चौदस 2018: जानिए क्या है रूप चौदस का महत्व और कथा, क्यों कहा जाता है छोटी दिवाली

Tue, 06 Nov 2018 01:24 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 06 Nov 2018 01:24 PM IST
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Chhoti Diwali 2018 Kali Chaudas Naraka Chaturdashi importance and story behind roop chaudas
दिवाली 2018 - फोटो : file photo

दिवाली के ठीक एक दिन पहले रूप चौदस का त्योहार मनाया जाता है। इसे नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, काली चतुर्दशी के नामों से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन जो व्यक्ति पूजा और दीपक जलाता है उस व्यक्ति को तमाम तरह की परेशानियों और पापों से मुक्ति मिल जाती है। दिवाली से पहले रूप चौदस के दिन घर के कई हिस्सों में यम के लिए दीपक जलाते हैं। इस दिन यमराज के लिए दीपदान करते हैं।

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रूप चौदस की कथा

नरकासुर का वध
मान्याता के अनुसार कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि पर भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराया था। जिसकी खुशी के लिए इस दिन दीयों की श्रृंखला सजाई जाती है।
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राजा रंती की कथा
वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार रंती देव नामक राजा थे। जब राजा के मृत्यु का समय समीप आया तो यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को देखकर राजा बोले मैंने तो अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया। ऐसे में फिर स्वर्ग की जगह नर्क क्यों चलने के लिए कहा जा रहा है।  तब यमदूत ने कहा कि एक बार आपने दरवाजें पर भूखे ब्राह्राण को खाली हाथ लौटा दिया था यह उसी पाप का नतीजा है। इसके बाद राजा ने अपने पापों का प्राश्यचित करने के लिए यमदूत से एक साल का समय मांगा और फिर ऋषियों से इस पाप को दूर करने का उपाय पूछा। उनको कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत कर ब्राह्मणों को भोजन कराने को कहा गया। ऐसा करने के बाद राजा को विष्णु लोक में स्थान मिला।
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रूप चौदस का महत्व
नरक चतुर्दशी या रूप चौदस के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यातनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस कारण भी नरक चतुर्दशी के दिन दीनदान और पूजा का विधान है।

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