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दही हांडी 2026: ‘गोविंदा आला रे’ का क्या है अर्थ? दही हांडी में क्यों लगाते हैं ये जयकारा

Thu, 03 Sep 2026 08:36 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 03 Sep 2026 08:36 PM IST
सार

Dahi Handi 2026: दही हांडी उत्सव में गूंजने वाला ‘गोविंदा आला रे’ जयकारा आखिर क्यों खास है? जानें इसका अर्थ, भगवान कृष्ण से इसका संबंध और दही हांडी में इसे लगाने की वजह।

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Dahi Handi 2026 Govinda Aala Re’Meaning Explained Know Its Connection With Lord Krishna
dahi handi - फोटो : amar ujala

Dahi Handi 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाने वाला दही हांडी उत्सव देशभर में खास उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र में इस पर्व की अलग ही धूम देखने को मिलती है। ऊंचाई पर लटकी दही-माखन से भरी मटकी को फोड़ने के लिए गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाती हैं। इस दौरान पूरा माहौल ‘गोविंदा आला रे’ के जयकारे से गूंज उठता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ‘गोविंदा आला रे’ का मतलब क्या है और दही हांडी में यह जयकारा क्यों लगाया जाता है? यह सिर्फ उत्साह बढ़ाने वाला नारा है या इसके पीछे भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कोई धार्मिक भावना भी है? आइए जानते हैं।

Dahi Handi 2026 Govinda Aala Re’Meaning Explained Know Its Connection With Lord Krishna
dahi handi - फोटो : adobe stock

‘गोविंदा आला रे’ का क्या अर्थ है?
‘गोविंदा आला रे’ मुख्य रूप से मराठी भाषा में बोला जाने वाला लोकप्रिय जयकारा है। इसका सामान्य अर्थ है ‘गोविंदा आ गए हैं’ या ‘गोविंद आ गए।’ यहां ‘गोविंदा’ भगवान श्रीकृष्ण का एक प्रसिद्ध नाम है। इसलिए इस जयकारे के जरिए भगवान कृष्ण का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। ‘आला’ मराठी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘आया’ या ‘आ गए’ होता है। इस तरह ‘गोविंदा आला रे’ का भाव भगवान के आगमन की खुशी व्यक्त करना है।

Dahi Handi 2026 Govinda Aala Re’Meaning Explained Know Its Connection With Lord Krishna
दही हांडी में यह जयकारा क्यों लगाया जाता है? - फोटो : adobe stock

दही हांडी में यह जयकारा क्यों लगाया जाता है?
दही हांडी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक कथाओं में कृष्ण को माखन और दही बेहद प्रिय बताया गया है। उनकी बाल लीलाओं में माखन चुराने और दोस्तों के साथ मिलकर ऊंचाई पर रखी मटकी तक पहुंचने की कथाएं काफी प्रसिद्ध हैं। इसी परंपरा की याद में दही हांडी में मटकी को ऊंचाई पर बांधा जाता है। गोविंदा की टोली एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाती है और सबसे ऊपर पहुंचने वाला सदस्य मटकी फोड़ता है। मटकी तक पहुंचने के दौरान ‘गोविंदा आला रे’ का जयकारा गोविंदा टीम का उत्साह बढ़ाता है और पूरे आयोजन को कृष्ण भक्ति से जोड़ता है।

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Dahi Handi 2026 Govinda Aala Re’Meaning Explained Know Its Connection With Lord Krishna
भगवान कृष्ण को गोविंदा क्यों कहा जाता है? - फोटो : instagram

भगवान कृष्ण को गोविंदा क्यों कहा जाता है?
भगवान श्रीकृष्ण के अनेक नाम हैं, जिनमें गोविंद और गोपाल प्रमुख हैं। ‘गोविंद’ नाम कृष्ण की गोपाल लीला और गायों से जुड़े उनके स्वरूप से भी संबंधित माना जाता है। कृष्ण का बचपन गोकुल और वृंदावन में बीता, जहां वे ग्वाल-बालों के साथ गाय चराते और अपनी बाल लीलाओं से सभी का मन मोहते थे। इसी वजह से उनकी भक्ति परंपरा में ‘गोविंद’ नाम का विशेष स्थान है।

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Dahi Handi 2026 Govinda Aala Re’Meaning Explained Know Its Connection With Lord Krishna
dahi handi - फोटो : adobe stock

दही हांडी और कृष्ण की बाल लीला का क्या संबंध है?
दही हांडी की परंपरा को कृष्ण की माखन चोरी की बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि गोकुल में माखन को बच्चों की पहुंच से दूर रखने के लिए मटकी को ऊंचाई पर टांगा जाता था। बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते और मटकी तक पहुंचकर माखन निकालते थे। इसी कथा को उत्सव के रूप में मनाने के लिए दही हांडी में मानव पिरामिड बनाने की परंपरा लोकप्रिय हुई। ‘गोविंदा आला रे’ सिर्फ जयकारा नहीं, उत्साह का प्रतीक भी दही हांडी में मानव पिरामिड बनाना आसान नहीं होता। इसमें गोविंदा टीम के सभी सदस्यों को एक-दूसरे पर भरोसा करते हुए संतुलन बनाए रखना पड़ता है। जब पूरी टीम और आसपास मौजूद लोग एक साथ ‘गोविंदा आला रे’ का जयकारा लगाते हैं, तो इससे उत्साह और जोश बढ़ता है। मटकी फूटने के बाद जयकारे की आवाज और तेज हो जाती है। इस तरह यह जयकारा धार्मिक भावना के साथ-साथ सामूहिक उत्साह और टीम भावना का भी प्रतीक बन गया है।

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