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Mahakumbh Stampede: महाकुंभ मेले में मची भगदड़ में बिहार की दो महिलाओं की मौत, चार लोग घायल
Wed, 29 Jan 2025 06:33 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज/प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज/प्रयागराज
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 29 Jan 2025 06:33 PM IST
सार
Mahakumbh Stampede Update: महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के मौके पर मची भगदड़ में गोपालगंज की दो महिलाओं की मौत हो गई। जबकि चार लोग घायल हो गए। घटना के वक्त सभी लोग आराम कर रहे थे। पढ़ें पूरी खबर...।
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शोक में डूब मृतकाओं के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मौनी अमावस्या के अवसर पर महाकुंभ मेला में गंगा स्नान के दौरान मची भगदड़ में बिहार के गोपालगंज जिले की दो महिलाओं की मौत हो गई। जबकि इस हादसे में चार लोग घायल हो गए। यह घटना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला क्षेत्र में बुधवार तड़के हुई। घायल व्यक्तियों का इलाज प्रयागराज स्थित अस्पताल में चल रहा है। घटना ने महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी त्रासदी का रूप ले लिया।
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जानकारी के मुताबिक, गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के रामनगर गांव निवासी सरस्वती देवी (68) और उनके भतीजे दीपू कुमार (14) महाकुंभ में गंगा स्नान के लिए प्रयागराज गए थे। परिवार के 11 अन्य सदस्य भी उनके साथ थे। बोलेरो वाहन से देवरिया जिले के भटनी जंक्शन पहुंचे थे और फिर ट्रेन से प्रयागराज पहुंचे थे। इस यात्रा में उचकागांव थाना के श्यामपुर गांव के धुरेंद्र गौड़ और उनकी पत्नी तारा देवी भी शामिल थे।
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बताया जा रहा है कि यह परिवार अमृत काल में स्नान करने के बाद मेले में विश्राम कर रहा था। उसी दौरान देर रात भगदड़ मच गई, जिससे सरस्वती देवी और तारा देवी दब कर घायल हो गईं और दोनों की मौत हो गई। इस भगदड़ में रामनाथ खटीक सहित चार अन्य लोग भी घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
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घटना की जानकारी परिजनों को टेलीफोन के माध्यम से मिली। सूचना मिलने के बाद परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के लिए यह एक गहरा सदमा था, क्योंकि महाकुंभ में स्नान करने की खुशी पल भर में ही गम में बदल गई। दुर्घटना की खबर मिलने के बाद परिवार के लोग और ग्रामीण दरवाजे पर जुटे गए और दोनों परिवार अपने स्वजनों के शव वापस आने का इंतजार करने लगे।
बताया जा रहा है कि सरस्वती देवी और तारा देवी दोनों महिलाओं वृद्ध अवस्था में थीं। उन्होंने धर्म के प्रति अपनी आस्था को प्राथमिकता दी। उनके परिजनों ने उन्हें स्नान के लिए वहां जाने से रोकने की कोशिश की थी। लेकिन वे नहीं रुकीं और अपनी आस्था में मग्न होकर महाकुंभ में स्नान करने के लिए निकल पड़ीं। लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह उनका आखिरी स्नान होगा।