Shimla Literature Festival: अलगाववाद फैलाने वाली लेखनी साहित्य नहीं जहर, उत्सव में युवा साहित्यकारों ने धार्मिक कट्टरता फैलाने वालों पर किया कटाक्ष
अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव उन्मेष के दूसरे दिन गेयटी थियेटर शिमला में युवा साहित्य पर परिचर्चा हुई। इसमें युवा साहित्यकारों ने धार्मिक कट्टरता फैलाने वालों पर कटाक्ष किया।
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अलगाववाद फैलाने वाली लेखनी साहित्य नहीं जहर है। साहित्य में सर्वधर्म समभाव की भावना होनी चाहिए। लेखन मानव हित में होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव उन्मेष के दूसरे दिन गेयटी थियेटर शिमला में युवा साहित्य पर परिचर्चा के दौरान शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के 10वीं के छात्र अभिनंदन चौधरी के सवाल पर विख्यात मराठी साहित्यकार राजन गवस ने यह बात कही। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित राजन सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे। अभिनंदन ने खुली चर्चा में सवाल किया था कि समाज में फैल रही कट्टरता और द्वेष क्या युवा साहित्य से खत्म हो सकता है? अभिनंदन को कविताएं लिखने का शौक है। उनके प्रश्न की युवा साहित्यकारों और श्रोताओं ने तालियां बजाकर सराहना की।
राजन ने कहा कि युवा साहित्यकारों को अपनी विचारधारा और भाषा को लेकर चिंतन करना चाहिए। फेसबुक और ब्लॉग लिखने वालों के पास भी गंभीर विचारधारा होनी चाहिए। फेसबुक पर लाइक तो मिलते हैं, पर विषय वस्तु चित्रित नहीं होती। महानगरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अच्छे साहित्य की रचना कर रहे हैं। उन्होंने युवा लेखकों को खुद से संवाद करने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों ने शोषक नहीं शोषित की आवाज बनने का प्रण लिया। सत्र में मणिका देवी (असमिया) और वेम्पल्ली गंगाधर (तेलगू) ने भी अपने विचार रखे।
चालीसा अजान विवाद में किया कट्टरता का विरोध
युवा मराठी कवयित्री कल्पना दुधाल ने कहा कि महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा और अजान पर हुए विवाद पर युवा साहित्यकारों ने धार्मिक कट्टरता का विरोध कर सर्वधर्म समभाव का समर्थन किया। उन्होंने मनुष्यता के पक्ष में लिखने और मातृभाषा को बचाए रखना का आह्वान किया और युवा साहित्यकारों के लिए आर्थिक संबल का मुद्दा भी उठाया।
धर्मांधता के खिलाफ सोशल मीडिया बना हथियार
बांग्ला युवा साहित्यकार विनोद घोषाल ने कहा कि युवा साहित्यकार सेक्युलर हैं। सभी धर्मों का सम्मान करते हुए धार्मिक कट्टराता के विरोध में कलम चलाता है। धर्मांधता के खिलाफ युवा साहित्यकार सोशल मीडिया को भी हथियार बना रहे हैं। सभी धर्म समान हैं, इसलिए युवा साहित्यकार लोगों को आपस में जोड़ने वाला साहित्य लिख रहे हैं।
केशव ने किया वृद्धों की भयावह स्थिति का चित्रण
गेयटी थियेटर में उन्मेष उत्सव के तहत आयोजित बहुभाषी कहानी पाठ सत्र की अध्यक्षता मंजुला राणा ने की। इसमें साहित्यकार केशव ने वर्तमान संदर्भ में वृद्धों की स्थिति का चित्रण किया और समाज के भयावह दौर से रूबरू किया। मदन गोपाल ने आरती प्रियदर्शिनी की गली और सादिक हुसैन ने लाफिंग इंडिया कहानी सुनाई। लीना शर्मा, मनु बालिगर और वर्षा अडालजा ने भी रचना पाठ किया। दोपहर के सत्र में आस्था का गायन: भारत में भक्ति साहित्य सत्र की अध्यक्षता रामजी तिवारी ने की।
साहित्यकार अर्शिया सेठी, एमए आलवार, एमएस आशादेवी, नंद किशोर पांडेय, प्रणव खुल्लर और वीरसागर जैन बतौर प्रतिभागी शामिल हुए। अंतिम सत्र में बहुभाषी कविता-पाठ सत्र की अध्यक्षता सुबोध सरकार ने की। साहित्यकार अग्निशेखर, अमरनाथ अमर, गौरी शंकर रैणा, मनोज चावला, मुकुल कुमार, राजू राम बिजारणिया, रमेश चंद मस्ताना और सिबाशीष मुखोपाध्याय ने रचना पाठ किया। कविता पाठ सुनने के लिए सभागार में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।