फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Women reached to sell apples in Matiana Mandi, expressed displeasure over getting low rates

बागवानी: सेब के अच्छे दाम के लिए अड़ गईं दो बहनें, बोलीं- बच्चे भी पालने हैं

Thu, 09 Sep 2021 01:35 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 09 Sep 2021 01:35 PM IST
सार

ननखड़ी के खुन्नी पनोली से सेब बेचने आई पिंका नेगी और उनकी बहन कल्पना ने कहा कि बागवान को मंडियों में फसल के सही रेट के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही। दवाइयों पर सब्सिडी खत्म कर दी है। कार्टन के रेट बढ़ा दिए।

विज्ञापन
Women reached to sell apples in Matiana Mandi, expressed displeasure over getting low rates
मतियाना मंडी में सेब बेचने पहुंचीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की मतियाना फल मंडी में सेब बेचने पहुंचीं महिलाओं के सेब का रेट जब 1450 रुपये लगाया गया तो उन्होंने खरीदार को दो टूक कह दिया, हमें बच्चे भी पालने हैं सही रेट दो, सेब की क्वालिटी देखो, कोई रस्टिंग नहीं है। खरीदार बोला, माल में छीटा (ओले के निशान) हैं। महिला बोली, थोड़ा तो होगा ही, बड़े पेड़ में जाली के बाहर लग जाता है। वेट, कलर में कोई कमी है तो बोलो।

विज्ञापन


खरीदार बोला, सेब नहीं बिकता मैडम वक्त बिकता है, आजकल यही मार्केट है। महिला बोली, हमें पता है ये सेब जब स्टोर से निकलेगा तो 250 रुपये बिकेगा। इंटरनेट का जमाना है हम सब देखते हैं। खरीदार रेट 1475 रुपये कर देता है। महिलाएं 1500 रुपये पर अड़ी रहती हैं। जिद के आगे खरीदार 1500 रुपये देने को राजी हो जाता है। पेटी का वजन करीब 28 किलो था।
विज्ञापन


ननखड़ी के खुन्नी पनोली से सेब बेचने आई पिंका नेगी और उनकी बहन कल्पना ने कहा कि बागवान को मंडियों में फसल के सही रेट के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही। दवाइयों पर सब्सिडी खत्म कर दी है। कार्टन के रेट बढ़ा दिए। बगीचे काट कर कोई और खेती करने का मन करता है। पहले प्रकृति ने ओलों की मार मारी अब मंडियों में खरीदार मनमानी करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बागवानों से ज्यादा लेबर कमा रही है, हम चौकीदार बन गए हैं। पिंका ने बताया कि उनके पति नहीं हैं, बेटा नौकरी करता है, इसलिए खुद सेब बेचने आना पड़ा। क्वालिटी के हिसाब से उनका सेब को 2000 रेट मिल सकता था, 700 तो पेटी पर खर्चा आ जाता है। सरकार हमारी नहीं सुनती। कंपनियों ने 72 रुपये रेट खोले हैं। उनको बढ़िया माल ही चाहिए। हल्का माल वापिस कर देते हैं।


खरीदार ने बताया कि पिछले साल भी रेट गिरे थे। माल की क्वालिटी सही नहीं आ रही। 2500 भी माल खरीदा था लाखों का नुकसान हुआ। महंगे डीजल और मनमानी कमीशन से बचाने के लिए सरकार को सोचना चाहिए। जो माल लेकर भागते हैं वो व्यापारी नहीं चोर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed