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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   chaitra navratri 2021 9th day maa siddhidatri puja vidhi and mantra

Chaitra Navratri 2021: महानवमी पर होगी महाशक्ति सिद्धिदात्री की आराधना, जानिए पूजा विधि और मंत्र

Tue, 20 Apr 2021 01:41 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 20 Apr 2021 01:41 PM IST
सार

  • नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की आराधाना की जाती है। इनके आशीर्वाद के बगैर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण नहीं होती।

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chaitra navratri 2021 9th day maa siddhidatri puja vidhi and mantra
सिद्धिदात्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां श्रीमहाकाली श्रीमहालक्ष्मी और श्रीमहासरस्वती की आराधना का पावन पर्व नवरात्रि व्रत का अंतिम दिवस नवमी पर्व 21 अप्रैल को बुधवार को मनाया जाएगा। यही शक्ति आराधना चरम है क्योंकि इस दिन मां सिद्धिदात्री के रूप में अपने भक्तों को सभी नौ दिनों के जप-तप पूजा-पाठ का पूर्ण फल प्रदान करके उनके कार्यों की सिद्धि दिलाने स्वयं चलकर आती हैं। रणक्षेत्र में अनेकों महादैत्यों का संहार करते हुए मां शक्ति ने असुरों से कहा कि दुष्टों, 'एकैवाहं जगत्यत्र द्वितीया का ममापरा। पश्यैता दुष्ट मय्येव विशन्त्यो मद्बिभुतयः। अर्थात- हे दुष्ट ! मैं अकेली ही हूं ! इस संसार में मेरे शिवा दूसरी कौन है ! देख, ये मेरी ही विभुतियां हैं अतः मुझमें ही प्रवेश कर रही हैं। मैं अपनी एश्वर्यशक्ति से अनेकों रूपों में यहाँ उपस्थित हुई थी। ऐसा कहते हुए माँ ने सभी देवियों को अपने शरीर में समाहित कर लिया। पुनः अपने ही शरीर से अपनी जैसी नौ दुर्गाओं को प्रकट किया। पारलौकिक रूप में ये नौदुर्गा एक ही हैं किन्तु, लौकिक रूप में माँ के अलग-अलग रूपों को ही नौ दुर्गा कहा गया है। नवरात्रि में इन्हीं नौ दुर्गाओं की पूजा-आराधना करके भक्त अपने सभी मनोरथ पूर्ण कर लेते हैं।

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इनमें नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की आराधाना की जाती है। इनके आशीर्वाद के बगैर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण नहीं होती। पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी आठों सिद्धियों जिनमें, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व, और नौ निधियों से पूर्ण कर देती हैं। इनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर नारी का हुआ था जिसके कारण वे 'अर्द्धनारीश्वर' कहलाए। चार भुजाओं वाली माँ अपने हाथ में गदा, कमल पुष्प, शंख और चक्र धारण करती हैं इनका वाहन सिंह हैं।
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नवें दिन मां की उपासना के समय इस मंत्र से- 'वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्। कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धिदात्री यशस्वनीम्।। स्वर्णा वर्णा निर्वाणचक्र स्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्। शंखचक्र गदा, पद्मधरां सिद्धिदात्री भजेम्।। ध्यान करना चाहिए। पश्च्यात श्रीदुर्गा सप्तशती का सिद्ध एवं श्रेष्ठ नवार्ण मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। से यथासंभव अथवा यथा उपलब्ध सामग्री से हवन करें।
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उसके बाद इस मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै। नमस्तस्यै। नमस्तस्यै नमो नम:। से स्तुति करें।  हवन सामग्री में शहद, गूगल और दशांग का प्रयोग अवश्य करें। उसके बाद कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराएं और दक्षिणा आदि देकर विदा करें। इस प्रकार माँ सिद्धिदात्री की कृपा आपके पूरे परिवार पर बरसेगी।

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