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Ashadha Amavasya 2025: पितरों की शांति और समृद्धि के लिए आषाढ़ अमावस्या पर करें ये आठ काम

Sun, 22 Jun 2025 01:13 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 22 Jun 2025 01:13 PM IST
सार

Ashadha Amavasya 2025: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 24 जून को शाम 7 बजे शुरू होगी और 25 जून को शाम 4.02 बजे समाप्त होगी। ऐसे में आषाढ़ अमावस्या 25 जून 2025 यानी बुधवार को मान्य होगी।

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Ashadha Amavasya 2025 Date Remedies How to Light Diyas on Amavasya Puja Vidhi Rituals Mantra and Niyam in Hind
अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। - फोटो : adobe stock

विस्तार

Ashadha Amavasya 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यह दिन पितरों की शांति, दोष निवारण और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ होता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 24 जून को शाम 7 बजे शुरू होगी और 25 जून को शाम 4.02 बजे समाप्त होगी। ऐसे में आषाढ़ अमावस्या 25 जून 2025 यानी बुधवार को मान्य होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय न केवल वर्तमान जीवन को सुखमय बनाते हैं, बल्कि आगामी पीढ़ियों के जीवन में भी शुभ फल देते हैं।
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1. पीपल के वृक्ष की पूजा और जल अर्पण
आषाढ़ अमावस्या पर प्रातः स्नान करके पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। शास्त्रों में पीपल को पितरों और त्रिदेवों का वास स्थल माना गया है। इससे पितृ दोष भी शांत होता है और वंश में समृद्धि आती है।
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2. पवित्र नदी में स्नान या तिल-जल अर्पण
इस दिन गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायक होता है। यदि नदी तक जाना संभव न हो, तो घर में जल में गंगाजल का सेवन करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल-जल अर्पित करें। यह पितृ ऋण से मुक्ति दिलाता है।
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3. पितरों के नाम पर भोजन और दान
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक भोजन बनाकर गाय, कुत्ता, कौआ, ब्राह्मण और जरूरतमंद को भोजन कराएं। यह उपाय उनके आशीर्वाद को आकर्षित करता है और पारिवारिक कष्टों को दूर करता है।

4. ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप
इस दिन विशेष रूप से शिव जी की उपासना करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करें। यह स्वास्थ्य, दीर्घायु और समस्त रोगों से रक्षा प्रदान करता है।

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5. वृक्षारोपण करें  
आषाढ़ अमावस्या पर वृक्ष लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से पीपल, आम,बरगद,अशोक या नीम के वृक्ष लगाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और पर्यावरण को भी लाभ होता है। यह दान का एक श्रेष्ठ स्वरूप है।

6. घर में शंख और घंटी बजाएं
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन घर में शंख और घंटी बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।

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7. काले तिल और लोहे का दान करें
काले तिल, लोहा, तेल, वस्त्र आदि का दान अमावस्या पर विशेष फलदायी होता है। यह राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को भी शांत करता है और आर्थिक समस्याओं से राहत दिलाता है।

8. गरीबों को अन्न, वस्त्र और छाता दें
मान्यता है कि वर्षा ऋतु के आगमन पर छाता और वस्त्र दान करने से विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है और वर्षभर जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आती।



 
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