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Akhuratha Sankashti Ganesh Chaturthi: अखुरथ चतुर्थी का व्रत आज, जानिए इसका महत्व और पूजा विधि
Wed, 22 Dec 2021 07:38 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 22 Dec 2021 07:38 AM IST
सार
Akhuratha Sankashti Ganesh Chaturthi: संकष्टी चतुर्थी के दिन जो सच्चे मन से शिव पुत्र भगवान गणेश का ध्यान करता है उसकी सभी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है और जीवन में सदैव सुख-समृद्धि का वास होता है।
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अखुरथ संकष्टी चतुर्थी: जब भी पौष माह में संकष्टी चतुर्थी पड़ती है तब इसे अखुरथ चौथ कहते हैं। इस बार अखुरथ चौथ साल में दो बार पड़ी है।
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
Akhuratha Sankashti Ganesh Chaturthi: 22 दिसंबर 2021 को पौष माह की संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इसे अखुरथ चौथ व्रत के नाम भी जाना जाता है। जब भी पौष माह में संकष्टी चतुर्थी पड़ती है तब इसे अखुरथ चौथ कहते हैं। इस बार अखुरथ चौथ साल में दो बार पड़ी है। इसके पहले 2 जनवरी 2021 को पौष माह में और अब फिर से 22 दिसंबर 2021 को यह व्रत रखा जा रहा है। दरअसल हिंदू कैलेंडर में तिथियां आगे और पीछे यानी कम या ज्यादा हो जाती है इस कारण से अंग्रेजी कैलेंडर में पौष का महीना दो बार आ गया। तिथियों के घट या बढ़ जाने से हिंदू कैलेंडर के महीने आगे हो जाते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना विधि विधान से की जाती है। इस तिथि पर व्रत रखा जाता है। रात के समय चंद्रमा की पूजा और जल अर्पित किया जाता है। चतुर्थी तिथि पर व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से सभी तरह के संकट दूर हो जाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार चतुर्थी का व्रत रखने पर सौभाग्य और संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है।
संकष्टी चतुर्थी पर गणेश पूजा का महत्व
संकष्टी जैसे की नाम से पता चलता है इसका मतलब होता है संकट को हरने वाली। इस कारण से संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा आराधना कर दुखों और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। भगवान गणेश को शास्त्रों में विघ्नहर्ता कहा जाता है। इनकी पूजा उपासना करने से मनुष्य के जीवन से कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। संकष्टी चतुर्थी के दिन जो सच्चे मन से शिव पुत्र भगवान गणेश का ध्यान करता है उसकी सभी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है और जीवन में सदैव सुख-समृद्धि का वास होता है।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
-अथुरा चतुर्थी के दिन जल्दी सुबह उठकर स्नान करें और साफ किया गया वस्त्र धारण करें।
- संकष्टी चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है ऐसे में अगर संभव हो तो हरा कपड़ा पहनें।
- स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेते हुए गणपति की पूजा- आराधना आरंभ करें।
- पूजा करने से पहले भगवान गणेश की मूर्ति को साफ करके उनके माथे पर तिल करें।
- फिर इसके बाद पूजा की सामग्री के साथ विधिवत पूजा करें। ध्यान रखें पूजा सामग्री में दूर्वा घास और लडडू का भोग अवश्य लगाएं।
- शाम के समय चंद्रमा के निकलने पर उन्हें अर्घ्य देते हुए गणेश वंदना और पाठ कर मन से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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संकष्टी चतुर्थी पर गणेश पूजा का महत्व
संकष्टी जैसे की नाम से पता चलता है इसका मतलब होता है संकट को हरने वाली। इस कारण से संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा आराधना कर दुखों और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। भगवान गणेश को शास्त्रों में विघ्नहर्ता कहा जाता है। इनकी पूजा उपासना करने से मनुष्य के जीवन से कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। संकष्टी चतुर्थी के दिन जो सच्चे मन से शिव पुत्र भगवान गणेश का ध्यान करता है उसकी सभी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है और जीवन में सदैव सुख-समृद्धि का वास होता है।
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संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
-अथुरा चतुर्थी के दिन जल्दी सुबह उठकर स्नान करें और साफ किया गया वस्त्र धारण करें।
- संकष्टी चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है ऐसे में अगर संभव हो तो हरा कपड़ा पहनें।
- स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेते हुए गणपति की पूजा- आराधना आरंभ करें।
- पूजा करने से पहले भगवान गणेश की मूर्ति को साफ करके उनके माथे पर तिल करें।
- फिर इसके बाद पूजा की सामग्री के साथ विधिवत पूजा करें। ध्यान रखें पूजा सामग्री में दूर्वा घास और लडडू का भोग अवश्य लगाएं।
- शाम के समय चंद्रमा के निकलने पर उन्हें अर्घ्य देते हुए गणेश वंदना और पाठ कर मन से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।