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Anant Chaturdasi 2025: 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी, जानिए महत्व, पूजा विधि और कथा

Thu, 04 Sep 2025 12:10 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 04 Sep 2025 12:10 PM IST
सार

Anant Chaturdasi 2025: अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का अत्यधिक महत्व माना गया है। यह अनंत सूत्र सूत के धागे को हल्दी में रंगकर 14 गांठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में धारण किया जाता है

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Anant Chaturdasi 2025 Date Puja Vidhi Time Importance Katha And Significance
अनंत चतुर्दशी - फोटो : instagram

विस्तार

Anant Chaturdasi 2025: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। वर्ष 2025 में यह पर्व 6 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा।
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अनंत सूत्र का महत्व
अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का अत्यधिक महत्व माना गया है। यह अनंत सूत्र सूत के धागे को हल्दी में रंगकर 14 गांठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में धारण किया जाता है। प्रत्येक गांठ पर भगवान विष्णु के स्वरूप- अनंत, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुण्ठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविन्द की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस सूत्र को धारण करने से व्यक्ति सभी कष्टों से मुक्त रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि
इस दिन स्नानादि के बाद कलश स्थापना करके उस पर कुश से भरा हुआ लोटा रखें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने केसर, रोली और हल्दी से रंगे हुए डोरे रखकर उनकी गंध, पुष्प, अक्षत, धूप-दीप आदि से पूजा करें। मिष्ठान का भोग लगाएं और अनंत भगवान का ध्यान करते हुए अनंत सूत्र धारण करें। यह डोरा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला और अनंत फल देने वाला माना गया है। इस दिन श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और सत्यनारायण कथा करने का भी विशेष महत्व है।
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महाभारत की कथा और पांडवों का उद्धार
महाभारत के अनुसार जब पांडव जुए में पराजित होकर वनवास भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण उनसे मिलने आए। युधिष्ठिर ने अपनी पीड़ा बताई और उपाय पूछा। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें भाद्र शुक्ल चतुर्दशी का व्रत कर अनंत भगवान की पूजा करने का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि अनंत भगवान विष्णु का ही स्वरूप हैं जो चतुर्मास में शेषनाग पर अनंत शयन करते हैं। युधिष्ठिर ने परिवार सहित यह व्रत किया और अंततः उन्हें हस्तिनापुर का राजपाट पुनः प्राप्त हुआ।

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गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी
इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी तिथि को गणेश चतुर्थी पर स्थापित की गई गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। भक्तगण भगवान गणेश को विधिवत विदाई देकर घर में सुख-समृद्धि और विघ्नों की समाप्ति की प्रार्थना करते हैं। इस कारण अनंत चतुर्दशी का पर्व विष्णु और गणेश दोनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर बन जाता है।


 
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