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Baglamukhi Jayanti 2025: बगलामुखी जयंती कल, विजय और शत्रुनाश की शक्ति की आराधना का पर्व

Sun, 04 May 2025 12:38 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 04 May 2025 12:38 PM IST
सार

बगलामुखी देवी की पूजा का महत्व अत्यंत व्यापक और फलदायी माना गया है। देवी की उपासना से साधक को शत्रु बाधा, वाद-विवाद, मुकदमेबाजी और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

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baglamukhi jayanti 2025 What is Baglamukhi famous for and puja vidhi
Baglamukhi Jayanti - फोटो : adobe stock

विस्तार

Baglamukhi Jayanti 2025: हिंदू धर्म की दस महाविद्याओं में शामिल देवी बगलामुखी की जयंती इस वर्ष 5 मई, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व वैशाख शुक्ल अष्टमी को आता है और शक्ति उपासना के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देवी बगलामुखी को 'पीताम्बरा' भी कहा जाता है, क्योंकि इनकी पूजा में पीला रंग सर्वाधिक प्रभावशाली माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी ने अपने स्तंभन स्वरूप में अवतार लेकर संसार की रक्षा की थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को भी मां बगलामुखी की साधना करने को कहा था ताकि वे विजय प्राप्त कर सकें और उनके शत्रुओं का अंत हो। पांडवों ने बगलामुखी माता की पूजा कर विजय प्राप्त की थी।
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पूजा का महत्व
बगलामुखी देवी की पूजा का महत्व अत्यंत व्यापक और फलदायी माना गया है। देवी की उपासना से साधक को शत्रु बाधा, वाद-विवाद, मुकदमेबाजी और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह भी मान्यता है कि देवी की कृपा से साधक की वाणी में प्रभाव आता है और उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। तांत्रिक साधनाओं में देवी बगलामुखी की पूजा को विशेष स्थान प्राप्त है। राजनेता, वकील, प्रशासनिक अधिकारी और न्याय के क्षेत्र से जुड़े लोग देवी की आराधना कर सफलता प्राप्त करते हैं। देवी की साधना से दुर्विचारों, भय, भ्रम और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है।
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पूजन विधि
बगलामुखी जयंती के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके पीला कपड़ा बिछाएं और देवी बगलामुखी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। देवी को हल्दी, चने की दाल, पीले पुष्प, चंपा के फूल, पीली मिठाइयाँ और पीताम्बर वस्त्र अर्पित करें। पूजा में तांबे या पीतल के कलश की स्थापना कर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें। इसके बाद “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” इस मूल मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। जाप के लिए हल्दी या पीले चंदन की माला का उपयोग शुभ माना जाता है। अंत में दीपक, धूप, कपूर से आरती करें और भोग अर्पित करें।
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पूजा के नियम
इस दिन साधक को ब्रह्मचर्य और सात्त्विकता का पालन करना चाहिए। पूजा एकांत, शांत और पवित्र स्थान पर करनी चाहिए। पूजा से पूर्व मन, वचन और शरीर की शुद्धि आवश्यक मानी गई है। देवी की साधना को कभी भी किसी को हानि पहुंचाने या अनुचित कार्यों के लिए नहीं करना चाहिए। यह पूजा आत्मरक्षा, न्याय प्राप्ति, मन की स्थिरता और सत्य की रक्षा के लिए की जाती है। बगलामुखी जयंती केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम और विजय की प्रतीक देवी की आराधना का दिन है। सही विधि और भावना से की गई साधना से साधक को अद्भुत मानसिक शक्ति और शत्रुनाश की सिद्धि प्राप्त होती है। 

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