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Chaturmas 2025: चातुर्मास में इस एक उपाय से पाएं विष्णु जी की कृपा, पूरी होगी हर मनोकामना

Tue, 08 Jul 2025 06:25 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 08 Jul 2025 06:25 PM IST
सार

Chaturmas 2025: चातुर्मास, हिंदू धर्म का वह समय है जब विशेष रूप नियमों का पालन किया जाता है। यह हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी तक चलता है।

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Chaturmas 2025 vishnu chalisa niyam and benefits in hindi
Chaturmas 2025 - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Chaturmas 2025: चातुर्मास, हिंदू धर्म का वह समय है जब विशेष रूप नियमों का पालन किया जाता है। यह हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी तक चलता है। चार माह की इस अवधि में भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। इस दौरान प्रभु के साथ देवी लक्ष्मी समेत अन्य देवी-देवता भी योग निद्रा में होते हैं। चूंकि देव सोए हुए होते हैं, इसलिए घरों में शादी-विवाह, मुंडन व हवन-तिलक जैसे शुभ काम नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा सृष्टि का कार्यभार भी भगवान शिव के हाथों में होता है। इस बार 6 जुलाई 2025 से चातुर्मास शुरू हो गया है। यह 1 नवंबर 2025 तक चलेगा। इस दौरान भगवान विष्णु की चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही नहीं लंबे समय से अटके काम और धन से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं। आइए इस शक्तिशाली चालीसा के बारे में जानते हैं।

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विष्णु चालीसा

दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

चौपाई 
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥

शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥

आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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