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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Chhath puja 2023 Chhath puja mein sindoor kyon lagati hai vrati mahilaein janein mahatva in Hindi

Chhath 2023: छठ पूजा में व्रती महिलाएं क्यों लगाती हैं नाक तक सिंदूर ? जानें छठ पूजा पर इसका महत्व

Tue, 14 Nov 2023 02:22 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 14 Nov 2023 02:22 PM IST
सार

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि छठ पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी नाक से लेकर मांग तक सिंदूर क्यों लगाती है? इसके पीछे कई मान्यताए  हैं तो चलिए जानते हैं।

 

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Chhath puja 2023 Chhath puja mein sindoor kyon lagati hai vrati mahilaein janein mahatva in Hindi
छठ पूजा में नाक तक सिंदूर लगाती हैं महिलाएं - फोटो : amar ujala

विस्तार

Chhath puja mein naak tak sindoor kyon lagati hai vrati mahilaein: दिवाली के बाद अब पूरे उत्तर भारत में छठ पूजा की धूम नजर आ रही है। छठ आस्था का महापर्व माना जाता है। माना जाता है कि इस पर्व का पालन करने से मन की हर मनोकामना पूरी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बरसती है। छठ पर्व को लेकर हिंदू धर्म में अनेक मान्यताएं भी हैं, जिसे हम समृद्धि और पूर्णता की प्रतीक बताते है। इस बार इस महापर्व का आगाज 17 नवंबर से हो रहा है और इसका समापन में 20 नवंबर को मनाया जाएगा। सबसे कठिन पर्व छठ पूजा को माना जाता है और इस व्रत का नियम भी बहुत आयामी होता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि छठ पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी नाक से लेकर मांग तक सिंदूर क्यों लगाती है? इसके पीछे कई मान्यताए  हैं तो चलिए जानते हैं।

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सिंदूर की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं का नाक से मांग तक सिंदूर लगाने के पीछे एक कारण है। मान्यता है कि सुहागन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए ऐसे सिंदूर लगाती है। मान्यता है कि जो भी महिलाएं ऐसा करती है उनकी पति की आयु लंबी होती है और वो ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं। 
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छठ पर्व पर महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर इसलिए लगाती है ताकि उनके पति की लंबी आयु हो, उनका समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़े।  धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं सिंदूर छिपा लेती है उनका पति समाज में छुप जाता है और तरक्की नहीं कर पाता है इससे उसकी आयु भी कम हो जाती है। इस कारण छठ पूजा के दौरान महिलाएं नाक से लेकर मांग तक सिंदूर भरती हैं। महिलाएं अपने पति के प्रति प्रेम और सम्मान भी जाहिर करती हैं। 
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सिंदूर से संबंधित कथा
एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि जब दुशासन गरजते हुए द्रौपदी के कक्ष में पहुंचा तब उन्होंने रितु स्नान नहीं किया था जिस कारण उन्होंने मांग में सिंदूर नहीं भरी थी। ऐसे में दुशासन ने कहा कि तूने अभी तक यह भी तय नहीं किया कि किसके नाम का सिंदूर लगाना है और ऐसा कह कर उसने द्रौपदी के बोल पकड़कर खींचने लगा। द्रोपदी बिना सिंदूर लगाए पतियों के सामने नहीं जा सकती थी। इसलिए उन्होंने जल्दी से सिंदूरदानी ही अपने सिर पर पलट लिया। उसके बाद गलती से सिंदूर नाक तक चला गया इसलिए वस्त्रहरण के बाद द्रौपदी में बाल खुले रखे और हमेशा नाक तक लंबा सिंदूर लगाया।


छठ पूजा में कौन सा सिंदूर इस्तेमाल होता है 
छठ पूजा में तीन तरह के सिंदूर का इस्तेमाल होता है। पहला सुर्ख लाल, दूसरा सिंदूर पीला या नारंगी, तीसरा सिंदूर मटिया सिंदूर होता है।

मटिया सिंदूर बिहार में लगाने की है विशेष परंपरा
मटिया सिंदूर का प्रयोग हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार विशेष रूप से बिहार में किया जाता है। इस सिंदूर को सबसे शुद्ध माना जाता है। एकदम मिट्टी की क्वालिटी का यह सिंदूर होता है। इस सिंदूर को मटिया सिंदूर कहा जाता है। पूजा में चढ़ाने के लिए खासतौर पर छठ पूजा के दौरान इस सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।

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