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Chaitra Navratri Ghatasthapana Muhurat Timing 2021: चैत्र नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और विधि

Tue, 13 Apr 2021 05:59 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 13 Apr 2021 05:59 AM IST
सार

  • 13 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि हो रहे हैं आरंभ
  • नवरात्रि का पहला दिन प्रतिपदा का होता है। इस दिन कलश पूजन के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन किया जाता है।

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Chaitra Navratri 2021 Ghatasthapana Muhurat Timing Kalash sthapana shubh muhurat puja vidhi
चैत्र नवरात्रि 2021: नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chaitra Navratri 2021 Ghatasthapana Muhurat Timing Kalash Sthapana Shubh Muhurat : नूतन राक्षस नामक संवत्सर का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 13 अप्रैल मंगलवार से हो रहा है। वर्षपर्यंत जितने भी धार्मिक-मांगलिक एवं अनुष्ठान आदि किये जायेंगे सभी में संकल्प में राक्षस नामक संवत्सर का ही प्रयोग होगा। नये संवत्सर का आरम्भ शक्ति आराधना के साथ ही आरम्भ हो जाएगा। आरम्भ के नौ दिनों में माँ के अलग अलग रूपों की पूजा होगी। व्रत-पूजा आदि के लिए सभी व्रतियों साधकों को कलश स्थापना के लिए मुहूर्त इस प्रकार है। इनमें से किसी भी समय में अपनी सुविधानुसार कलश स्थापना कर सकते हैं।

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ब्रह्म मुहूर्त- 13 अप्रैल-  सुबह 04 बजकर 39 मिनट से सुबह 05 बजकर 27 मिनट
अमृतसिद्धि योग- 13 अप्रैल- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से दोपहर 02 बजकर 17 मिनट तक
सर्वार्थसिद्धि योग- 13 अप्रैल -  सुबह 06 बजकर 11 मिनट से दोपहर 02 बजकर 17 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त-13 अप्रैल -  दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
अमृत काल मुहूर्त-13 अप्रैल-  सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 08 बजकर 03 मिनट तक

सुबह 9 बजकर 15 मिनट से और अपराहन 03 बजे तक क्रमशः तक चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया विद्यमान रहेगी। यह भी कलश स्थापना के लिए श्रेष्ठ मानी गयी है।

कलश स्थापना पूजा विधि
नवरात्रि के प्रथम दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर कलश, नारियल-चुन्नी, श्रृंगार का सामान, अक्षत, हल्दी, फल-फूल पुष्प आदि यथा संभव सामग्री साथ रख लें। कलश सोना, चांदी, तामा, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए। लोहे अथवा स्टील का कलश पूजा मे प्रयोग नहीं करना चाहिए। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक बनाएं, पूजा आरम्भ के समय 'ऊं पुण्डरीकाक्षाय' नमः। कहते हुए कुशा से अपने ऊपर जल छिडकें। अपने पूजा स्थल से दक्षिण और पूर्व के कोने में घी का दीपक जलाते हुए- ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो  ज्योतिर्र जनार्दनः। दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते।। यह मंत्र पढते हुए दीप प्रज्ज्वलित करें। माँ दुर्गा की मूर्ति के बाईं तरफ श्री गणेश की मूर्ति रखें। पूजा स्थल के उत्तर-पूर्व भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज (सतनजा) नदी की रेत रखते हुए ॐ भूम्यै नमः कहते हुए डालें।
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इसके उपरांत कलश में जल-गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें। अब कलश में थोडा और जल-गंगाजल डालते हुए ॐ वरुणाय नमः मंत्र पढ़ें और कलश को पूर्ण रूप से भर दें। इसके बाद आम की टहनी (पल्लव) डालें यदि आम की पल्लव न हो तो पीपल, बरगद, गूलर अथवा पाकर का पल्लव भी कलश के ऊपर रखने का विधान है। जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखकर कलश को माथे के समीप लाएं और वरुण देवता को प्रणाम करते हुए रेत पर कलश स्थापित करें।
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पूजा से पहले एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि आराधना के लिए श्रद्धा-विश्वास और समर्पण का होना अति आवश्यक है, यदि इन दोनों के साथ समर्पण भी है तो आप की सभी बिघ्न-बाधायें दूर होंगी। पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि माँ मै आज नवरात्रि की प्रतिपदा से आप की आराधना अमुक कार्य के लिए कर रहा-रही हूँ, मेरी पूजा स्वीकार करके ईष्ट कार्य को सिद्ध करो !

पूजा के समय यदि आपको कोई भी मन्त्र नहीं आता हो तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे। से सभी पूजन सामग्री चढाएं माँ शक्ति का यह मंत्र अमोघ है ! आपके पास जो भी यथा संभव सामग्री हो उसी से आराधना करें जितना भी संभव हो श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरुर चढ़ाएं।  सर्वप्रथम माँ का ध्यान, आवाहन, आसन, अर्घ्य, स्नान, उपवस्त्र, वस्त्र,श्रृंगार का सामन, सिन्दूर, हल्दी, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, मिष्ठान, रितुफल, नारियल आदि जो भी सुलभ उसे अर्पित करें ! पूजन के बाद आरती और क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। भक्ति में शक्ति हो तो शक्ति हमेशा प्रसन्न रहती हैं।


विद्यार्थी वर्ग ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः। मंत्र पढ़ते हुए माता शक्ति कि पूजा करें। 

जिन आराधकों के घर में अशांति हो उन्हें- या देवि ! सर्वभूतेषु शान्ति रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। यह मंत्र जपने से सुख-शान्ति मिलेगी।

जो लोग कर्ज में डूबे हुए हैं वे 'या  देवि ! सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। मंत्र से माँ की पूजा करें। इन सबके अतिरिक्त अगर संभव हो तो कुंजिका स्तोत्र और देव्य अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

अविवाहित पुरुष विवाह हेतु 'पत्नी मनोरमां देहि ! मनो वृत्तानु सारिणीम ! तारिणीम दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम। का जप और पूजन करके मनोनुकूल जीवनसाथी पा सकते हैं। 


कुंवारी कन्याओं जिनके विवाह में बाधा आ रही हो वे ये मंत्र- ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी ! नन्द गोपसुतं देवि ! पतिं मे कुरु ते नमः। करके विवाह दोष से मुक्ति पा सकती हैं। अधिक धन प्राप्ति के लिए प्रतिदिन दशांग, गूगल और शहद मिश्रित हवन सामग्री से हवन करें।

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