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Chaitra Navratri 2021: घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि
Tue, 06 Apr 2021 10:47 AM IST
विनोद शुक्ला
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 06 Apr 2021 10:47 AM IST
सार
- चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से आरंभ हो रहे हैं और नवमी तिथि 21 अप्रैल को पड़ेगी। नवरात्रि व्रत का पारण दशमी तिथि 22 अप्रैल को किया जाएगा।
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चैत्र नवरात्रि 2021: नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से आरंभ हो रहे हैं और नवमी तिथि 21 अप्रैल को पड़ेगी। नवरात्रि व्रत का पारण दशमी तिथि 22 अप्रैल को किया जाएगा। चैत्र नवरात्रि के नौ दिन मां के नौ स्वरूपों की अलग-अलग पूजा होती है। 13 अप्रैल को आश्विन नक्षत्र और चंद्रमा मेष राशि में होने से बढ़ेगी नवरात्रि की शुभता। इस बार नवरात्रि पर शुभ योग बन रहे हैं।नवरात्रि में 4 दिन रवि योग सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, इस तरह के शुभ संयोग में नवरात्रि पर मां भगवती की आराधना करने पर विशेष फल मिलता है।
यह नवरात्रि धन और धर्म की बढ़ोतरी के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है। 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वासंती नवरात्रि अश्वनी नक्षत्र सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग से प्रारंभ होगा और 22 अप्रैल गुरुवार को मघा नक्षत्र और सिद्धि योग में दशमी तिथि के साथ संपन्न हो जाएगा। मां अपने भक्तों को दर्शन घोड़े पर सवार होकर देने आ रही हैं। वही मां की विदाई नर वाहन पर होगी।
घटस्थापना
नवरात्रि के प्रथम दिन ग्रहों के शुभ संयोग से विशेष योग का निर्माण हो रहा है। प्रतिपदा की तिथि में विष्कुंभ और प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन विष्कुंभ योग दोपहर 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। प्रीति योग का आरंभ होगा। करण बव सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक, उसके बाद बालव रात 11 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
तिथि- 13 अप्रैल 2021, दिन- मंगलवार
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक।
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना के लिए पूजन सामग्री
चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन, कलश, सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), पवित्र स्थान की मिट्टी, जल (संभव हो तो गंगाजल), कलावा/मौली, आम या अशोक के पत्ते (पल्लव), छिलके/जटा वाला, नारियल, सुपारी, अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला, लाल कपड़ा, मिठाई, सिंदूर, दूर्वा इत्यादि।
नवरात्रि घटस्थापना पूजा विधि
सबसे पहले मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं। अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें। आम या अशोक के पत्तों को कलश के ऊपर रखें। नारियल में कलावा लपेटे। उसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के मध्य रखें। घटस्थापना पूरी होने के पश्चात् मां दुर्गा का आह्वान करते हैं।
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यह नवरात्रि धन और धर्म की बढ़ोतरी के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है। 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वासंती नवरात्रि अश्वनी नक्षत्र सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग से प्रारंभ होगा और 22 अप्रैल गुरुवार को मघा नक्षत्र और सिद्धि योग में दशमी तिथि के साथ संपन्न हो जाएगा। मां अपने भक्तों को दर्शन घोड़े पर सवार होकर देने आ रही हैं। वही मां की विदाई नर वाहन पर होगी।
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घटस्थापना
नवरात्रि के प्रथम दिन ग्रहों के शुभ संयोग से विशेष योग का निर्माण हो रहा है। प्रतिपदा की तिथि में विष्कुंभ और प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन विष्कुंभ योग दोपहर 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। प्रीति योग का आरंभ होगा। करण बव सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक, उसके बाद बालव रात 11 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
तिथि- 13 अप्रैल 2021, दिन- मंगलवार
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक।
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना के लिए पूजन सामग्री
चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन, कलश, सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), पवित्र स्थान की मिट्टी, जल (संभव हो तो गंगाजल), कलावा/मौली, आम या अशोक के पत्ते (पल्लव), छिलके/जटा वाला, नारियल, सुपारी, अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला, लाल कपड़ा, मिठाई, सिंदूर, दूर्वा इत्यादि।
नवरात्रि घटस्थापना पूजा विधि
सबसे पहले मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं। अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें। आम या अशोक के पत्तों को कलश के ऊपर रखें। नारियल में कलावा लपेटे। उसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के मध्य रखें। घटस्थापना पूरी होने के पश्चात् मां दुर्गा का आह्वान करते हैं।