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Bhaum Pradosh Vrat : कब है कार्तिक माह का पहला प्रदोष व्रत? बनेंगे 3 शुभ संयोग, जानें महत्व

Mon, 21 Oct 2024 12:34 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 21 Oct 2024 12:34 PM IST
सार

Bhaum Pradosh Vrat 2024 Date: पंचांग के अनुसार प्रति माह दो प्रदोष व्रत आते हैं। पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन और दूसरा व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन रखा जाता है।

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Bhaum Pradosh Vrat Date Time Shubh Yog three auspicious yog and significance in hindi
भौम प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala

विस्तार

Bhaum Pradosh Vrat 2024: कार्तिक मास का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन मनाया जाता है। इस दिन मंगलवार है इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अक्तूबर में प्रदोष का यह आखिरी व्रत है। पंचांग के अनुसार प्रति माह दो प्रदोष व्रत आते हैं। पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन और दूसरा व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस बार भौम प्रदोष की व्रत पूजा के लिए आपके पास ढाई घंटे का समय होगा।  पूजा के समय हस्त नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कार्तिक माह का पहला प्रदोष व्रत या भौम प्रदोष व्रत कब है?

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कार्तिक माह प्रदोष व्रत तिथि 
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरंभ:  29 अक्तूबर,  प्रातः 10:31 बजे 
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त: 30 अक्तूबर, दोपहर 1:15 बजे 
प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर कार्तिक माह का पहला प्रदोष  यानी भौम प्रदोष व्रत का पारण 29  अक्तूबर को रखा जाएगा। 

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन धनत्रयोदशी का त्योहार भी मनाया जाता है, जिसे धनतेरस भी कहा जाता है। धनतेरस का त्योहार भौम प्रदोष के साथ मनाया जाएगा। 

भौम  प्रदोष 2024 पूजा मुहूर्त
भौम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय: 29 अक्तूबर सायं 05:38 से रात्रि 08:13 तक है।  
पूजा की कुल अवधि- 2 घंटे 35 मिनट।  भौम प्रदोष की पूजा हस्त नक्षत्र में होगी। 
भौम प्रदोष के दिन का ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:48 से प्रातः 05:40 तक है। 
 इस दिन का  अभिजीत मुहूर्त : प्रातः 11:42 से दोपहर12:27 तक।

भौम प्रदोष व्रत शुभ संयोग 
इस बार भौम प्रदोष व्रत के दिन तीन शुभ संयोग बनेंगे। भौम प्रदोष में पुष्कर योग प्रातः  6:31 बजे से प्रातः 10:31 बजे तक रहेगा। दूसरी ओर, इंद्र योग प्रातः 7:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद वैधृति योग रहेगा। व्रत के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह से शाम 6 बजकर 34 मिनट तक है। उसके बाद से हस्त नक्षत्र है, जो पूरी रात है। 
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भौम प्रदोष व्रत का महत्व
भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ हनुमानजी की पूजा करने से ग्रह-नक्षत्रों का शुभ प्रभाव पड़ता है और जीवन में सुख समृद्धि के योग बनते हैं। हनुमान जी की पूजा इसीलिए क्योंकि वह रुद्रवतार हैं। मंगल ग्रह का एक नाम भौम भी है, इस व्रत के पुण्य फल से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है और अशुभ प्रभाव में कमी आती है। अगर किसी की पर्सनल और प्रफेशनल लाइफ में समस्याएं खत्म नहीं हो रही हैं तो उनके लिए भौम प्रदोष व्रत करना काफी लाभदायक माना जाता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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