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Ahoi Ashtami 2024 Puja Vidhi: पहली बार रख रही हैं अहोई अष्टमी का व्रत, इन नियमों का रखें ध्यान
Thu, 24 Oct 2024 07:41 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Thu, 24 Oct 2024 07:41 AM IST
सार
अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।
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अहोई अष्टमी व्रत नियम
- फोटो : amar ujala
विस्तार
Ahoi Ashtami Vrat benefit: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यदि आप पहली बार इस व्रत को करने जा रही हैं तो आपको कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। यदि आप नियमों का पालन नहीं करते हैं तो व्रत अधूरा माना जाता है। इस दिन कुछ ऐसे काम होते हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। अगर आप पहली बार अहोई अष्टमी का व्रत रख रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं विस्तार से।
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अहोई अष्टमी व्रत के नियम
- अहोई माता की पूजा के लिए विशेष पूजा सामग्री जैसे – जल से भरा कलश, कुमकुम, चावल, मिठाई, दूर्वा, आदि ये सब चीजें पूजा में होनी जरूरी हैं। अहोई माता की तस्वीर या दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं।
- सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला होता है, जिसमें पूरे दिन पानी भी नहीं पिया जाता। निर्जला व्रत संभव न हो, तो फल ग्रहण कर सकती हैं।
- अहोई अष्टमी की पूजा का समय सूर्यास्त के बाद होता है। पूजा विधि के अनुसार आरती और प्रार्थना करें।
- तारे दिखाई देने के बाद व्रत का पारण करें। तारे को जल अर्पित कर, संतान की मंगल कामना के साथ व्रत समाप्त करें।
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अहोई अष्टमी व्रत के दिन न करें ये गलतियां
- अहोई अष्टमी व्रत के दिन किसी के साथ विवाद या कलह से बचें। नकारात्मक विचार, क्रोध, और निराशा से खुद को दूर रखें।
- झूठ बोलने या किसी को धोखा देने से व्रत का फल कम हो सकता है।
- अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला होता है, इसलिए दिनभर बिना पानी और भोजन के व्रत रखना चाहिए।
- अहोई अष्टमी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं किया जाता, इसलिए सूर्यास्त के बाद तारे देख कर ही व्रत का पारण करें।
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