चैत्र नवरात्रि 2020: मां कालरात्रि की पूजा का दिन, जानिए पूजा विधि, कथा, मंत्र और महत्व
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गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है व इनके तीन नेत्र हैं जो ब्रह्माण्ड के तरह गोल हैं। इनसे बिजली के सामान चमकीली किरणें प्रवाहित होती रहती हैं। इनकी नासिका के श्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएं निकलती रहती हैं एवं इनका वाहन गर्दभ है।
इनके ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं तथा दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है।बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खडग धारण किए हुए हैं।मां कालरात्रि का स्वरुप देखने में अत्यंत भयानक है,लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं।इसी कारण इनका एक नाम शुभंकरी भी है अतः इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है।
दुर्गा पूजा के दिन साधक का मन 'सहस्त्रार चक्र' में स्थित रहता है
दुर्गा पूजा के दिन साधक का मन 'सहस्त्रार चक्र' में स्थित रहता है। उसके लिए ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। इस चक्र में स्थित साधक का मन पूर्ण्तः मां कालरात्रि के स्वरुप में स्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह भागी हो जाता है एवं उसके समस्त पापों-विघ्नों का नाश हो जाता है।मां कालरात्रि के स्वरुप विग्रह को अपने ह्रदय में स्थित करके मनुष्य को एकनिष्ठ भाव से उनकी उपासना करनी चाहिए एवं मन,वचन,काया की पवित्रता रखनी चाहिए।यह शुभंकरी देवी हैं इनकी उपासना से होने वाले शुभों की गणना नहीं की जा सकती।
पूजा फल
पूजा विधि
ध्यान मंत्र
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥