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Chaitra Navratri 2025 Day 1: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व, विधि और मंत्र

Sun, 30 Mar 2025 06:03 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 30 Mar 2025 06:03 AM IST
सार

Chaitra Navratri 2025 Navratri Day 1: नवरात्रि के प्रथम दिन प्रातःकाल स्नान करके पवित्र भाव से मां शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले कलश स्थापना कर देवताओं का आह्वान किया जाता है।

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Chaitra Navratri 2025 Know Navratri Day 1 Goddess Shailaputri Puja Vidhi Mantra and Significance
चैत्र नवरात्रि: मां शैलपुत्री - फोटो : adobe stock

विस्तार

Chaitra Navratri 2025 Navratri Day 1: नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां शैलपुत्री का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था, इसलिए वे ‘शैलपुत्री’कहलाईं। वे शक्ति की मूलरूपा हैं और देवी पार्वती का प्रथम स्वरूप मानी जाती हैं। इनकी उपासना करने से साधक को आध्यात्मिक और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।

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मां शैलपुत्री का स्वरूप
मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और सौम्य है। वे वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित रहता है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री सम्पूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्रोत हैं। इनकी पूजा से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, जिससे साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
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मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। वे प्रकृति की देवी हैं और उनके आशीर्वाद से मनुष्य में धैर्य, संयम और सहनशीलता का विकास होता है। विशेष रूप से, यदि कोई व्यक्ति मानसिक अशांति या आध्यात्मिक अवरोधों से पीड़ित है, तो मां शैलपुत्री की आराधना से उसे मुक्ति मिलती है। उनके पूजन से ग्रहदोष शांत होते हैं और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि
नवरात्रि के प्रथम दिन प्रातःकाल स्नान कर के पवित्र भाव से मां शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले, कलश स्थापना कर देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसके बाद, मां शैलपुत्री की मूर्ति या चित्र को शुद्ध जल से स्नान कराकर स्वच्छ स्थान पर स्थापित किया जाता है। देवी को लाल या सफेद वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। उनकी पूजा में धूप, दीप, अक्षत, चंदन, फूल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। विशेष रूप से, उन्हें गाय के घी से बना हलवा प्रिय है, जिसे भोग लगाकर भक्तों में वितरित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान, मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप किया जाता है और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। अंत में, देवी की आरती उतारकर भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

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मां शैलपुत्री के मंत्र-
मां शैलपुत्री की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तों को इन मंत्रों का जाप करना चाहिए

बीज मंत्र:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।"

ध्यान मंत्र:
"वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥"

स्तोत्र मंत्र:
"या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

इन मंत्रों का जाप करने से मां शैलपुत्री की कृपा प्राप्त होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

मां शैलपुत्री की कृपा से प्राप्त होने वाले लाभ

मूलाधार चक्र की शुद्धि- मां शैलपुत्री की उपासना से साधक का मूलाधार चक्र सक्रिय होता है, जिससे उसमें आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

मानसिक शांति- जिन लोगों का मन अत्यंत चंचल रहता है, उन्हें मां शैलपुत्री की आराधना अवश्य करनी चाहिए।

धन एवं समृद्धि- देवी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में शांति बनी रहती है।

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