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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Ahoi Ashtami 2024 Vrat Upay Puja Know its Importance and Significance in Hindi

Ahoi Ashtami 2024: अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए करें यह उपाय

Wed, 23 Oct 2024 07:25 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 23 Oct 2024 07:25 AM IST
सार

Ahoi Ashtami 2024 Vrat Upay: अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। माता अपने बच्चों के लिए अहोई माता की मूर्ति या चित्र के सामने दीया जलाकर धूप-दीप अर्पित करती हैं।

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Ahoi Ashtami 2024 Vrat Upay Puja Know its Importance and Significance in Hindi
अहोई अष्टमी - फोटो : amar ujala

विस्तार

Ahoi Ashtami 2024 Vrat Upay: अहोई अष्टमी का व्रत मुख्य रूप से माताओं द्वारा संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन विशेष पूजा और उपायों का पालन किया जाता है जिससे संतान का जीवन सुखमय और दीर्घायु हो। यहां कुछ धार्मिक उपाय दिए जा रहे हैं जिन्हें अहोई अष्टमी पर अपनाकर आप अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकते हैं।
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1. अहोई माता की पूजा और संतान की कुशलता
अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। माता अपने बच्चों के लिए अहोई माता की मूर्ति या चित्र के सामने दीया जलाकर धूप-दीप अर्पित करती हैं। इस पूजा के दौरान संतान की कुशलता और दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है। माताएं  अहोई माता से आशीर्वाद मांगती हैं कि उनकी संतान हर विपत्ति से सुरक्षित रहे और खुशहाल जीवन व्यतीत करें।
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2. संतान के नाम से दान
इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। अहोई अष्टमी पर माता अपनी संतान के नाम से गरीबों और जरूरतमंदों को वस्त्र, अनाज, मिठाई और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करती हैं। माना जाता है कि इस दिन दिया गया दान संतान के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लेकर आता है। संतान की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन के लिए दान करना शुभफलदायी होता है।
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3. सप्त धान्य का प्रयोग
अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए सप्त धान्य (सात प्रकार के अनाज) का प्रयोग किया जाता है। इन धान्यों को अहोई माता की पूजा में शामिल किया जाता है और इसके बाद इसे गरीबों को दान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि सप्त धान्य के दान से संतान के जीवन में समृद्धि और दीर्घायु आती है और वे हर प्रकार की बाधाओं से सुरक्षित रहते हैं।

4. तारों की पूजा और दीया जलाना
अहोई अष्टमी की शाम को तारों की पूजा की जाती है। इस पूजा में माताएं आकाश में तारे देखकर अहोई माता से प्रार्थना करती हैं और संतान की लंबी उम्र की कामना करती हैं। तारों के सामने दीया जलाने से माता अहोई प्रसन्न होती हैं और संतान को आशीर्वाद देती हैं। यह पूजा संतान के जीवन में खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक प्रभावी उपाय माना जाता है।


5. निर्जला व्रत और संतान के नाम से प्रार्थना
अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत को अत्यंत कठिन और शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि दिनभर पानी नहीं पीया जाता है। व्रत के दौरान माताएं अपनी संतान के लिए अहोई माता से विशेष प्रार्थना करती हैं। यह व्रत संतान के जीवन में आने वाली हर विपत्ति को दूर करने का उपाय माना जाता है।

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