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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Ahoi Ashtami 2024 Date Time Vrat Katha Aarti Puja Vidhi in hindi

Ahoi Ashtami Vrat Katha: अहोई अष्टमी व्रत आज , यहां पढ़ें व्रत कथा और आरती

Thu, 24 Oct 2024 06:02 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 24 Oct 2024 06:02 AM IST
सार

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है।  इस दिन मासिक कालाष्टमी भी मनाई जाती है। माताएं अपने बच्चों के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।

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Ahoi Ashtami 2024 Date Time Vrat Katha Aarti Puja Vidhi in hindi
Ahoi Ashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ahoi Ashtami Ki Katha: आज अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है।  इस दिन मासिक कालाष्टमी भी मनाई जाती है। माताएं अपने बच्चों के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। पूरे दिन निर्जला रहकर वह शाम को अहोई माता की पूजा करती है और तारे उगते ही अपना व्रत खोलती है। अहोई अष्टमी की पूजा करते समय व्रत का इतिहास पढ़ना और आरती करना बहुत जरूरी है, तभी व्रत पूरा माना जाता है। यहां पढ़ें सम्पूर्ण व्रत कथा आरती और पूजा विधि 
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Ahoi Ashtami 2024 Date Time Vrat Katha Aarti Puja Vidhi in hindi
अहोई अष्टमी व्रत कथा - फोटो : amar ujala

अहोई अष्टमी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक साहूकार रहता था जिसके सात बेटे और सात बहूएं थीं। सात ही एक पुत्री भी थी जो दिवाली से पहले अपने  माता-पिता के घर आई थी। जब सातों दुल्हनें अपने घरों को लीपने के लिए मिट्टी लेने के लिए दिवाली के जंगल में गईं, तो उनकी ननद भी उनके साथ गई।
साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने सात बेटों के साथ रहती थी।  मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया।  इस पर क्रोधित होकर स्याहु बोली- मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी। साहुकार की बेटी नि:संतान रहने के डर से रोने लगी और अपनी सातों भाभियों से विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। 
आखिर में उसकी सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इससे छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की मृत्यु के बाद उसने पंडित से इसका उपाय पूछा तो उसने सुरही गाय की सेवा करने को कहा।  एक दिन सुरही उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे स्याहु के पास ले जाती है। फिर वह स्याहु की सेवा करती है तब स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है। तब से ही अहोई अष्टमी के दिन स्याहु का चित्र बनाकर उसकी पूजा की जाती है। 

Ahoi Ashtami 2024 Date Time Vrat Katha Aarti Puja Vidhi in hindi
अहोई अष्टमी - फोटो : amar ujala

अहोई अष्टमी की आरती

जय अहोई माता जय अहोई माता।
तुमको निशिदिन सेवत हर विष्णु विधाता॥ जय० ॥

ब्रह्माणी रूद्राणी कमला तू ही है जगमाता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता। जय० ॥

माता रूप निरंजन सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल आता। जय० ॥

तू ही है पाताल वसंती, तू ही शुभदाता।
कर्मप्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता। जय० ॥

जिस घर थारो बासो वाही में गुण आता।
कर न सके सोई करले मन नहीं घबराता। जय० ॥

तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव तुम बिन नही जाता। जय० ॥

शुभ गुण सुन्दर मुक्ता क्षीरनिधि जाता।
रत्न चतुर्दश तोकूं कोई नहीं पाता। जयः ॥

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता।
उर उमंग अतिं उपजे पाप उतर जाता। जय० ॥

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अहोई अष्टमी व्रत कथा - फोटो : amar ujala

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

  • अहोई अष्टमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • अब साफ हाथों से घर की एक दीवार को अच्छे से साफ कर लें।
  • इस दीवार पर गेरू या कुमकुम से अहोई माता की तस्वीर बनाएं। फिर उनके समक्ष दीपक जलाएं और अहोई माता की कथा पढ़ें।
  • कथा सुनने के बाद देवी से बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करें।
  • फिर शाम को तब पूजा करें, जब आसमान में तारों का उदय हो जाए।
  • आसमान में तारों का उदय हो जाने के बाद आप उन्हें जल दें, और मंत्रों का जाप करें।
  • फिर पूजा के लिए बने पकवान जैसे हलवा, पूरी, मिठाई, आदि को भोग अहोई माता को लगाएं।
  • इसके बाद पूरे परिवार के साथ माता की पूजा करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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