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Chaturmas 2021: आज से चातुर्मास शुरू, जानिए इन चार महीनों में क्या है नियम

Tue, 20 Jul 2021 12:19 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 20 Jul 2021 12:19 PM IST
सार

  • शास्त्रों में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करते हैं। ऐसे में सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं।

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chaturmas 2021 start today know what should do in chaturmas
आज से चातुर्मास शुरू, चातुर्मास में पूजा-पाठ और भगवान की आराधना करना बहुत ही शुभ फलदायक होता है।

विस्तार

Chaturmas 2021 Start: चातुर्मास आरंभ हो चुका है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू हो जाता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में विश्राम करने के लिए चले जाते हैं। चार महीनों तक भगवान के योगनिद्रा में होने के कारण किसी भी तरह का मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। भगवान विष्णु के चार महीने तक पाताल लोक में रहने के कारण इसे चातुर्मास कहा जाता है। ये चार महीने त्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह होते हैं। चातुर्मास शुरू होते ही चार महीनों के लिए शादी और मांगलिक कार्य थम जाते हैं। इसके अलावा कई तरह कार्य भी निषेध हो जाते हैं। आइए जानते हैं चातुर्मास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं...

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 चातुर्मास का महत्व
शास्त्रों में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करते हैं। ऐसे में सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। चातुर्मास में ही भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना सावन आता है। जगत के पालनहार विष्णु जी की अनुपस्थिति के कारण चातुर्मास में विवाह या अन्य संस्कार, गृह प्रवेश जैसे अन्य मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। वहीं जब कार्तिक शुक्ल की एकादशी जिसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं आती है तब भगवान विष्णु जागते हैं और फिर पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
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चातुर्मास जिसमें सावन, भादौ, आश्विन और कार्तिक का माह आता है उसमें खान-पान और व्रत के नियम और संयम का पालन करना चाहिए। दरअसल इन 4 महीनो में व्यक्ति की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है। इससे अलावा भोजन और जल में बैक्टीरिया की तादाद भी बढ़ जाती है। 
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चातुर्मास मास का पहला माह सावन आता है। नियमानुसार इस महीने हरी पत्तेदार सब्जियों को नहीं खाना चाहिए। दूसरा माह भाद्रपद आता है। इस माह दही खाने से बचना चाहिए। चातुर्मास का तीसरा माह अश्विन होता है जिसमें दूध से परहेज बाताया गया है। चातुर्मास का अंतिम माह कार्तिक में दालों का सेवन नहीं करना चाहिए। चातुर्मास में खानपान से जुड़े ये नियम अच्छी सेहत के लिए उत्तम होते हैं।

चातुर्मास में पूजा-पाठ और भगवान की आराधना करना बहुत ही शुभ फलदायक होता है।

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