फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Ahoi Ashtami 2020 vrat vidhi significance and vrat katha of Ahoi Ashtami

Ahoi Ashtami 2020: कब है अहोई अष्टमी, संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है यह व्रत

Mon, 02 Nov 2020 12:01 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 02 Nov 2020 12:01 PM IST
विज्ञापन
Ahoi Ashtami 2020 vrat vidhi significance and vrat katha of Ahoi Ashtami
अहोई अष्टमी - फोटो : self

Ahoi Ashtami 2020: अहोई अष्टमी व्रत संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। यह व्रत हर साल कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल अहोई अष्टमी व्रत 8 नवंबर को रखा जाएगा। इस पर्व को खासतौर पर उत्तर भारत में मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन उपवास करती हैं साथ ही अहोई देवी की पूजा करती है। यह दिन देवी अहोई माता को समर्पित होती है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी व्रत का महत्व।

विज्ञापन


अहोई अष्टमी मुहूर्त
8 नवंबर दिन रविवार की शाम 5 बजकर 26 मिनट से शाम 6 बजकर 46 मिनट तक
अवधि- 1 घंटा 19 मिनट
अष्टमी तिथि आरंभ- 8 नवंबर की सुबह 7 बजकर 28 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त- 9 नवंबर की सुबह 6 बजकर 50 मिनट तक

Ahoi Ashtami 2020 vrat vidhi significance and vrat katha of Ahoi Ashtami
अहोई अष्टमी
अहोई अष्टमी व्रत विधि
  • माताएं सूर्योदय से पूर्व स्नान करके व्रत रखने का संकल्प लें। 
  • अहोई माता की पूजा के लिए दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं।
  • साथ ही सेह और उसके सात पुत्रों का चित्र बनाएं। 
  • सायंकाल के समय पूजन के लिए अहोई माता के चित्र के सामने एक चौकी रखें।
  • उस पर जल से भरा कलश रखें।
  • रोली-चावल से माता की पूजा करें। 
  • मीठे पुए या आटे के हलवे का भोग लगाएं। 
  • कलश पर स्वास्तिक बना लें और हाथ में गेंहू के सात दाने लेकर अहोई माता की कथा सुनें। 
  • इसके उपरान्त तारों को अर्घ्य देकर अपने से बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
विज्ञापन
विज्ञापन

Ahoi Ashtami 2020 vrat vidhi significance and vrat katha of Ahoi Ashtami
अहोई अष्टमी व्रत का महत्व - फोटो : सोशल मीडिया

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखने से संतान के कष्टों का निवारण होता है एवं उनके जीवन में सुख-समृद्धि व तरक्की आती है। ऐसा माना जाता है कि जिन माताओं की संतान को शारीरिक कष्ट हो, स्वास्थ्य ठीक न रहता हो या बार-बार बीमार पड़ते हों अथवा किसी भी कारण से माता-पिता को अपनी संतान की ओर से चिंता बनी रहती हो तो माता द्वारा विधि-विधान से अहोई माता की पूजा-अर्चना व व्रत करने से संतान को विशेष लाभ होता है।

कौन हैं मां अहोई
अहोई, अनहोनी शब्द का अपभ्रंश है। अनहोनी को टालने वाली माता देवी पार्वती हैं। इसलिए इस दिन मां पार्वती की पूजा-अर्चना का भी विधान है। अपनी संतानों की दीर्घायु और अनहोनी से रक्षा के लिए महिलाएं ये व्रत रखकर साही माता एवं भगवती पार्वती से आशीष मांगती हैं।

विज्ञापन

Ahoi Ashtami 2020 vrat vidhi significance and vrat katha of Ahoi Ashtami
अहोई अष्टमी व्रत कथा - फोटो : सोशल मीडिया

अहोई अष्टमी व्रत कथा
प्राचीन समय में किसी नगर में एक साहूकार रहता था उसके सात लड़के थे। दीपावली से पूर्व साहूकार की स्त्री घर की लीपा -पोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई ओर कुदाल से मिट्टी खोदने लगी। उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल सेह के बच्चे को लग गई जिससे सेह का बच्चा तत्काल मर गया। अपने हाथ से हुई ह्त्या को लेकर साहूकार की पत्नी को बहुत दुःख हुआ परन्तु अब क्या हो सकता था। वह शोकाकुल पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई। कुछ दिनों बाद उसके बेटे का निधन हो गया। फिर अचानक दूसरा, तीसरा ओर इस प्रकार वर्ष भर में उसके सातों बेटे मर गए। महिला अत्यंत व्यथित रहने लगी।

एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जान-बूझकर कभी कोई पाप नही किया। हाँ, एक बार खदान में मिट्टी खोदते हुए अनजाने में उससे एक सेह के बच्चे की ह्त्या अवश्य हुई है और उसके बाद मेरे सातों पुत्रों की मृत्यु हो गयी। यह सुनकर औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए कहा कि यह बात बताकर तुमने जो पश्चाताप किया है उससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है। 

तुम उसी अष्टमी को भगवती पार्वती की  शरण लेकर सेह ओर सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी आराधना करो और क्षमा-याचना करो। ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप नष्ट हो जाएगा। साहूकार की पत्नी ने उनकी बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास व पूजा-याचना की। वह हर वर्ष नियमित रूप से ऐसा करने लगी। बाद में उसे सात पुत्रों की प्राप्ति हुई, तभी से अहोई व्रत की परम्परा प्रचलित हो गई। इस कथा से अहिंसा की प्रेरणा भी मिलती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed